देश की पहली मुस्लिम शिक्षिका फातिमा शेख
समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ किसी का जिक्र किया जाता है तो वे हैं फातिमा शेख जो कि हमारे भारत देश की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका और सामाजिक कार्यक
समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के साथ किसी का जिक्र किया जाता है तो वे हैं फातिमा शेख जो कि हमारे भारत देश की पहली मुस्लिम महिला शिक्षिका और सामाजिक कार्यक
‘करोगे याद तो हर बात याद आयेगी’ की तर्ज पर बुजुर्गों की बातें भी याद आती हैं। वो बुजुर्ग इस दुनिया में तो नहीं हैं लेकिन फिर भी उनको कहना चाहता हूं कि तुम्हारी बतायी हुई बातें या तो गलत थीं या दुनि
दो साल से अधिक होने को हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग और धर्मनगरी, ऋषिकेश (उत्तराखंड) के पास स्थित वनंतरा रिजार्ट में कार्य करने वाली अंकिता भंडारी की बेहद संदेहास्पद परिस्थितियों में हत्या कर दी जाती है।
संसद में एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया 2018-19 के 2,18,650 लाख (संख्या में) 500 रुपये के नकली नोटों के मुकाबले 2022-23 में 9,11,
पितृसत्ता की जंजीरों में बंधी,
सपनों की दुनिया से अंधी।
आसमान छूने की ख्वाहिश,
धरती पर गिराई जाती हैं।
लालकुंआ/ उत्तराखण्ड राज्य के लालकुआं में स्थित सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल में इन दिनों मजदूरों की पहलकदमी देखने को मिल रही है, ऐसी पहलकदमी सेन्चुरी मिल
अन्य फैक्टरी की तरह जब मैं प्रिंस पाइप में काम करने गया तो शोषण का नजारा कुछ अलग नहीं था हालांकि प्रिंस पाइप एंड फिटिंग्स लिमिटेड में मैं अपने हरिद्वार में आने के शुरुआती
सेवा में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, नई दिल्ली, भारत
भारत की पूंजीवादी राजनीति में योगेन्द्र यादव एक जानी-मानी शख्सियत हैं। वे खुद को समाजवादी कहते हैं तथा किशन पटनायक को अपना गुरू बताते हैं। केजरीवाल के साथ ‘अन्ना आंदोलन’
अमरीकी साम्राज्यवाद पराभव की ओर है। अभी वह दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है लेकिन उसको चुनौती देने वाली और भी ताकतें उभर कर आयी हैं। यूक्रेन में रूस की विजय आसन्न है। यूक्रेन अ
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।