अमेरिका में ट्रंप की तानाशाही के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

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14 जून, 2025 को लाखों लोगों ने अमेरिका में 2,000 से अधिक स्थानों और 50 राज्यों में से प्रत्येक में ट्रम्प प्रशासन की दक्षिणपंथी नीतियों और तानाशाही तरीकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लोकप्रिय विरोध के इस प्रवाह के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन करने के लिए अमेरिकी राजधानी में टैंक और हजारों सैनिकों को लगाया।
    
न्यूयार्क शहर, शिकागो, लास एंजिल्स और अन्य प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों में सैकड़ों हजारों लोगों ने मार्च किया। बोस्टन में लगभग लाखों प्रतिभागी देखे गए। छोटे शहरों और कस्बों में भी महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें से कई ने ट्रम्प के लिए भारी मतदान किया था, लेकिन अब हजारों लोग उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए।
    
प्रदर्शनों का ‘‘नो किंग्स’’ थीम प्रतिभागियों के बीच व्यापक रूप से गूंज उठा, जिनमें से कई ने अमेरिकी क्रांति का संदर्भ देते हुए हस्तनिर्मित तख्तियां ले रखी थीं और ट्रम्प की अर्ध-राजशाही तानाशाही स्थापित करने की कोशिश की निंदा की थी, जिसमें वे स्वयं सिंहासन पर बैठे थे।
    
उसी दिन वाशिंगटन डीसी में आयोजित ट्रम्प की सैन्य परेड विरोध प्रदर्शनों के आगे फीकी रही। 6,000 सैनिकों, सैकड़ों टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और हेलीकाप्टरों की लामबंदी के साथ-साथ हथियार उद्योग और कारपोरेट दिग्गजों से भरपूर फंडिंग के बावजूद, यह आयोजन अमेरिकी लोगों को डराने में विफल रहा।
    
ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के पास समीक्षा स्टैंड से भीड़ को संबोधित किया। यह उस जगह से कुछ सौ गज की दूरी पर था जहां ट्रम्प ने 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल पर हमला करने से पहले अपने फासीवादी गुंडों को इकट्ठा किया था। भीड़ इतनी कम थी कि खराब ‘‘दृश्यता’’ के बारे में जानते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने केवल आठ मिनट तक बात की और फिर बैठ गए।
    
फासीवादी राष्ट्रपति के समर्थन का वास्तविक आधार 14 जून को दक्षिणपंथी तत्वों द्वारा हिंसक हमलों की एक श्रृंखला में व्यक्त किया गया। मिनेसोटा में, गर्भपात विरोधी एक कट्टरपंथी ने एक राज्य विधायक और उसके पति की हत्या कर दी, जबकि एक अन्य विधायक और उसकी पत्नी को भी गोली मार दी। वर्जीनिया के कल्पेपर में, एक ड्राइवर ने प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर अपनी कार चढ़ा दी- जो 2017 में चार्लोट्सविले में हुए नव-नाजी हमले की याद दिलाती है।
    
लॉस एंजिल्स में, जहां प्ब्म् छापों ने बड़े पैमाने पर आक्रोश फैलाया था, ट्रम्प द्वारा तैनात नेशनल गार्ड और मरीन इकाइयों से ‘‘नो किंग्स’’ प्रदर्शनों को घेर लिया गया था। दोपहर में डेमोक्रेटिक मेयर करेन बास के नेतृत्व में पुलिस ने फेडरल बिल्डिंग के बाहर प्रदर्शनकारियों पर स्टन ग्रेनेड, रबर बुलेट और आंसू गैस से हमला किया, जिसमें कम से कम छह लोग घायल हो गए और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया।
    
प्रदर्शनों पर ट्रंप की तत्काल प्रतिक्रिया ट्रुथ सोशल पर एक फासीवादी टिप्पणी पोस्ट करना था, जिसमें उन्होंने प्ब्म् को ‘‘इतिहास में अवैध विदेशियों के सबसे बड़े सामूहिक निर्वासन अभियान’’ को अंजाम देने का आदेश दिया। उन्होंने मांग की कि प्ब्म् और संघीय एजेंसियां ‘‘अपराधग्रस्त और जानलेवा इनर सिटीज’’ पर ध्यान केंद्रित करें, और अंत में ‘‘काम पूरा करो!’’ का खुला आह्वान किया। यह कथन अप्रवासियों और मजदूर वर्ग के खिलाफ युद्ध की घोषणा है और राज्य के दमनकारी तंत्र से ट्रंप के तानाशाही की ओर बढ़ने के अभियान को लागू करने की सीधी अपील है।
    
‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों ने अमेरिकी जनता के इस संकल्प को प्रदर्शित किया कि वो ट्रंप के मनमानेपन-तानाशाही पूर्ण व्यवहार को यूं ही सहन नहीं करेगी, बल्कि पूरी ताकत से उसका प्रतिरोध करेगी।  
 

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