महान सर्वहारा नेता लेनिन
महान समाजवादी अक्टूबर क्रांति के नेता लेनिन की मृत्यु 21 जनवरी 1924 को हुई थी। उनकी मृत्यु को 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। बीते 100 वर्षों के इतिहास पर महान अक्टूबर समा
महान समाजवादी अक्टूबर क्रांति के नेता लेनिन की मृत्यु 21 जनवरी 1924 को हुई थी। उनकी मृत्यु को 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। बीते 100 वर्षों के इतिहास पर महान अक्टूबर समा
संविधान की धारा-370 को निष्प्रभावी करने के केन्द्र सरकार के 2019 के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये हालिया फैसले ने वर्तमान मुख्य न्यायाधीश से उम्मीद लगाये उदा
सरकार से मांगें पूरी कराने को विद्युत संविदा कर्मचारियों ने निकाला मशाल जुलूस
तीन नये अपराधिक कानून जिनको पास कराया गया है उसके गुण-दोष जो भी हों, बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि कानून का व्यवस्था मशीनरी इस्तेमाल कैसे करेगी और न्यायपालिकाएं उस
रुद्रपुर/ दिनांक 23 दिसम्बर 2023 को पंतनगर थाना पुलिस द्वारा इंटरार्क मजदूर संगठन उधमसिंह नगर के महामंत्री सौरभ कुमार को कायराना तरीके से गिरफ्तार कर लिय
काकोरी के शहीदों को याद करें,
उनकी बलिदानी राहों को समझें।
आज भी उनकी कहानी जिंदा है,
उनके बलिदान की नहीं कहीं निंदा है।
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता को सीधे चुनौती देते हुये 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के नजदीक काकोरी के पास रेलगाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूट
दिल्ली/ देश भर के 17 संघर्षरत श्रमिक संगठनों/यूनियनों के समन्वय मंच, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने 23 दिसम्बर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्र
नया साल भारत सहित दुनिया के कई-कई देशों के लिए चुनावी साल है। इसमें हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है तो दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताकत संयुक्त राज्य अमेरिका भी है तो र
13 दिसम्बर को देश की संसद में कुछ नौजवान छापामार तरीके से घुस गये। उन्होंने जूते में छिपी सामग्री से संसद में रंगीन धुंआ उड़ाया और नारे लगाने लगे। संसद के बाहर भी कुछ नौजव
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?