रौशन है अमन-भाईचारे की लौ

Published
Sun, 03/01/2026 - 07:01

हिन्दू फासीवादियों द्वारा देश में लगातार नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। इस नफरती माहौल के कारण जब तब वहशी, वीभत्स घटनाएं सामने आ रही हैं। कहीं यूं ही बुजुर्ग मुसलमान को निशाना बनाया जाता है तो कहीं महिलाओं के साथ बदसलूकी की जाती है। यहां तक कि मुस्लिम बच्चों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। वह भी फासीवादी जहर का शिकार हो रहे हैं। 
    
इस नफरती माहौल के बीच कई जगह अमन और इंसानियत की लौ जलाते लोग भी सामने आ रहे हैं। भाजपा सरकार, संघी लम्पट वाहिनियां, कारपोरेट मीडिया और प्रशासन इस लौ को बुझाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। लेकिन तब भी प्रतिकूल हालात में यह लौ चमक रही है, अंधेरे को कुछ कम कर रही है। 
    
ऐसी ही एक लौ लखनऊ विश्वविद्यालय में रौशन हुई। लखनऊ वि.वि. कैम्पस में लाल बारादरी (जहां परम्परागत तौर पर मुस्लिम छात्र नमाज पढ़ते थे) में रमजान के दौरान इसे बंद कर नमाज के लिए कालेज प्रशासन द्वारा मना कर दिया गया। इस कदम को लेकर हिन्दू-मुस्लिम छात्र विरोध कर रहे थे। छात्रों ने प्रशासन द्वारा की गयी बैरिकेटिंग हटाई और मुस्लिम छात्रों के लिए नमाज की जगह खोल दी। इस दौरान हिन्दू छात्र नमाजी मुस्लिम छात्रों के चारों तरफ खड़े होकर उनकी सुरक्षा करते दिखे। यह भाईचारे वाला वीडियो काफी वायरल हुआ। 
    
इस घटना के बाद जैसा कि होना था अमन-भाईचारे की दुश्मन संघी मंडली के पेट में मरोड़ पैदा हो गयी। ए बी वी पी तुरंत ही विरोध में उतर आया। वहां हनुमान चालीसा के जाप का प्रयास होने लगा। अभी भी कालेज में तनाव का माहौल बना हुआ है। एक तरफ हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई के नारे लग रहे हैं तो दूसरी तरफ नफरती जहर उगला जा रहा है। 
    
घटनाएं आगे किस दिशा में बढ़ती हैं यह तो बाद में ही दिखेगा लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि लखनऊ वि.वि. में छात्रों ने नफरती माहौल के खिलाफ अमन की एक लौ जलाई है। 
    
गौरतलब है इससे पहले नैनीताल, उत्तराखण्ड में शैला नेगी साम्प्रदायिक दंगे फैलाती संघी मंडली के सामने खड़ी हो गयी। और उनके इरादों को नाकाम कर दिया। कोटद्वार, उत्तराखण्ड में ‘‘मोहम्मद दीपक’’ का मामला देश-दुनिया में काफी चर्चा का विषय बना। दीपक उस समय एक लौ बनकर सामने आये जब संघी मंडली एक बुजुर्ग मुसलमान दुकानदार को प्रताड़ित कर रही थी। बाद में खिसियाई बिल्ली की तरह लम्पट संघियों ने दीपक के खिलाफ घृणा का एक अभियन चलाया। भद्दी गालियां, हत्या के लिए इनाम की घोषणा आदि ने इन संघी लम्पटों की लम्पटाई को ही दिखाया। 
    
उत्तराखण्ड के ही रामनगर क्षेत्र में मॉब लिंचिंग के प्रयास के खिलाफ सामाजिक, क्रांतिकारी संगठनों द्वारा आंदोलन विकसित किया गया। संघी तंत्र, भाजपा नेताओं के जोर के बावजूद भाजपा नेता मदन जोशी जेल जाने से नहीं बच पाया। हालांकि कुछ समय बाद उसकी जमानत हो गयी और जमानत के बाद भाजपा के नेताओं ने फूल मालाओं से उसका स्वागत कर अपनी बेशर्मी का प्रदर्शन किया। 
    
राजस्थान के टोंक जिले में एक कार्यक्रम में भाजपा नेता (पूर्व सांसद) ने एक बुजुर्ग मुसलमान महिला को बड़ी बेरुखी से डांटा और उसे कम्बल वितरण से मना कर दिया। वे यहां धर्म देखकर कंबल बांट रहे थे। भाजपा नेता की मुसलमानों के प्रति यह नफरत स्थानीय लोगों को जरा भी रास नहीं आयी और उन्होंने इसका विरोध किया। स्थानीय लोग कह रहे थे कि उन्हें ‘नफरत बांटने वाले कंबल’ नहीं चाहिए। ग्रामीण आबादी ने कंबल और मिठाई वापस करने का ऐलान कर दिया है। 
    
नफरत के खिलाफ यह कुछ घटनाएं हैं जो पिछले दिनों सोशल मीडिया में काफी चर्चाओं में रहीं। निश्चित ही ऐसी और भी बहुत सी घटनाएं होंगी। लेकिन ऐसी घटनाएं या तो दबा दी जाती हैं या फिर दसियों तरीकों से उनके प्रसार को रोक दिया जाता है। संघी प्रचार तंत्र और कारपोरेट मीडिया की यही कोशिश रहती है। लेकिन तब भी अमन-भाईचारे की लौ कहीं न कहीं जल ही उठती है। यही लौ आने वाले कल में संघी लम्पट मण्डली के खिलाफ एकजुट संघर्ष में तब्दील हो नफरती मंडली की कब्र खोदने का काम करेगी। 

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