फासीवाद / साम्प्रदायिकता,

हिंदू फासीवादी और लद्दाख

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केंद्र सरकार ने लद्दाख को नया झुनझुना थमाने की कोशिश की है। काफी पहले हिंदू फासीवादियों ने जम्मू कश्मीर के विभाजन और 370 के खात्मे से पहले भी इस इलाके की जनता को ढेरों झू

यह कोई हादसा नहीं बल्कि मुनाफाखोरों द्वारा की गई हत्याएं हैं

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दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के एकदम नजदीक सत्यनिकेतन नाम के एक पीजी की ईमारत ढहने की घटना ने देश की बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर उघाड़ कर रख दिया है।

गरीबी हटाओ से गरीबी छिपाओ तक

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दिल्ली की भाजपा सरकार जब से सत्ता में आयी है उसका सबसे चर्चित काम ‘गरीबी हटाओ’ का रहा है। अवैध बस्तियों-कालोनियें को अतिक्रमण के नाम पर जमींदोज करने व वहां के नागरिकों को

योगी और मस्जिद

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उ.प्र. के मुखिया योगी आदित्यनाथ को मस्जिदों से खास नफरत है। उ.प्र.

चोंगथम विक्रम सिंह की भीड़ द्वारा हत्या

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मोदी काल में भीड़ द्वारा किसी इंसान को बेवजह या मामूली बात पर पीट-पीट कर मार डालना एक परिघटना बन चुकी है। हाल ही में दिल्ली में रह रहे मणिपुर के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिं

हवाई आदमी की हवा-हवाई छवि

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आशीष नंदी देश के जाने-माने समाजशास्त्री रहे हैं। वे कोई माक्र्सवादी या वामपंथी समाजशास्त्री  नहीं हैं। वे उस तरह के समाजशास्त्री हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंन

दिमागी नक्सल और सिविल डिफेन्स

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इस बार भी 15 अगस्त के दिन भारत देश की आम जनता को उसके राजा ने बताया कि किस तरह उसके 12 सालों के राज में भारत ने तरक्की की ऊंचाईयों को छुआ है। हर क्षेत्र में भारत विकास कर

जनगणना के नाम पर जासूसी

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द हिन्दू अखबार में छपी एक खबर के अनुसार जनगणना-2027 में सरकार जनता से कई ऐसे सवाल पूछ रही है जिसका सम्बन्ध जनगणना से कम लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां जुटाने से अधिक है। द

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।