यह सिर्फ अमीरी की सूची नहीं, पूंजीवाद का कुरूप चेहरा भी

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:07
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फोर्ब्स : अरबपतियों की सूची

फोर्ब्स पत्रिका ने मार्च 2026 में दुनिया के अरबपतियों की नयी सूची जारी की। पिछले साल 3,028 अरबपतियों की संख्या 2026 में बढ़कर 3,428 हो गयी। 400 नये अरबपति सूची में शामिल हो गये। 1987 में फोर्ब्स द्वारा जारी पहली सूची में 140 अरबपति थे। अब यह संख्या 3,428 पहुंच चुकी है। इन अरबपतियों की कुल सम्पत्ति 20.1 ट्रिलियन डालर (करीब 1,860 लाख करोड़ रुपये) है। वर्ष 2020 से सम्पत्ति में बढ़ोत्तरी देखें तो अरबपतियों की सम्पत्ति में 81 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
    
धन-दौलत का भारी संकेन्द्रण पूंजीवादी समाज की सच्चाई है। यह किस स्तर पर पहुंच चुका है। इसे कुछ अन्य तथ्यों से समझा जा सकता है। 1987 में जब पहली बार फोर्ब्स ने अरबपतियों की सूची जारी की तो मात्र 2 लोगों के पास 10 अरब डालर की सम्पत्ति थी। 1999 में बिल गेट्स ने पहली बार 100 अरब डालर को छुआ और सबसे अमीर व्यक्ति बना। 
    
अब अगर वर्ष 2026 को देखें तो 100 अरब की सम्पत्ति वाले अरबपतियों की संख्या 20 पहुंच गयी है। पिछले वर्ष यह संख्या 15 थी। ऐसे समूह को ‘‘सेंटी बिलियनेयर’’ कहा जाता है। सेंटी बिलियनेयर में सबसे शीर्ष पर एलन मस्क है जिसकी सम्पत्ति 800 अरब डालर से अधिक है। 
    
इन 20 बिलियनेयरों की सम्पत्ति 3.8 ट्रिलियन डालर है। इन बीस के पास कुल अरबपतियों की सम्पत्ति का 19 प्रतिशत है। 
    
अरबपतियों की इस दुनिया में विश्व बैंक के अनुसार ही अत्यधिक गरीबों की संख्या भी लगभग 1 अरब पहुंच चुकी है यानी 3 डालर रोजाना से कम पर गुजर करने वाले लोगों की संख्या। कुल आबादी के 10 प्रतिशत लोगों को नियमित भोजन ही नहीं मिल पा रहा है। अरबों लोगों की गरीबी-बदहाली ही इन बिलिनेयरों के लिए सम्पत्ति-वैभव का पहाड़ बना रही है। 
    
भारत की बात करें तो फोर्ब्स की अरबपति सूची में भारतीयों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस साल भारत के 229 अरबपति सूची में शामिल हैं (पिछले वर्ष 205 अरबपति थे)। भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में तीसरे स्थान पर आ गया है। मुकेश अम्बानी के पास 99.7 अरब डालर की सम्पत्ति है। वे ‘‘सेंटी बिलियनेयर’’ के ग्रुप से बस कुछ ही पायदान पीछे हैं। वर्ष 2000 में भारत में कुल अरबपतियों की संख्या 9 थी जो कि वर्ष 2026 में बढ़कर 229 पहुंच चुकी है। 
    
भारत जैसे देश में जहां भूख सूचकांक में भारत की रैंकिंग गिरती जा रही है। सिर्फ भूख सूचकांक ही नहीं बल्कि बच्चों में कुपोषितों की संख्या, महिलाओं में एनीमिया की संख्या बढ़ रही है। साफ पानी, स्वास्थ्य सेवा की बुरी स्थिति है। बड़ी आबादी महंगाई, बेरोजगारी के बोझ के नीचे कराह रही हो। ऐसे हालात में चंद लोगों की शौहरत-दौलत एक बदनुमे दाग की तरह है। 
    
यह भारी असमानता दिखाती है कि पूंजीवादी सरकारें पूंजीपतियों की सेवा में किस कदर नतमस्तक हैं। मेहनतकश लोगों की सारी मेहनत का फल अरबपतियों की तिजोरियों में जा रहा है। सरकार सैकड़ों तरीके, छूटों से पूंजीपतियों की दौलत बढ़ाने और आम लोगों की लूट को सुगम बना रही है। 
    
मजदूर-मेहनतकश जनता को समझना होगा कि उनके नारकीय जीवन के लिए पूंजीपतियों का स्वर्ग ही जिम्मेदार है। पूरी पूंजीवादी व्यवस्था-तंत्र इस भेद को बनाये रखने, इसे और बढ़ाने के लिए ही रात-दिन काम पर जुटा हुआ है। 

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