विविध

दृष्टिबाधित बच्चियां हुई यौन हिंसा का शिकार

हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड के हल्द्वानी शहर के निकट गोलापार की नेशनल एसोसिएशन फार द ब्लाइंड (छ।ठ) नवाड़खेड़ा, एक आवासीय शैक्षणिक संस्थान हैं जिसमें आंखों की रोशनी गंवा चुके दृष्टिबाधित बच

इजरायली शासकों-पश्चिमी साम्राज्यवादियों का पुतला दहन

फिलिस्तीन

हरिद्वार/ 22 अक्टूबर 2023 को भेल मजदूर  ट्रेड यूनियन बीएचईएल के कार्यालय पर फिलिस्तीनी उत्पीड़ित जनता के मुक्ति संघर्ष और इजरायली शासकों की खुली तानाशाही

जे एन यू के भगवाकरण में जुटा संघ

जेएनयू में विगत 22 अक्टूबर को आरएसएस के स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया। पथ संचलन संघ की फासीवादी वर्दी में हुआ। इस कार्यक्रम का जेएनयू छात्र संघ और उससे जुड़े संगठनों ने विरोध किया। विश्वविद्यालय प्रश

जातीय जनगणना

भारतीय राजनीति खासकर चुनावी राजनीति में जाति हमेशा से महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व रही है। जैसे भारतीय समाज में जाति किसी भी व्यक्ति के सामाजिक जीवन को निर्धारित करती रही है

‘‘आम चुनाव, बढ़ता फासीवादी हमला और मीडिया’’ विषय पर सेमिनार का सफल आयोजन

बरनाला, पंजाब/ नागरिक अख़बार द्वारा 8 अक्टूबर के दिन पंजाब के बरनाला में कामरेड नगेंद्र स्मृति सेमिनार का आयोजन किया गया। तर्कशील भवन मे

नफरत, दंगे, नरसंहार में मीडिया की भूमिका

मीडिया को आम तौर पर आम जनता अपनी समस्या के समाधान के तौर पर देखती रही हैं। लोगों का मानना होता था कि अगर हम अपनी समस्या मीडिया के सामने लेकर जाएंगे तो मीडिया उसको उजागर क

जाति जनगणना से आर्थिक जनगणना बनाम लोकतंत्र

बिहार राज्य की जाति जनगणना के आंकड़े 2 अक्टूबर 2023 को जारी किए गए। देश के राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां दो खेमों में बंट गई हैं और देश को दो खे

गोरजा इंटरनेशनल कम्पनी में तीन मजदूरों की मौत

हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित गोरजा इंटरनेशनल कम्पनी है। इस कम्पनी में कम्बल व दरियां बनाने का काम होता है। इस कम्पनी का मालिक नवीन है और इस मालिक के दो पार्टनर हैं। 

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।