जबरिया श्रम टैरिफ

Published
Sat, 08/01/2026 - 15:50
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 60 से अधिक देशों पर नये तटकर लगाने की घोषणा की है। इस टैरिफ उपाय के तहत जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर यह नया तटकर घोषित किया गया है। इस नये टैरिफ कदमों में जहां कुछ देशों पर 12.5 प्रतिशत की उच्च दर का तटकर लगाया गया है वहीं भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत का तटकर लगा है। 
    
बीते वर्ष ट्रम्प द्वारा मनमाने तरीके से ढेरों देशों पर ऊंचे तटकर थोप दिये गये थे। इनके जरिये ट्रम्प ने इन देशों को झुकने को मजबूर कर दिया था। भारत सरकार भी इन तटकरों से बचने के लिए अमेरिका से ऐसा व्यापार समझौता करने की ओर बढ़ गयी थी जिसमें अमेरिकी डेयरी उत्पादों-अनाजों-बीज आदि को भारत आने की छूट दी गयी थी। हालांकि फरवरी में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रम्प द्वारा घोषित तटकरों को रद्द कर दिया था। तब ट्रम्प ने 6 माह के लिए अस्थाई वैश्विक शुल्क लागू किये थे।
    
अब 6 माह की अवधि पूरी होने पर ट्रम्प ने जिन नये शुल्कों की घोषणा की है वे अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत लागू किये गये हैं। इसके तहत सरकार को उन व्यापारों पर प्रतिक्रिया करने का अधिकार हासिल है जिन्हें अमेरिका अनुचित, अन्यायपूर्ण या भेदभावपूर्ण मानता है। 
    
भारत पर पहले 12.5 प्रतिशत का उच्च कर लगने का खतरा था पर 14 जून को भारत सरकार ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। इसी के चलते भारत 10 प्रतिशत के बैंड में स्थान पा सका। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत सरकार के उक्त निर्णय का हवाला देकर भारत को कम तटकर बैंड में रखा।
    
हालांकि सामान्य दवायें और स्मार्ट फोन को अमेरिका ने इस नये तटकर से बाहर रखा है। पर भारत को बांग्लादेश, इंडोनेशिया, कंबोडिया, मलेशिया सरीखी वस्त्र व परिधान संबंधी छूट नहीं प्राप्त हुई है। स्टील, एल्युमिनियम, तांबा व आटो पाटर््स भी इस नये कर से इसलिए बाहर हैं क्योंकि इन पर 25 से 50 प्रतिशत तटकर पहले से लागू है। 
    
इस तरह ट्रम्प जबरन श्रम के नाम पर नये टैरिफ के जरिये देशों पर नये सिरे से दबाव कायम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य गरीब देशों के मजदूरों की कार्य परिस्थितियों में सुधार नहीं बल्कि अपनी अमेरिका प्रथम की नीति को आगे बढ़ाना है। 
    
अमेरिकी सरगना के निशाने पर भारत इसलिए है क्योंकि वह रूस से संबंधों को तोड़ने को तैयार नहीं है। अमेरिकी संसद में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तटकर लगाने का बिल अभी विचाराधीन है। एक ओर ट्रम्प नये तटकर के जरिये भारत सरीखे देशों पर दबाव बना रहे हैं तो दूसरी ओर भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते की वार्ता आगे बढ़ रही है जिसमें अमेरिकी डेयरी-कृषि उत्पादों के लिए भारत अपने दरवाजे खोल रहा है। एक ऐसे वक्त में जब देश के किसान संगठन इस व्यापार समझौते के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं तब ट्रम्प दबाव बनाकर भारत से अपनी डेयरी व कृषि कम्पनियों के लिए और छूटें चाह रहा है। आने वाला वक्त बतायेगा कि अमेरिकापरस्ती में लीन मोदी सरकार ट्रम्प के आगे कितना झुकती है।  

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