मुक्ति गीत

Published
Sun, 03/01/2026 - 07:01
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर

चलो री सखी कोई गीत गायें
चलो री सखी कोई गीत गायें
गीत इंकलाब के, गीत सुनहरे ख्वाब के
छोड़ो ये मायूसी छोड़ो रोना-धोना
कब तक बनी रहोगी
उनके हाथों का खिलौना
चलो री सखी मुक्ति की राह में कदम बढ़ायें
चलो री सखी कोई गीत गायें।

हम भी इंसां हैं हम भी जिंदा हैं
ये उनको बतलाना होगा
महिलाओं की मुक्ति की खातिर
सबको सड़कों पर आना होगा
चलो री सखी अपना परचम लहरायें
चलो री सखी कोई गीत गायें।

दिन-रात घर में खटते हैं
कारखानों में भी मरते हैं
कभी चैन नहीं कभी आराम नहीं
फिर भी अपनी मेहनत का कोई दाम नहीं
चलो री सखी क्रांति का बिगुल बजायें
चलो री सखी कोई गीत गायें।

सदियों की गुलामी बहुत हुई
सदियों का शोषण बहुत हुआ
बाजार का उनके माल नहीं हम
सदियों से श्रम का दोहन बहुत हुआ
इंकलाब के नारों से चल आसमान को गुंजायें
चलो री सखी कोई गीत गायें।
चलो री सखी कोई गीत गायें।।
    -भारत सिंह, आंवला

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