कलकत्ता : लॉ कालेज में सामूहिक बलात्कार

/kolkataa-law-college-mein-gang-rape

आर जी कर मेडिकल कालेज कलकत्ता में रेजिडेंट डाक्टर से सामूहिक बलात्कार-हत्या के मामले को एक वर्ष भी नहीं बीता था कि कलकत्ता के एक लॉ कालेज में एक कानून की छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आ गयी। पीड़िता ने दो सीनियर छात्रों व एक कर्मचारी (कालेज का पूर्व छात्र) पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया है। 
    
मुख्य आरोपी कालेज का कर्मचारी मनोजीत मिश्रा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा का नेता बताया जा रहा है। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी का वह करीबी है। उस पर पहले भी यौन उत्पीड़न के आरोप लग चुके हैं। पुलिस तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अदालत ने इन्हें 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। 
    
आरोपी के तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के चलते भाजपा व माकपा ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। अब तक आयी खबरों के अनुसार आरोपी ने छात्रा द्वारा विवाह का प्रस्ताव ठुकराने पर इस वारदात को अंजाम दिया। 
    
तृणमूल कांग्रेस के एक मंत्री ने इस घटना पर अपने बयान से अपनी महिला विरोधी सोच खुद ही उजागर कर दी। मंत्री ने कहा कि जब दोस्त ही सामूहिक बलात्कार करने लगें तो लड़कियों को कौन बचा सकता है, कि पुलिस कालेज के कक्षों तक तैनात नहीं की जा सकती। मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि वो छात्रा को ही सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराने पर उतारू हैं। 
    
यद्यपि तृणमूल कांग्रेस ने घटना की निंदा की है पर पहले आर जी कर और अब वर्तमान घटना ने दिखा दिया कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में भी महिलायें सुरक्षित नहीं हैं। तृणमूल के लम्पट नेताओं-छुटभैय्यों का व्यवहार भी दिखाता है कि वे महिला विरोधी विचारों से लैस हैं। 
    
महिलाओं के प्रति बढ़ते यौन अपराधों की जड़ें काफी गहरी हैं। भारत में मौजूद सामंती पुरुष प्रधानता के साथ साम्राज्यवादी अपसंस्कृति का प्रसार इन जड़ों को हर रोज मजबूत करता है। फिल्में-इण्टरनेट पर अश्लील सामग्री-अश्लीन गाने, महिला शरीर का उपभोक्ता सामग्री के बतौर पेश करते विज्ञापन सब इसमें योगदान करते हैं। 
    
कभी शाहरूख खान की फिल्म का गाना आया था कि ‘तू हां कर या ना कर तू है मेरी किरन’। आज युवा पीढ़ी ऐसे तमाम गानों के प्रभाव में वहशी दरिंदों में तब्दील की जा रही है। किसी लड़की की न को ये लड़की की व्यक्तिगत स्वतंत्रता मान सम्मान देने के बजाय अपने अपमान के बतौर लेते हैं और इस अपमान का बदला लेने के लिए दरिंदगी भरे व्यवहार से भी गुरेज नहीं करते। समाज में बढ़ रही बेकारी, युवाओं को हर ओर से मिलता तिरस्कार, बढ़ती नशाखोरी भी उन्हें अपराधों की ओर धकेल रही है। 
    
ऐसे में संघ-भाजपा के शासन ने, इनकी महिला विरोधी सोच ने आग में घी का काम किया है। लम्पट भाजपाई नेता खुलेआम सड़कों पर भी दरिंदगी से बाज नहीं आ रहे हैं। बलात्कारियों का फूलमाला से स्वागत दूसरे धर्म की महिलाओं को बलात्कार की धमकी, बलात्कारी आसाराम बापू की सरकारी आवभगत आदि सभी ने मिलकर आम महिलाओं के जीवन को हर जगह सुरक्षाविहीन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 
    
कड़े कानून बन जाने के बाद भी अगर महिलाओं के साथ अपराध नहीं रुक रहे हैं तो यह दिखलाता है कि इन अपराधों की जड़ें इतनी गहरी हैं कि बगैर समूची व्यवस्था को बदले इन जड़ों को नष्ट नहीं किया जा सकता। इसीलिए महिला मुक्ति के संघर्ष को पूंजीवादी व्यवस्था विरोधी संघर्ष के साथ ही आगे बढ़ाया जा सकता है। महिलाओं के प्रति हिंसा के बीज पूंजीवादी समाज हर रोज बो रहा है। इसीलिए पूंजीवाद के नाश के बगैर महिला हिंसा पर रोक नहीं लगाई जा सकती। 
    
जरूरी है कि महिला हिंसा की हर घटना पर अपराधियों को सजा दिलाने के संघर्ष के साथ हर रोज ऐसे अपराधी तैयार करती पूंजीवादी व्यवस्था, उसके संचालकों नेताओं-पुलिस-प्रशासन की महिला विरोधी सोच, लगातार प्रसारित हो रही अपसंस्कृति को भी कठघरे में खड़ा किया जाये। 

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।