झुग्गियों में आग लगाते अपार्टमेंट मालिक

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दिल्ली/ रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बंगाली बस्ती पिछले 35 सालों से आबाद है। यह AP वंडर्स अपार्टमेंट के पीछे स्थित है। 7 नवंबर 2025 की रात को 10ः30 बजे के करीब रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बंगाली बस्ती नामक झुग्गी में आग लग गई। आग अपार्टमेंट के पीछे से लगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आग किसी के द्वारा लगाई गई। इस बस्ती में यह तीसरी बार आग लगी है। इससे पहले 2011 व 2016 में आग लग चुकी है। जब 2011 में आग लगी थी तब रिठाला गांव के माफिया लोगों ने इसकी कवरेज नहीं होने दी, क्योंकि वह इन झुग्गियों से किराया वसूलते थे। जिसके कारण झुग्गीवासियों को कोई मुआवजा नहीं मिला।
    
उसके बाद फिर 2016 में जब आग लगी तो SDM ने तथाकथित मालिकों से जमीन के कागज मांगे। सरकारी जमीन होने के कारण तथाकथित मालिक कागजात उपलब्ध नहीं करवा पाए। एसडीएम महोदय ने रिठाला गांव के माफिया द्वारा की जा रही किराया वसूली को बंद करवाया और प्रत्येक झुग्गीवासी को 25,000 रुपया मुआवजा उस समय मिला।
    
2016 से अब तक काफी बार लोगों द्वारा आग लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन झुग्गीवासियों की तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया। एक दिन तो कई जगह आग लगाई गई लेकिन लोगों ने आग पर काबू पा लिया। 7 नवंबर 2025 को जब आग लगी तो उस तरफ के लोगों ने शोर नहीं मचाया वह अपना सामान निकालने में लग गए, पानी का पाइप कटा हुआ था, उस तरफ की किराना की दुकान का मालिक कहीं गया हुआ था। झुग्गी निवासियों को लगता है कि यह आग साजिश के तहत लगाई गई और हो सकता है कि कोई इसमें मिला हुआ हो। AP वंडर्स अपार्टमेंट पुरी ग्रुप की प्रापर्टी है। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर अविनाश पुरी और सौरभ पुरी हैं। पुरी ग्रुप एक बड़ा कारोबारी ग्रुप है जिनके हजारों की तादाद में यहां रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास फ्लैट बने हुए हैं लेकिन ज्यादातर खाली हैं। 5 से 10 प्रतिशत फ्लैट में ही लोग रहते हैं। इसका कारण है कि लोगों के पास बड़े फ्लैट खरीदने के पैसे नहीं हैं।
    
आग लगने के कारण मुन्ना और राजेश की मृत्यु हो गई। मुन्ना साफ-सफाई का काम करता है और उसके परिवार में पत्नी और बच्ची है जो गांव में रहते हैं। राजेश अपने दो बच्चों को अकेला पाल रहा है लेकिन दोनों की मृत्यु हो जाने के कारण दोनों का परिवार काफी संकट में आ गया है।
    
झुग्गी के ज्यादातर लोग साफ-सफाई का, घरेलू नौकर और कुछ लोग रिक्शा चलाने का काम करते हैं कुछ लोग कंपनियों में काम करते हैं। इनका ज्यादातर सामान जल गया है। कुछ जानवरों के मरने की भी खबर है। ज्यादातर आबादी पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। कुछ हिंदू परिवार भी इस बंगाली बस्ती में रहते हैं। सभ्य लोग कूड़ा फैलाते हैं और छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं व गरीब लोग कूड़े में अपना जीवन तलाशते हैं।
    
आजादी के 78 साल बाद भी भारतीय समाज एक सभ्य समाज नहीं बन पाया है। आज भी लाखों फ्लैट खाली खंडहर में तब्दील हो रहे हैं लेकिन गरीब आबादी झुग्गी बस्तियों व एक कमरे में अपना जीवन गुजारने के लिए अभिशप्त है। दिल्ली के अंदर लाखों फ्लैट राजीव गांधी आवास योजना के खाली पड़े हुए हैं जो लगभग खंडहर बन चुके हैं। अभी डीडीए द्वारा गोहाना से नरेला के बीच में जगह-जगह पर फ्लैट बनाए गए हैं लेकिन वह ज्यादातर खाली पड़े हुए हैं क्योंकि गरीब आबादी के पास पैसा नहीं है और जिनके पास पैसा है उनके पास पहले से घर हैं या यह जो फ्लैट हैं काफी आउटर में बनाए गए हैं और लोगों की नौकरियां सेंटर दिल्ली में हैं। एक कमरे में झुग्गी का जीवन बच्चों को समय से पहले वयस्क व नशेड़ी बनाने का काम करता है। आज व्यभिचार बढ़ रहा है इसमें आवास का भी रोल है। फ्लैटों के मालिक झुग्गियों में आग लगवा रहे हैं क्योंकि वे मानते हैं कि झुग्गियों के कारण उनके फ्लैट नहीं बिक रहे हैं। 
    
जरूरत है कि दिल्ली व अन्य महानगरों को झुग्गियों से मुक्त किया जाए और खाली पड़े फ्लैट जरूरतमंद लोगों को दिए जाएं। सभी को बेहतर रोजगार दिलाया जाए व न्यूनतम वेतन को सख्ती से लागू करवाया जाए। सरकारी कर्मचारियों के बराबर वेतन प्राइवेट सेक्टर में दिलाया जाए।            -दिल्ली संवाददाता

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