विविध

महिला मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन-ज्ञापन, सभा

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9 दिसम्बर 2024 को महिला मजदूरों की मांगों को लेकर श्रम विभाग, रोशनाबाद (हरिद्वार) पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेतृत्व में प्रदर्शन किय गया। सिडकुल (हरिद्वार) में महिला मज

ईएसआईसी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए धरना-प्रदर्शन

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फरीदाबाद/ हरियाणा के ईएसआईसी मेडिकल कालेज अस्पताल व डिस्पेंसरियों में इलाज के नाम पर कभी पूरी दवाइयां नहीं तो कभी डाक्टर नहीं, कभी जांच नहीं जैसे मामलों

पूरे माह काम, समय से वेतन, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग

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पंतनगर/ दिनांक 2 दिसंबर 2024 को आंदोलनरत फसल अनुसंधान केन्द्र के मजदूरों द्वारा सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर तिलक राज बेहड़, क्षेत्रीय विधायक किच्छा पंतनगर

गरीब भाजपा कार्यकर्ता की बेटी बनाम अमीर भाजपा नेता का बेटा

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दो साल से अधिक होने को हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग और धर्मनगरी, ऋषिकेश (उत्तराखंड) के पास स्थित वनंतरा रिजार्ट में कार्य करने वाली अंकिता भंडारी की बेहद संदेहास्पद परिस्थितियों में हत्या कर दी जाती है।

एक कानून की शवयात्रा निकालते संघी

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बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1991 में एक कानून पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम बना था। इस कानून के तहत प्रावधान किया गया था कि देश में सभी धार्मिक संरचनायें उसी रूप में

बांग्लादेशी लोगों का भारत में उत्पीड़न

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लगता है भारत की संघी सरकार ने बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है। मानो दोनों के बीच करार हो गया हो कि तुम बांग्लादेश में हिन्दुओं क

इंजीनियर की आत्महत्या पर पुरुषवादी आक्रोश

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बीते दिनों बंगलुरू स्थित एक फर्म में ए आई इंजीनियर अतुल सुभाष द्वारा पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का मामला भारतीय मीडिया में छाया रहा। अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के आ

श्रीलंका में स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स का प्रदर्शन

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4 दिसंबर को श्रीलंका के शिक्षा मंत्रालय के सामने करीब 500 स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स ने प्रदर्शन किया। इनकी मांग इनको स्थायी किये जाने की है। स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स के इस प्र

डाल्फिन मजदूरों का आमरण अनशन समाप्त

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पंतनगर/ डाल्फिन मजदूरों का आमरण अनशन और धरना 26 नवम्बर 2024 को भाजपा प्रदेश मंत्री विकास शर्मा द्वारा मीडिया के समक्ष अनशनकारी महिलाओं सहित सभी मजदूरों क

आलेख

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।