दिल्ली में बजरंग दल एक बार फिर दंगा भड़काने में कामयाब

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:31
/delhi-mein-bajarang-dal-ek-baar-phir-dangaa-bhadakaane-mein-kamayab

उत्तम नगर प्रकरण

उत्तम नगर दिल्ली में होली के दिन एक युवक प्रिंस द्वारा एक मुस्लिम महिला के साथ होली खेलने पर विवाद इतना बढ़ गया कि भाजपा-संघ, बजरंग दल और गोदी मीडिया को खेलने का मौका मिल गया।
    
होली के दिन सब लोग होली खेल रहे थे उत्तम नगर टर्मिनल दिल्ली के पास स्थित जेजे कालोनी के। ब्लॉक में ज्यादातर राजस्थानी रहते हैं। 4 मार्च होली के दिन प्रिंस (उम्र 20 साल) नामक युवक ने मुस्लिम परिवार की महिला के साथ अश्लील तरीके से होली खेली, जिसका मुस्लिम महिला ने विरोध किया और चिल्लाकर शोर मचाया। जिससे दोनों परिवारों में झगड़ा हो गया। इसमें दो तरह की बातें सुनने में आईं। प्रिंस के पक्ष के लोग गुब्बारे की बात कर रहे हैं जबकि दूसरा पक्ष प्रिंस नामक युवक द्वारा महिला के साथ अश्लील हरकत की बात कर रहा है। पुलिस ने भय का माहौल बना दिया है, लोग खुलकर नहीं बोल रहे हैं। इस झगड़े के बाद दोनों परिवारों में मारपीट होती है। प्रिंस के परिवार के लोगों ने शराब पी रखी थी, यह बात भी सामने आई है।
    
दोनों परिवारों में झगड़े के बाद समझौते की बात करने के लिए दोनों परिवारों के बड़े लोग प्रयास कर रहे होते हैं कि किसी ने तरुण को फोन कर दिया। तरुण 10-15 लड़कों को लेकर आता है जिनके हाथों में हथियार थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिस कैमरा चैक क्यों नहीं कर रही है। तरुण के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि यह लड़ाई प्रिंस के परिवार के साथ थी। तरुण तो इस लड़ाई में अपने आप शामिल हुआ है। इसमें तरुण के पक्ष के लोग आरोप लगा रहे हैं लेकिन वो तथ्य नहीं बता रहे हैं। जबकि मुस्लिम पक्ष कैमरा चैक करने की बात कर रहे हैं। यह भी सामने आया है कि तरुण बजरंग दल से जुड़ा हुआ था। यह भी सामने आया है कि तरुण का परिवार 10 प्रतिशत महीने पर ब्याज पर पैसे देते थे।
    
एक मजदूर ने बताया कि ये कोई धार्मिक झगड़ा नहीं था। ये आपसी पड़ोसियों का झगड़ा था जिसे बाद में धार्मिक रंग दिया गया है। बजरंग दल इस दंगे को पूरे देश में भड़काने के लिए लगातार मीटिंग कर रहा है जिसके कारण गोदी मीडिया ने पूरे देश में डर का माहौल दिखा-बना दिया है। तरुण के परिवार के तरुण सहित 3 लोगों को चोट लगी है जबकि दूसरे पक्ष के सात लोगों के गंभीर चोटें लगी हुई हैं। एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि अगर मुस्लिम पक्ष हमला करता तो उनके 7 लोगों को गंभीर चोटें क्यों आतीं। जबकि तरुण सहित 3 लोगों को चोटें आई हैं। 
    
स्थानीय नागरिक ने बताया कि तरुण अपने जिम से 10-15 लोगों को लेकर आया था और पड़ोसी मुस्लिम परिवार पर ताबड़तोड़ .. व सरियों से हमला बोल दिया। जिसके कारण दूसरे पक्ष के 7 लोगों को गंभीर चोटें आईं। उसके बाद वो जिम वाले लड़के भाग गए, फिर दूसरे पक्ष को तरुण अकेला मिल गया, उसके बाद तरुण की पिटाई की गई, जिसमें आई गंभीर चोटों के कारण तरुण की अगले दिन 5 मार्च को मौत हो गई। लेकिन लोगों का मानना है कि तरुण की पिटाई सेल्फ डिफेंस में हुई है। जबकि दूसरे पक्ष के एक नाबालिग बच्चे को भी गंभीर चोटें आई हैं लेकिन वह गायब बताया जा रहा है। रात में डाक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद जबरदस्ती छुट्टी दे दी। जब बाहर कोई व्हीकल न मिलने के कारण डाक्टर ने लिफ्ट दी। लेकिन बच्चे को दूसरी गाड़ी में भेज दिया। प्रशासन ने इसकी सूचना परिवार और स्थानीय लोगों को नहीं दी है कि वो नाबालिग बच्चा कहां है। 5 मार्च को दोपहर तक दूसरे पक्ष के सभी घायल लोग कालोनी में ही थे उसके बाद जब वो थ्प्त् दर्ज करवाने गए तो उनको पुलिस ने जेल भेज दिया। 4 मार्च को भी पहले पुलिस को कॉल शाहीन के परिवार ने की। जबकि शाहीन के परिवार के लोगों को पुलिस उठा कर ले गई। यह शाहीन का कहना है। 
    
5 मार्च की शाम को मुस्लिम परिवार के घर पर हमला बोला गया। उसके घर के सारे सामान को लूट लिया गया, पुलिस की भारी मौजूदगी में। फिर घर में आग लगाई गई। पुलिस वाले ने सिलेंडर को बाथरूम में डाल दिया ताकि सिलेंडर ना फटे। यह एक चश्मदीद ने बताया कि लगभग 30 पुलिस वालों की मौजूदगी में ये वारदात को अंजाम दिया गया। और फिर प्रशासन ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए मुस्लिम परिवार के घर पर बुलडोजर चलाया। यहां पुलिस और बजरंग दल और भाजपा सरकार की मिलीभगत साफ दिख रही है।
    
जब तरुण की मौत हो गई तो बजरंग दल को खेलने का मौका मिल गया। हिंदू रक्षा दल के नेता ललित शर्मा ने ईद पर खून की होली खेलने की बात कह कर दंगा भड़काने का प्रयास किया। लेकिन अभी तक ललित शर्मा की गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं मिली है।
    
एक ही परिवार के ज्यादातर लोग गिरफ्तार किए गए हैं। जबकि लूटपाट करने वाले, घर में आग लगाने वाले और तरुण के साथ आए दंगाई खुले घूम रहे हैं। पुलिस आजकल त्ै की दंगा भड़काने वाली गैंग यानी बजरंग दल की सिक्योरिटी का काम कर रही है ताकि जय श्री राम का नारा लगाने, लूट करने और आग लगाने में कोई दिक्कत न आए। द वायर ने वीडियो दिखाई है जिसमें साफ पुलिस की भूमिका दिख रही है।
    
अब दिल्ली के भी तमाम न्याय पसंद लोगों को आगे आना चाहिए और पुलिस-बजरंग दल और भाजपा सरकार के गठजोड़ का पर्दाफाश करना चाहिए।
(फैक्ट फाइंडिंग की रिपोर्ट पर आधारित। टीम- इंकलाबी मजदूर केंद्र से योगेश, परिवर्तनकामी छात्र संगठन से महेंद्र व ठछप्ठींतंजदमू से बिलाल और ैप् इमरान न्यूज से इमरान)

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?