घृणा के बारे में कुछ शब्द -राजेश जोशी

Published
Wed, 07/01/2026 - 15:50
/ghranaa-ke-baare-mein-kuch-sabad-rajesh-joshi

घृणा यूं कोई बहुत अच्छी चीज नहीं है

बहुत खून पी जाती है और खा जाती है
फेफड़ों की बहुत सारी शक्ति
बहुत सारे सपने, भोलापन और नींद कई रातों की

महापुरुषों और ग्रंथों ने अक्सर उसका विरोध किया है
दिलो-दिमाग में अक्सर घर करती रही हैं उनकी बातें
हालंकि समाज में अक्सर बहुत स्थाई नहीं रहा है
उनके ऐसे उपदेशों का असर
और यह एक अच्छी बात है

मोहल्ले के गुंडों के बारे में पहले लोग बात करने से बचते हैं
फिर धीरे-धीरे होते जाते हैं उदासीन और एक दिन
बन जाता है यह हमारा राष्ट्रीय चरित्र

विरोध करने वालों में से हत्यारे किसी एक को चुनते हैं
और मार डालते हैं उसे सरेआम,
सोचते हैं हत्यारे, इस तरह घृणा को बदला जा सकता है

भय में, हमेशा के लिए
पेशेवर अपराधी और शोषक अक्सर महापुरुषों की सूक्तियों का
प्रचार करते हैं बहुत जोर शोर से

इससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है यह कि कई बार
जो सहते हैं सबसे ज्यादा अत्याचार और
बसते हैं जीवन की तलछट में
वे ही सबसे ऊंची आवाज में करने लगते हैं
अत्याचारी का गुणगान

घृणा यूं कोई बहुत अच्छी चीज नहीं है

लेकिन इतनी बुरी भी नहीं कि जहां जरूरी हो
वहां भी न की जा सके

क्या ज्यादा बुरा नहीं है उदासीन हो जाना?
 

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।