चोंगथम विक्रम सिंह की भीड़ द्वारा हत्या

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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मोदी काल में भीड़ द्वारा किसी इंसान को बेवजह या मामूली बात पर पीट-पीट कर मार डालना एक परिघटना बन चुकी है। हाल ही में दिल्ली में रह रहे मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की उनके घर के बाहर होटल में जुटे लोगों ने केवल इसलिए पीट-पीट कर हत्या कर दी कि विक्रम सिंह ने शोर कर रहे लोगों को शोर कम करने को कहा था।
    
भीड़ हत्या का ज्यादातर प्रयोग संघी लम्पट संगठनों ने अभी तक मुसलमानों के खिलाफ किया है। कभी गौमांस, लव जिहाद हिन्दू देवताओं का अपमान आदि मामले उछालकर ये लम्पट कार्यकर्ता आस-पास की सामान्य भीड़ को इतना उत्तेजित करते रहे हैं कि वह हिंसक हो बेगुनाह अल्पसंख्यक की जान लेने पर उतारू हो जाती रही है। दंगों से लेकर अन्य मौकों पर इनकी भड़काऊ बातों से लोगों की सोचने समझने की शक्ति छीन सी ली जाती रही है और सामान्य लोग भीड़ का हिस्सा बन इनके बताये गये दुश्मन से मार पीट पर उतारू हो जाते रहे हैं। एक बार इस अपराधिक कर्म में शामिल हो जाने के बाद भीड़ के हर शख्स की मजबूरी बन जाती रही है कि वो सत्तासीन संघ-भाजपा से करीबी बनाये रखे ताकि वे उन्हें कानून से बचा सकें। 
    
पर संघी लम्पटों की इस कारस्तानी का परिणाम यह भी निकला कि कई दफा इनके बगैर भी यूं ही भीड़ कभी बच्चा चोरी तो कभी सामान्य चोरी के शक में किसी इंसान को पीट-पीट कर मारने लगी। कभी-कभी किसी दबंग के उकसावे में आकर उसकी मित्रमंडली लोगों की जान लेने लगी तो कभी समाज के सबसे दुत्कारे लोग समूह में ताकत महसूस कर छोटी सी बात पर अपने से कमजोर को मारने लग गये।
    
मणिपुर के चोंगथम विक्रम सिंह को भी अपनी मणिपुरी पहचान के चलते होटल में मौजूद सामान्य लोगों ने आसान शिकार माना और उनकी पिटाई कर दी। बाद में जब उनका पुत्र उन्हें अस्पताल ले गया तो वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हत्या के आरोप में गिरफ्तार लोगों में विभिन्न धर्मों के लोग शामिल हैं। 
    
ऐसे मामलों में पुलिस व शासन-प्रशासन का मामले को रफा-दफा करने व अपराधियों को बचाने का रुख भी लम्पटों के हौंसले को बढ़ा देता रहा है। संघी कुकृत्यों में तो हत्यारे न केवल कानून-अदालत से बच जाते रहे हैं बल्कि उन्हें हिन्दू रक्षक के बतौर सम्मानित कर बढ़ावा भी दिया जाता रहा है। इसी के चलते पिंकी चैधरी, बाबू बजरंगी सरीखे लोग खुलेआम समाज में लोगों को मारने-पीटने की धमकी देने के बावजूद खुलेआम घूमते रहते हैं। ये खुद या इनके चेले खुद को राजसत्ता का दबंग समझने लगते हैं। 
    
समाज में बढ़ रही बेकारी, कामगारों का निर्मम शोषण, पहचान का संकट आदि बातें भी आज नई पीढ़ी ही नहीं समूची आबादी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बना रही हैं। ऐसे में जब संघी लम्पट या अन्य कोई इन्हें भड़का देता है तो ये सारा विवेक खोकर निर्दोष की जान तक लेने पर उतारू हो जाते हैं। संघी लम्पट गिरोह जनता की इस बुरी हालत का लाभ उठा अपने राजनैतिक एजेण्डे को आगे बढ़ा रहे हैं। 
    
मोदी काल में विकसित भारत का हल्ला किया जा रहा है पर संघी वाहिनी-भाजपा देश को राक्षसी दौर में ले जा रहे हैं जहां आम जन विवेक खोकर यूं ही किसी मुस्लिम, गरीब फेरी वाले, उत्तर पूर्व के वासी, दलित-महिलाओं पर हमले करने लगे हैं। यह सब आज के पूंजीवाद की चरम पतनशीलता को दिखला रहा है।  

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