जापान में बढ़ते सैन्यीकरण का विरोध करने लोग सड़क पर उतरे

Published
Thu, 10/22/2026 - 10:50
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अमेरिका और जापान के संयुक्त सैन्याभ्यास का विरोध

19 अक्टूबर को जापान में लोग अमेरिका और जापान के बीच होने वाले सैन्याभ्यास का विरोध करने सड़क पर उतरे। ये सभी राष्ट्रीय डाइट भवन के सामने इकट्ठा हुए। वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रदर्शनकारी रक्षा मंत्रालय के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कीन स्वार्ड 27 (keen sward 27) के नाम से होने वाला यह संयुक्त सैन्याभ्यास 19 से 29 अक्टूबर तक होगा। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री सनाई तकाइची का इस्तीफ़ा मांग रहे हैं।

जापान के लोग पिछले लम्बे समय से जापान की सरकारों द्वारा जापान के किये जा रहे सैन्यीकरण का विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अमेरिका के साथ किये जा रहे युद्धभ्यास के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा। और युद्ध के कारण जान माल का नुकसान होगा। हीरोशिमा और नागासाकी की यादें अभी तक उनके जेहन में ताज़ा हैं। वहीं बढ़ते सैन्यीकरण का खर्चा उनकी जेब से वसूला जाएगा। कीमतें बढ़ेंगी, करों का बोझ बढ़ेगा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च भी बढ़ जायेगा।

दरअसल शिंजो आबे के समय से ही जापान सैन्यीकरण की तरफ तेज़ी बढ़ रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के संविधान में आर्टिकल 19 जोड़ा गया था। इस आर्टिकल में यह बात थी कि जापान सेना नहीं रखेगा। और युद्ध में भाग नहीं लेगा। हीरोशिमा और नागासाकी में हुई तबाही के बाद युद्ध के खिलाफ एक गहरी नफरत यहाँ के लोगों में पैदा हुई।

अमेरिका ने ही हीरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम का प्रयोग कर यहाँ लाखों लोगों का नरसंहार किया था। और युद्ध के बाद पैदा हुई परिस्थितियों का फायदा उठाकर जापान की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी के बहाने में भारी मात्रा में सैनिक तैनाती की। अमेरिका की 55,000 सेना जापान में तैनात है। ओकीनावा द्वीप पर इसकी अधिकांश सेना की तैनाती है जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

अमेरिका चीन के साथ प्रतियोगिता में है और उसने जापान के साथ मिलकर दक्षिणी चीन सागर में तनाव की स्थिति पैदा कर रखी है। जापान के शासक भी अपनी पुरानी स्थिति से बाहर निकलना चाहते हैं। 2015 में शिंजो आबे ने एक विवादस्पद सुरक्षा विधेयक पास कराया था जो सीमित मात्रा में आत्मरक्षा में सैन्य बलों को रखने की छूट देता था। हमले के वक्त सहयोगियों की सहायता करने की छूट देता था। इसी साल सनाई तकाइची के शासन में 21 अप्रैल को एक नया कानून बनाया गया जो हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटा देता है और लम्बी दूरी की मिसाइलों को तैनात करने की छूट देता है। सैन्य खर्च को बढ़ाने और विदेशों में सैन्य भूमिका बढ़ाने की बात करता है। इसके बाद तो जापान के लोग इसके विरोध में उतर आये हैं और वे लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

इन प्रदर्शनों को अभी हाल में हुए एक घटनाक्रम ने हवा दे दी। अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही ओकीनावा में एक महिला के साथ लुटपाट और उसकी हत्या के आरोप में एक अमेरिकी सैनिक को गिरफ्तार किया गया है। ओकीनावा में इसका जबरदस्त विरोध हुआ। इससे पहले भी कई घटनाएं ऐसी हो चुकी हैं जिसमें महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में अमेरिकी सैनिकों की संलिप्तता सामने आयी है। 2016 में एक 20 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में एक अमेरिकी सैनिक को आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी हो। 1995 एक 12 वर्षीय छात्रा को रेप के बाद मार दिया गया था। 1972 के बाद अब तक 6409 गिरफ्तारियां अमेरिकी सैनिकों की हुई हैं। इससे भी जापान के लोगों में अमेरिका के प्रति काफी घृणा है।

जापान में पहले से ही अमेरिका के प्रति घृणा है और वे अमेरिकी सेना को जापान से हटाने की मांग करते रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी सैनिकों की हरकतें आग में घी का काम करती रही हैं। ऐसे में जापान में मौजूद दक्षिणपंथी इस स्थिति का फायदा उठाकर आर्टिकल 19 को ख़त्म करने या कमजोर करने की तरफ बढ़ते रहे हैं। वे तर्क देते हैं कि आर्टिकल 19 जापान पर थोपा हुआ है और अमेरिका की इसमें सबसे बड़ी भूमिका है। अगर आर्टिकल 19 ख़त्म होता है तो इससे जापान के सैन्यीकरण में संवैधानिक बाधा ख़त्म हो जाएगी। और फिर जापान भी सैन्य दौड़ में शामिल हो जायेगा। इसका फायदा यहाँ के हथियार उद्योग को मिलेगा। और दुनिया में लुटपाट का हिस्सा भी। जाहिर है पूंजीपति वर्ग की आज चाहत यही है।

और इसका खामियाज़ा जापान की मज़दूर मेहनतकश जनता उठाएगी। यह बात सामने आ रही है कि जापान अपने बजट का 2 प्रतिशत तक रक्षा बजट में खर्च करेगा जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बजट होगा। और इसकी पूर्ति जनता की सुविधाओं में कटौती करके होगी। जनता पर करों का बोझ बढ़ेगा, वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और सामाजिक सुविधाओं में कटौती होगी।

जापान का बढ़ता सैन्यीकरण अंतर साम्राज्यवादी संघर्षों को ही दिखा रहा है। अमेरिकी साम्राज्यवादी आज अपने फायदे के लिए जापान का सैन्यीकरण चाहते हैं तो खुद जापान का पूंजीपति वर्ग आज यही चाहता है। जापानी जनता का संघर्ष अमेरिकी साम्राज्यवाद और जापानी पूंजीपति वर्ग दोनों से है।

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