विविध

चूड़ी जुड़ाई मजदूरों की दशा

फिरोजाबाद/  फिरोजाबाद शहर में चूड़ी उत्पादन प्रक्रिया में नियोजित/कार्यरत चूड़ी जुड़ाई मजदूरों को चूड़ी जुड़ाई कार्य हेतु केरोसिन मिट््टी का तेल सेवायोजकों द्

हरिद्वार : एक मजदूर की मौत पर मजदूरों का संघर्ष

हरिद्वार/ दिनांक 27 मई को स्नो पैक कम्पनी नियर अम्बेडकर चौक, बाहदराबाद औद्योगिक क्षेत्र, हरिद्वार में सुबह 8.30 बजे भगवान दयाल नामक मजदूर की मशीन में इमर

खुलेआम श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाता शिवम आटो कम्पनी प्रबंधन

हरिद्वार/ शिवम् आटो कम्पनी सिडकुल हरिद्वार के डेसो चौक वाले क्षेत्र में स्थित है जो हीरो व महेंद्रा के लिए पुर्जे निर्माण करती है। इसमें लगभग 800 के आस-प

कर्जखोरी के जाल में फंसते आटो चालक

बरेली/ लगातार बढ़ती बेरोजगारी नौजवानों को निराशा व पस्तहिम्मती में ढकेल रही है। बरेली शहर में इसी तरह के बेरोजगार घर, मकान, जेवर गिरवी रखकर कर्ज लेकर आटो

आपका नजरिया - अम्बेडकरवादी संगठनों का हश्र

14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती कार्यक्रम में दो जगह पर मैं शामिल हुआ। पिछले साल भी 14 अप्रैल को दो कार्यक्रमों में शामिल हुआ था। पिछले साल और इस साल के अनुभव लगभग समान हैं।

दक्षिण अफ्रीका के चुनाव में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस अल्पमत में

1994 के सत्ता हस्तांतरण के बाद भी श्वेत पूंजीपतियों और साम्राज्यवादियों की लूट पूर्ववत जारी रही। संघर्ष के सालों में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस, सुधारवादी दक्षिण अफ्रीका की कम्युनिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन फेडरेशन कोसाटु का त्रिपक्षीय गठबंधन जो बना था वह सत्तासीन होने के बाद जारी रहा। लम्बे संघर्ष के दौरान जो व्यापक जन समर्थन मिला था, वह सत्ता में आने के बाद भी जारी रहा। 1999 के चुनाव में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस को 70 प्रतिशत मत मिले थे। 

लोकसभा चुनाव परिणामों के निहितार्थ

स्पष्ट है कि भाजपा व राजग के फिर सत्तासीन होने में बड़े पूंजीपति वर्ग का बहुत बड़ा हाथ है। हिन्दू फासीवादियों के अपने ठोस आधार के साथ यही वह कारक है जो उन्हें सत्ता में पहुंचा देता है। यही 2014 व 19 के लिए सच था और यही 2024 के लिए भी सच है। और कोई कारण नहीं है कि बड़ा पूंजीपति वर्ग अपनी सोच व नीति में परिवर्तन करे। 

लोकसभा चुनाव और मजदूर मेहनतकश अवाम

पिछले 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव की मतगणना समाप्त हुई नतीजतन छक्। गठबंधन को जिसमें भाजपा सहित छोटे-मोटे दल तथा क्षेत्रीय पार्टियां मिलकर 38 दल हैं वह 293 सीट प्राप्त करने

गरीब मेहनतकशों के यातायात में रेलवे ने सेंध मारी

रेलवे को भारत की जीवन रेखा कहा जाता है। रेलवे भारत में सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है। अगर रोजगार की बात छोड़ भी दें तो रेलवे गरीब मेहनतकशों के यातायात का सस्

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?