कश्मीर से दिल्ली पहुंची पैलेट गन
कश्मीर घाटी में हजारों लोगों को बुरी तरह घायल कर चुकी और सैंकड़ों की आंख की रोशनी छीन चुकी पैलट गन अब देश की राजधानी दिल्ली आ पहुंची है। 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों के सं
कश्मीर घाटी में हजारों लोगों को बुरी तरह घायल कर चुकी और सैंकड़ों की आंख की रोशनी छीन चुकी पैलट गन अब देश की राजधानी दिल्ली आ पहुंची है। 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों के सं
भारत सरकार 20 प्रतिशत एथेनाल मिश्रित पेट्रोल नीति लागू करने को अपनी बड़ी सफलता बता रही है। सरकार दावा कर रही है कि उसने तय समय सीमा 2030 से पहले ही स्वच्छ ऊर्जा का यह लक्ष
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को मजबूरन इस्तीफा देना ही पड़ा। हालांकि श्रीमान जी ने अपने इस्तीफे को बहुत महान उद्देश्यों का वास्ता देते हुए दिया। साफ है, श्रीमान जी बलि
जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं का संघर्ष इतिहास रच चुका है। किसी के आगे न झुकने का दम्भ भरने वाली मोदी सरकार को छात्रों-युवाओं ने झुकने को मजबूर कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मे
आज यह स्थापित बात है कि भारत के हिन्दू फासीवादियों ने आजादी की लड़ाई में क्रूर, धूर्त व अत्याचारी ब्रिटिश साम्राज्यवादियों का खुले व छिपे ढंग से समर्थन किया था। ये आजादी की लड़ाई से दूर-दूर रहे। और उन सामंती, राजाओं की गोद में बैठकर ऊंघते-सोते रहे जो अंग्रेजों के पिट्ठू, दलाल व लठैत थे। हेडगेवार, गोलवलकर आदि को अपने घृणित हिन्दू साम्प्रदायिक एजेण्डे को आगे बढ़ाने के लिए पैसा व अन्य संसाधन राजा-महाराजाओं, जमींदारों, सूदखोरों व अंग्रेजों के चाकर व्यापारियों से ही आता था।
असम के बाद एन आर सी का मुद्दा मणिपुर में गहराता जा रहा है। असम में 1300 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद 19 लाख नागरिक और उनके बच्चे अपने ही देश में शरणार्थी या अवैध प्रवासी बन
एक जुलाई को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में महुआ मोइत्रा के स्थानीय ट्रांजिट पार्टी कार्यालय पर हमला हुआ। यह कार्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है जहां संघी भाजप
पश्चिम बंगाल में जबसे भाजपा सत्तासीन हुई है उसने हिंसा-तांडव का जो नंगा नाच शुरू किया है उसके आगे तृणमूल शासन व माकपा शासन की सारी गुण्डागर्दी छोटी पड़ गयी है। संघ-भाजपा अ
घोटाले कई तरह के होते हैं। ‘आर्थिक घोटाला’, ‘राजनैतिक घोटाला’, ‘न्यायिक घोटाला’, ‘प्रशासनिक घोटाला’, ‘बौद्धिक घोटाला’, ‘साहित्यिक घोटाला’ वगैरह, वगैरह। क्या कोई ये सब घोट
पिछले कुछ दशकों से, ‘इंडियन नालेज सिस्टम’ (IKS) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत के अपने बौ
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?