साम्राज्यवाद

नाटो का शिखर सम्मेलन : युद्ध और आक्रामकता बढ़ाने का औजार

इस प्रकार, हम देख सकते हैं कि नाटो के इस शिखर सम्मेलन में रूसी और चीनी साम्राज्यवादियों के साथ प्रतिद्वन्द्विता में अमरीकी साम्राज्यवादियों ने नाटो की मदद से नाटो को न सिर्फ अपने को यूरोप तक सीमित रखने तक बल्कि उसका विस्तार वैश्विक पैमाने पर, विशेष तौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक करने का संकल्प दोहराया है। 

बंधकों के बहाने शरणार्थी शिविर पर क्रूर हमला

8 जून को इजराइल ने गाजा स्थित नुसेरात शरणार्थी शिविर पर अब तक का सबसे क्रूर हमला किया। इस हमले में लगभग 280 फिलिस्तीनी मारे गये व 600 घायल हो गये। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर

न्यू कैलेडोनिया में फ्रांस सरकार ने आपातकाल लगाया

न्यू कैलेडोनिया द्वीप समूह दक्षिण प्रशांत सागर में स्थित है। यह फ्रांसीसी शासन के अंतर्गत है। यहां के मूलवासी मुख्यतः कनक हैं जो यहां की आबादी का लगभग 42 प्रतिशत है। फ्रा

दुनिया में बढ़ रहा सैन्य टकराव और कूटनीतिक चालें

अमरीकी साम्राज्यवादी यूक्रेन में अपनी पराजय को देखते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध का विस्तार करना चाहते हैं। इसमें वे पोलैण्ड, रूमानिया, हंगरी, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और अन्य पूर्वी यूरोपीय देशों के सैनिकों को रूस के विरुद्ध सैन्य अभियानों में बलि का बकरा बनाना चाहते हैं। इन देशों के शासक भी रूसी साम्राज्यवादियों के विरुद्ध नाटो के साथ खड़े हैं।

अमेरिकी छात्रों का संघर्ष और अमेरिकी साम्राज्यवादी

18 अप्रैल से कोलंबिया विश्वविद्यालय में भड़की चिंगारी दावानल बनती जा रही है। अमेरिका के तमाम विश्वविद्यालयों में फैलते हुए ज्वाला यूरोप के विश्वविद्यालयों तक पहुंच चुकी है

फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में अमेरिकी छात्र-छात्राओं का संघर्ष जिंदाबाद !

पिछले कई दिनों से अमेरिका में एक के बाद एक विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रदर्शन हो रहे हैं। लगभग 25 विश्वविद्यालय के छात्र अपने कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर

कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ जे एन यू छात्रों का एकजुटता का वक्तव्य

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अपनी अटूट एकजुटता व्यक्त करता है जो साहसपूर्वक इजरायल के युद्ध और फिलिस्तीन क

कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ जे एन यू छात्रों का एकजुटता का वक्तव्य

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अपनी अटूट एकजुटता व्यक्त करता है जो साहसपूर्वक इजरायल के युद्ध और फिलिस्तीन क

आलेख

अमरीकी साम्राज्यवाद पराभव की ओर है। अभी वह दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है लेकिन उसको चुनौती देने वाली और भी ताकतें उभर कर आयी हैं। यूक्रेन में रूस की विजय आसन्न है। यूक्रेन अ

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।