योगी और मस्जिद

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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उ.प्र. के मुखिया योगी आदित्यनाथ को मस्जिदों से खास नफरत है। उ.प्र. की अनगिनत मस्जिदों को ये सज्जन जमींदोज करवा चुके हैं। पर इनकी नफरत का घड़ा भरने का नाम ही नहीं लेता। इन्हें जितना मस्जिदों से परेशानी है उतनी ही बुलडोजर से मोहब्बत है। इस मोहब्बत के चलते ही ये बुलडोजर बाबा के नाम से मशहूर हो चुके हैं। हर दूसरे दिन जब तक बुलडोजर चलता नहीं, इन महाशय का खाना हजम नहीं होता।
    
अक्सर ही इनका बुलडोजर मुसलमानों के घरों-बस्तियों व मस्जिदों के चक्कर काटता नजर आ जाता है। अभी हाल ही में इन्होंने सहारनपुर की कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को जमींदोज करवा दिया और मस्जिद प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का हर्जाना भी ठोंक दिया। 
    
यह मस्जिद 315 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी थी और करीब 115 वर्ष पुरानी थी। मस्जिद प्रबंधन के पास मस्जिद की भूमि के कागजात नहीं थे और सरकार के पास भी अपने मालिकाने के कागजात नहीं थे। ऐसे में मनमाने तरीके से सहारनपुर प्रशासन ने इसे अवैध कब्जा यानी सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करार दे ढहा दिया। 
    
अब मस्जिद प्रबंधन हाईकोई गया है जहां उसे जुर्माने वसूली पर तो स्टे से राहत मिली है पर मालिकाना अभी भी विवादित है। 
    
उ.प्र. में ऐसे सैकड़ों मन्दिर, मस्जिद, स्कूल व अन्य इमारतें मौजूद हैं जो आजादी से पूर्व से चली आ रही हैं और जिनकी जमीन का मालिकाना स्पष्ट नहीं है। ऐसे में योगी सरकार को केवल मस्जिदों से ही दिक्कत है। यह दिखाता है कि मुसलमान अल्पसंख्यकों को निशाने पर ले वे उ.प्र. को संघ की सबसे क्रूर प्रयोगशाला बनाने पर तुले हैं। इसी प्रयोगशाला के पैदा हुए जहर से हिन्दू आबादी को बरगला ये न केवल अगला विधानसभा चुनाव जीतने की उम्मीद पाले हैं बल्कि प्रधानमंत्री बनने का भी ख्वाब पाले हैं। 
    
प्रेस कांफ्रेंस के मामले में ये मोदी की देखादेखी केवल खुद बोलते हैं और पत्रकारों को जुबान खोलने की इजाजत नहीं देते। अभी हाल में एक महिला पत्रकार ने जब सवाल पूछने की जुर्रत की तो योगी प्रेस कांफ्रेंस समाप्त कर चल दिये और भाजपा-संघ मण्डली व प्रशासन महिला पत्रकार के उत्पीड़न मंे जुट गया। जो चीज पूरे देश में मोदी-शाह मण्डली कर रही है वह योगी अकेले उ.प्र. में कर रहे हैं। उन्होंने एक तरीके का अर्द्धफासीवादी निजाम कायम कर लिया है। यहां कानून योगी की मर्जी से चलता है और संविधान, जनवादी अधिकार सब अलमारी में बंद हो चुके हैं। 
    
पर इनके इस शासन से त्रस्त जनमानस अपनी सहने की सीमा चुकती देख सड़कों पर उतरने लगा है और जितना वह सड़कों पर उतरता है योगी का बुलडोजर फिर किसी मस्जिद पर चल जनता को भरमाने में जुट जाता है। पर अब बुलडोजर अपनी आभा खोता जा रहा है। योगी के प्रशंसक अब घटने लगे हैं और योगी भी अब अगले चुनाव में जीत के प्रति घबराते जा रहे हैं और घबराहट में फिर अधिक मस्जिदें ढहाने चल दे रहे हैं। 

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