नारा राम का कर्म शैतान का

Published
Sun, 02/01/2026 - 07:00
/nara-ram-ka-karam-shaitan-ka-0

किसी जमाने में ‘जय श्री राम’ का नारा गूंजने पर महसूस होता था कि कोई धार्मिक आस्थावान टोली मंदिर की ओर पूजा के लिए जा रही हो। पर आज इस नारे के तेवर और अर्थ बदल गये हैं। इस नारे को संघ-भाजपा के लम्पटों ने पूरी तरह कब्जा लिया है। अब यह नारा संघी लम्पटों की खुलेआम गुण्डागर्दी का प्रतीक बन चुका है। अब इस नारे के गूंजने का अर्थ किसी भक्तों के समूह के गुजरने की जगह लम्पटों की हिंसक भीड़ के आने का हो गया है। 
    
पिछले दिनों उड़ीसा में यही नारा लगाते हुए गौरक्षकों के दल ने एक 35 वर्षीय मुसलमान युवक की हत्या कर दी। उड़ीसा के बालासौर जिले में उक्त व्यक्ति एक वैन में बैठकर आ रहा था। वैन में मवेशियों को ढोया जा रहा था। गाड़ी को गौरक्षकों ने रोककर चालक और शेख मकरंद मोहम्मद नामक उक्त युवक की पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो भी डाला गया जिसमें पिटाई करने के बाद मोहम्मद से जय श्री राम व गौ माता की जय के नारे भी लगवाये गये। 
    
पुलिस ने हमलावरों की शिकायत पर चालक व मालिक के खिलाफ गौवध निषेध अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर दिया। मुकदमे में दर्ज किया गया कि तेज गति व लापरवाही से वाहन चलाने से वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे पलट गया। चालक को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया व घटनास्थल पर एक गाय बरामद की गयी। गाय को मां भारती गौशाला ले जाया गया व वाहन को थाने लाया गया। 
    
जब मृतक मोहम्मद के भाई ने मोहम्मद की हत्या की तहरीर दी तब पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ भीड़ द्वारा हत्या की धारा बी एन एस 103(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया। बाद में छापे मार कर पांचों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों मुकदमों में एक ही घटना के दो अलग-अलग विवरण दर्ज रहे। 
    
‘जय श्री राम’ के नारे को लगाती संघी लम्पटों की दंगाई भीड़ आज भारतीय समाज के साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। आज ये भीड़ किसी राह चलते मुसलमान को बेवजह पीट सकती है। यह बेवजह दलितों पर हमला कर सकती है। यह राह चलती लड़की को छेड़ सकती है। यानी यह कुछ भी कुकर्म कर सकती है। 
    
16 जनवरी को उ.प्र. के बरेली जिले के मोहम्मदगंज गांव में एक घर में कुछ लोगों का इकट्ठा होकर नमाज अदा करना उनका गुनाह बन गया। इस नमाज का वीडियो सामने आने पर पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। यहां तक कि घर की मालकिन रेशमा ने यह भी कहा कि उसने अपने घर पर लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी। पर योगी राज की पुलिस को तो नमाज से ही चिढ़ है। उसे कोई न कोई कार्यवाही का बहाना चाहिए। और उसने आरोप मढ़ दिया कि ये लोग घर को मदरसे में तब्दील करने की कार्यवाही कर रहे हैं। 
    
दरअसल गांव के संघी तत्वों ने पुलिस से शिकायत की और पुलिस ने उनकी शिकायत पर मुसलमान लोगों को पकड़ कर चालान कर दिया। 
    
योगी राज में नमाज पढ़ना गुनाह हो चुका है जबकि सड़क पर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए उत्पात मचाने की खुली छूट है। ऐसे में मुसलमानों को कभी बुलडोजर कभी पुलिस के डण्डे से दोयम दर्जे के नागरिक की स्थिति में धकेल दिया गया है। वहीं जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ को किसी भी जुर्म की खुली छूट मिली हुई है। फासीवादी निजाम की ओर बढ़ते देश में संघी लम्पटों के बेलगाम आतंक को रोकना वक्त की जरूरत है।  

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।