यहूदी राज्य और जनतंत्र
पश्चिमी साम्राज्यवादी, खासकर अमरीकी साम्राज्यवादी यह कहते नहीं थकते कि पश्चिम एशिया में इजरायल अकेला जनतंत्र है। अभी हालिया संघर्ष में अमरीकी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रत
पश्चिमी साम्राज्यवादी, खासकर अमरीकी साम्राज्यवादी यह कहते नहीं थकते कि पश्चिम एशिया में इजरायल अकेला जनतंत्र है। अभी हालिया संघर्ष में अमरीकी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रत
पंतनगर/ दिनांक 22 नवंबर 2023 को ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर के पदाधिकारियों द्वारा 730 ठेका मजदूरों के हस्ताक्षर युक्त पत्र पंतनगर के गांधी हाल में मु
हल्द्वानी/ कुमाऊं टेंट हाउस कालाढूंगी रोड हल्द्वानी के गोदाम में 12 नवंबर को दीपावली की रात में आग लगने से गोदाम में सोये तीन मजदूरों की जलकर मौके पर ही
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा देश में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ राजधानी दिल्ली में 26 नवंबर को आक्रोश प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में उत्तराखंड, यूपी, हरियाण
इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी अवाम का नृशंस नरसंहार लगातार जारी है। फिलिस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों और शरणार्थी कैम्पों में मारे जाने वाले और घायल बच्चों की तस्वीरें और वीडियो
‘भिक्षाम देही’ टीवी पर सीरियल चल रहा है। तिवारी जी गांव में बैठकर कोई नाटक देख रहे हैं। कभी किसी ब्राह्मण को भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते हुए देखते हैं, तो कभी किसी आश्रम
कल रात धरने पर बारिश हुई,
धरना स्थल पर ही कुछ पेड़ हैं
जो अपनी ओट से अपने
नीचे आने वाले जीवों को धूप, बारिश से
बचाते रहते हैं
जब बारिश होती है
मध्य अमेरिका के एक छोटे से देश डोमिनिकन गणराज्य में राफेल ट्रुजिलो की तानाशाही थी। राफेल ट्रुजिलो को अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा पाला-पोषा गया था। 1930 से 1961 तक उसक
राफेल लियोनिडास ट्रुजिलो, अमेरिकी मरीन प्रशिक्षित सैनिक ने मई, 1930 में डोमिनिकन गणराज्य पर कब्जा कर लिया। उन्होंने धांधली वाले राष्ट्रपति चुनाव के माध्यम से सत्ता संभाली
उत्तर प्रदेश के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) आई आई टी की दूसरे साल की छात्रा के साथ छेड़छाड़ व सामूहिक बलात्कार की शर्मनाक घटना हुई। छात्रा 1 नवंबर की रात को अपने एक द
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।