विविध

तीसरे सप्ताह भी जारी है न्यूयार्क नर्सों की हड़ताल

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न्यूयार्क की नर्सों की हड़ताल तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। जहां नर्सें बहादुरी के साथ अपनी जीवन परिस्थितियों में सुधार के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं उनकी यूनियन नौ

कैसा लगता है दलित होना

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आधे घंटे से मेरे आंसू नहीं रुक रहे हैं। यह किसी वंशानुगत बीमारी की तरह लग रहा है। गला रुंध रहा है, छोटी हिचकियां उठ रही हैं। हिचकियां दबाने से गला दुखता है। 

जय श्री राम

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आर एस (R S) काटन मिल के मजदूरों का जीवन 12-12 घंटे ड्यूटी के साथ बीत रहा था। मजदूरों की दिनचर्या में काम करना, भोजन बनाना, भोजन करना और सोना ही जीवन बना हुआ था। मजदूरों से दिन-रात जब जरूरत हो, काम

मुक्त व्यापार समझौते : भारत को घेरते साम्राज्यवादी

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इन मुक्त व्यापार समझौतों को मोदी सरकार अपनी बहुत बड़ी सफलता व उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है। सब्जबाग दिखाये जा रहे हैं। और एक से बढ़कर एक काल्पनिक आंकड़े पेश किये जा रहे हैं।

पी एफ के मजदूर विरोधी बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन

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फरीदाबाद/ 9 जनवरी को फरीदाबाद में पी एफ आफिस में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा पी एफ निकासी में सरकार द्वारा किए जा रहे मजदूर विरोघी बदलाव को वापस लेने की

वेनेजुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

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वेनेजुएला के समयानुसार 3 जनवरी तड़के लगभग 2.00 बजे (भारतीय समय के अनुसार सुबह 11ः30 बजे) अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस सहित चार शहरों पर जनसंहारक भयंकर बमबार

भोजनमाताओं का 2 फरवरी 2026 को हड़ताल का ऐलान

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उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं लंबे समय से न्यूनतम वेतन व स्थाई रोजगार के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुनी कर रही है। इसलिए प

ईदगाह बचाने का संघर्ष

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रुद्रपुर/ रुद्रपुर नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को खेड़ा बस्ती स्थित ईदगाह के मैदान पर अन्यायपूर्ण तरीके से कब्जा कर लिया गया। नगर निगम द्वारा

अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन

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अंकिता भण्डारी प्रकरण में संलिप्त वी आई पी का नाम सामने आने के बाद से समूचे उत्तराखण्ड में जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदेश की जनता, विभिन्न क्रांतिकारी-जनवादी संगठन, कांग्रे

बेलसोनिका यूनियन ने किया लेबर कोड्स पर सेमिनार

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गुडगांव/ दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेलसोनिका यूनियन ने 4 घोर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स पर गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार की शुरुआत क्रांतिकारी

आलेख

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।