अजीत डोभाल की पलटी पड़ गई उलटी

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बीती 10 नवम्बर को एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी हुआ जिसमें देश के मुख्य सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कह रहे हैं कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई ने मुसलमानों से ज्यादा हिन्दुओं को भर्ती किया है। इसमें वह बता रहे हैं कि 1947 से अब तक ऐसे करीब 4 हजार मामले सामने आये हैं जिनमें मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत से कम है जबकि हिंदू व अन्य गैर मुस्लिमों की संख्या 80 प्रतिशत से अधिक है। 
    
अब 27-28 सेकंड का यह वीडियो जल्द ही इतना वायरल हो गया कि डोभाल साहब बेचैन हो उठे और 17 नवम्बर को उन्होंने सी एन एन-न्यूज 18 के माध्यम से बयान दिया कि यह वीडियो डीप फेक टेक्नोलॉजी से बनाया गया एक फर्जी वीडियो है जो कि समाज में बंटवारा पैदा करने के मकसद से तैयार किया गया है, कि वीडियो में जो बातें उनके हवाले से कही गई हैं वे उन्होंने नहीं कही। 
    
लेकिन जल्द ही अल्ट न्यूज और कुछ दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने जांच कर बता दिया कि ये वीडियो असली है और यह 11 मार्च, 2014 को आस्ट्रेलिया-इंडिया इंस्टीट्यूट में अजीत डोभाल द्वारा दिये गये एक लेक्चर का छोटा सा अंश है। उन्होंने यह लेक्चर ग्लोबल चैलेंज सीरिज के तहत द चैलेंजेज ऑफ ग्लोबल टेररिज्म विषय पर दिया था। यह पूरा लेक्चर 1 घंटा 17 मिनट का है और 20 मार्च, 2014 को यूट्यूब पर डाला गया है।
    
अब डोभाल साहब की पलटी तो उन्हें उलटी पड़ चुकी है लेकिन सवाल तो बनता ही है कि आखिर उन्होंने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला? दरअसल ये वीडियो तब का है जबकि अभी केंद्र में मोदी के नेतृत्व में हिंदू फासीवादी ताकतें काबिज नहीं हुई थीं, और न ही तब अजीत डोभाल देश के मुख्य सुरक्षा सलाहकार बने थे। बाद में 2014 के मध्य में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और फिर उन्होंने अजीत डोभाल को देश का मुख्य सुरक्षा सलाहकार बनाया, जो कि तभी से इस पद पर बने हुये हैं। मतलब, 2014 में मनमोहन सिंह की सरकार के जाने के बाद डोभाल साहब की निष्ठायें भी अब हिंदू फासीवादी ताकतों के अनुरूप बदल गई। पिछले 11 सालों के उनके बयानों से भी स्पष्ट है कि वे किस कदर हिंदू फासीवादी ताकतों के साथ घुलमिल चुके हैं। इसीलिये अब पुराना वीडियो जारी होने के बाद उनके सामने सांप-छछूंदर वाली स्थिति पैदा हो गई और अंततः उन्होंने पूरे मामले से झूठ बोलकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन वो फंस गये।
    
उक्त वीडियो का जो अंश सोशल मीडिया पर जारी हुआ है उसमें कही गई बातें एकदम सच हैं और तथ्य इसकी तसदीक करते हैं कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी- आई एस आई - के लिये काम करते हुये पकड़े गये लोगों में ज्यादातर गैर मुस्लिम खासकर हिंदू धर्म मानने वाले लोग हैं। 
    
आइये पिछले कुछ वर्षों में (मोदी काल) में ही आई एस आई के लिये काम करते पकड़े गये कुछ लोगों पर एक निगाह डालें - 
    
फिरोजाबाद आर्डिनेंस फैक्टरी के चार्जमैन रविंद्र कुमार; भाजपा के आई टी सेल से जुड़े भोपाल के ध्रुव सक्सेना; मास्को में भारतीय दूतावास के कर्मचारी सतेंद्र सिमल; कैथल में पकड़े गये देवेंद्र ढिल्लो; सतना के बजरंग दल के नेता बलराम सिंह; डी आर डी ओ के वैज्ञानिक और आर एस एस के स्वयंसेवक प्रदीप कुरुलकर ...... ये सूची बहुत लम्बी है जिन्होंने पैसों के लालच में या हनी ट्रैप में फंसकर आई एस आई के लिये काम किया।
    
लेकिन आर एस एस की अफवाह मशीनरी, पूंजीवादी मीडिया और भाजपा का आई टी सेल इसके एकदम उलटी धारणा समाज में स्थापित करते हैं कि आई एस आई के लिये काम करते पकड़े गये सभी लोग मुसलमान हैं। यह उसी तरह कोरा झूठ है जिस तरह यह स्थापित की गई धारणा कि मुसलमान चार-चार शादियां करते हैं।
 

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