महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति ने मानव इतिहास में एक नये युग की शुरुआत की थी। महान लेनिन और बोलशेविक पार्टी के नेतृत्व में 1917 में रूस में संपन्न हुई इस क्रांति ने इतिहास में पहली बार किसी एक देश की सत्ता मजदूर वर्ग के हाथों में सौंप दी थी। आज भी दुनिया के वर्ग सचेत मज़दूर नये कैलेंडर के अनुसार प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को इस महान क्रांति की वर्षगांठ मनाते हैं। इस दिन क्रांतिकारी संगठन मजदूर वर्ग की महान क्रांतिकारी विरासत से प्रेरणा और अतीत की कमियों-गलतियों से सबक लेते हुये पूंजीवाद विरोधी क्रांतिकारी आंदोलन को तेज करने का संकल्प लेते हैं।
    
दिल्ली में इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में एक मजदूर सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि इस क्रांति को कुचल देने के लिये 14 पूंजीवादी देशों ने क्रांतिकारी रूस पर हमला कर दिया था; लेकिन रूस के मजदूर-मेहनतकशों ने अपनी जान की कीमत पर भी क्रांति की रक्षा कर मानव इतिहास के एक नये युग की शुरुआत की।
    
फरीदाबाद में इस मौके पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अक्टूबर क्रांति के बाद मजदूरों की सोवियतों ने फैक्टरी-कारखानों एवं अन्य सभी महत्वपूर्ण संस्थानों का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था; साथ ही, क्रांतिकारी सरकार ने जमींदारों की बड़ी-बड़ी जमीनें जब्त कर उन्हें गरीब किसानों एवं भूमिहीनों में बांटने का निर्देश जारी कर दिया था।
    
गुड़गांव में इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि रूस में 1917 की क्रांति के बाद सभी बालिग पुरुषों की तरह सभी बालिग महिलाओं को भी वोट देने का अधिकार प्रदान कर दिया गया था। जबकि उस समय अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड जैसे अग्रणी पूंजीवादी देशों में भी महिलाओं को वोट देने का अधिकार हासिल नहीं था।
    
हरिद्वार में इस मौके पर एक मजदूर सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि इस महान क्रांति ने जिस समाजवादी सोवियत संघ को जन्म दिया वहां बेरोजगारी का नामो-निशान भी नहीं था। इसके अलावा नशाखोरी और वेश्यावृति जैसी सामाजिक बुराइयों का भी वहां अंत कर दिया गया था।
    
मजदूर सभा में इंकलाबी मजदूर केंद्र, सीमेंस वर्कर्स यूनियन, एवेरेडी मजदूर यूनियन, किर्बी श्रमिक कमेटी, जन अधिकार संगठन, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन इत्यादि के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
रामनगर में इस अवसर पर सोबीबोर फिल्म का प्रदर्शन किया गया। यह फिल्म दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के नाजी कंसंट्रेशन कैंप में अमानवीय जुल्मों और सोबीबोर कैम्प के बंदियों द्वारा कैम्प तोड़ भागने के बहादुराना संघर्ष पर आधारित है। कार्यक्रम में इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। 
    
रुद्रपुर में इस मौके पर एक परिचर्चा आयोजित की गई एवं अक्टूबर क्रांति पर बनी फिल्म ‘‘दस दिन जब दुनिया हिल उठी’’ का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
पंतनगर में इस अवसर पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया एवं अक्टूबर क्रांति से जुड़ी पोस्टर प्रदर्शनी लगाकर मजदूरों को इस क्रांति और समाजवादी सोवियत संघ की उपलब्धियों के बारे में बताया गया। परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि आज पूरी दुनिया समेत भारत में भी पूंजीपति वर्ग मजदूर वर्ग पर हमलावर है। भारत में तो मोदी सरकार ने 4 नये लेबर कोड्स पारित कर बड़ा हमला बोल दिया है। ऐसे में अपने छीने जाते अधिकारों को बचाने के लिये भी क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाना जरूरी है। 
    
कार्यक्रम में इंकलाबी मजदूर केंद्र, ठेका मजदूर कल्याण समिति एवं प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
    
लालकुआं में इस मौके पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा एक परिचर्चा का आयोजन कर आज के दौर में महान अक्टूबर क्रांति की प्रासंगिकता पर बातचीत की गई।
    
बरेली में इस अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज जब फासीवादी ताकतें हमलावर हैं तब अक्टूबर क्रांति की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है। मजदूर वर्ग की क्रांतिकारी विचारधारा पर खड़े होकर ही फासीवाद को चुनौती दी जा सकती है। 
    
विचार गोष्ठी में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, रेलवे यूनियन एवं क्रांतिकारी किसान मंच से जुड़े लोगों ने भागीदारी की।
    
मऊ में इस मौके पर हरदसपुर मजदूर बस्ती में एक जनसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि फासीवाद का खतरा पूंजीवाद के आर्थिक संकट से सीधे जुड़ा है। ऐसे में पूंजीवाद विरोधी क्रांतिकारी संघर्ष को आगे बढाकर ही फासीवादी ताकतों को पीछे धकेला जा सकता है। जन सभा का आयोजन इंकलाबी मजदूर केंद्र और ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
    
बलिया में इस मौके पर बहादुरपुर कारी और बखरिया डीह में जुलूस निकाला गया तथा एक परिचर्चा कर अक्टूबर क्रांति की उपलब्धियों पर विस्तार से बातचीत की गई। कार्यक्रम का आयोजन इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। -विशेष संवाददाता

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