आई एम पी सी एल, मोहान के निजीकरण के विरोध में संघर्ष

रामनगर/ भारत सरकार की मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त और मुनाफे में चल रही आयुर्वेदिक दवा कंपनी- आई एम पी सी एल, मोहान के निजीकरण की कोशिशों के विरोध में 8 दिसम्बर को कंपनी गेट पर मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। ठेका मजदूर कल्याण समिति, मोहान के तत्वाधान में आयोजित इस पंचायत में विभिन्न मजदूर, किसान और महिला संगठनों तथा सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं एवं प्रतिनिधियों ने भागीदारी की और सरकार द्वारा कंपनी के निजीकरण की कोशिशों को घोर जन विरोधी बताते हुये इसे तत्काल रोकने साथ ही मजदूरों की भविष्य निधि (पी एफ) की बकाया राशि के भुगतान एवं सभी ठेका मजदूरों को नियमित एवं पक्का किये जाने की मांग की। 
    
पंचायत में कांग्रेस के पूर्व लोकसभा एवं राज्य सभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने भी भागीदारी की और आश्वासन दिया कि कांग्रेस के विधायक और सांसद इस मामले को उत्तराखंड विधानसभा और देश की लोकसभा में उठायेंगे।
    
गौरतलब है कि उत्तराखंड के रामनगर के नजदीक एवं अल्मोड़ा, नैनीताल और पौड़ी जिले के संगम पर स्थित इस कंपनी के निजीकरण के विरोध में ठेका मजदूर कल्याण समिति, मोहान के नेतृत्व में विगत 20 नवम्बर को भी कंपनी गेट पर धरना-प्रदर्शन किया गया था एवं मांगें न माने जाने की सूरत में 8 दिसम्बर को कंपनी गेट पर ही मजदूर-किसान पंचायत के आयोजन की घोषणा की गई थी। अब इस मजदूर-किसान पंचायत में घोषणा की गई है कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 12 जनवरी, 2024 के दिन कंपनी गेट पर एक दिवसीय भूख हड़ताल की जायेगी। इस तरह भारत सरकार की इस एकमात्र आयुर्वेदिक दवा कंपनी के निजीकरण के विरुद्ध मजदूरों, सामाजिक-राजनीतिक संगठनों और क्षेत्र की जनता के आक्रोश ने एक आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर ली है।
    
मजदूर-किसान पंचायत में शामिल विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आई एम पी सी एल, मोहान से न सिर्फ कंपनी में काम कर रहे मजदूरों अपितु दवाओं के निर्माण हेतु कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले ग्रामीणों की भी आजीविका जुड़ी हुई है। ऐसे में इस कंपनी के निजीकरण से क्षेत्र में बेरोजगारी व परिणामस्वरूप पलायन बढ़ेगा।
    
उन्होंने कहा कि एक ओर मोदी सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बड़ी-बड़ी बातें करती है और फिर इसे भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म से जोड़कर धर्म की राजनीति करती है; दूसरी ओर आयुर्वेदिक दवाओं की एकमात्र सरकारी कंपनी को बेचने की तैयारी कर रही है। असल में यह सरकार जनता को धर्म की अफीम सुंघाकर पूरे ही देश में उदारीकरण-निजीकरण की जनविरोधी नीतियों को तेज गति से आगे बढ़ा रही है और सरकारी-सार्वजानिक कंपनियों, उनकी जमीनों एवं अन्य संसाधनों को औने-पौने दामों पर पूंजीपतियों को बेचने पर उतारू है। आई एम पी सी एल, मोहान के 35 एकड़ में बने प्लांट एवं अन्य संसाधनों पर भी बहुत से पूंजीपतियों की नजर गड़ी हुई है।
    
वक्ताओं ने कहा आई एम पी सी एल, मोहान के मजदूरों की भविष्य निधि (पी एफ) की 1 करोड़ 12 लाख की राशि अभी तक भी उनके खातों में नहीं आई है क्योंकि ठेकेदार फरार है और मुख्य नियोक्ता होने के बावजूद कंपनी प्रबंधन मजदूरों के पी एफ के फार्म सत्यापित नहीं कर रहा है, जो कि आपराधिक कृत्य है। पिछले 12 साल से मजदूर संघर्ष कर रहे हैं लेकिन श्रम विभाग और सरकार भी कोई हस्तक्षेप कर मजदूरों को उनकी बकाया राशि नहीं दिलवा रहे हैं और अब कंपनी को ही बेचने की तैयारी हो रही है; यह दिखाता है कि सबकी आपस में मिलीभगत है। ऐसे में मजदूरों और क्षेत्र की जनता को व्यापक आंदोलन के लिये कमर कसनी होगी।
    
मजदूर-किसान पंचायत को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, एक्टू के राज्य महासचिव के के बोरा, भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के प्रदेश अध्यक्ष अवतार सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य (सल्ट) नारायण सिंह, इंकलाबी मज़दूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की संयोजक ललिता रावत, वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की केंद्रीय कमेटी सदस्य तुलसी छिम्बाल, किसान संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, इंडोरेंस वर्कर्स यूनियन के महामंत्री दीवान सिंह रावत, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा एवं समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार इत्यादि ने सम्बोधित किया; जबकि संचालन ठेका मजदूर कल्याण समिति, मोहान के अध्यक्ष किशन शर्मा ने किया।     
        -रामनगर संवाददाता

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