एक मजदूर की अपने मजदूर साथियों से अपील
कारखाने में काम करते हुए, सब कुछ सहन करते, चलते-फिरते मशीनों और लाशों में तब्दील होते हम मजदूर, जिनको अब कुछ भी महसूस नहीं होता है। अपने आस-पास हो रहे गलत का विरोध करने की ताकत भी हम मजदूरों में नह
कारखाने में काम करते हुए, सब कुछ सहन करते, चलते-फिरते मशीनों और लाशों में तब्दील होते हम मजदूर, जिनको अब कुछ भी महसूस नहीं होता है। अपने आस-पास हो रहे गलत का विरोध करने की ताकत भी हम मजदूरों में नह
आम चुनाव के ठीक पहले घोर धार्मिक-राजनैतिक उन्मादी माहौल के बीच आधे-अधूरे बने मंदिर में मोदी द्वारा भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा अयोध्या में कर दी गयी। पूरा देश तो नहीं पर
भारतीय विज्ञान कांग्रेस प्रति वर्ष जनवरी पहले सप्ताह में आयोजित की जाती है। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग आर्थिक सहयोग (फण्ड) कर आयोजन में मदद करता रहा था। इस साल 3 स
इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके लिए तमाम लोगों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। अयोध्या व
इंपीरियल आटो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 21/1 कंपनी फरीदाबाद के सेक्टर 5 में स्थित है। यह कंपनी गाड़ी इंजन के लिए पार्ट्स बनाती है। फरीदाबाद के स्तर पर इंपीरियल
गुजरात सरकार ने केंद्र सरकार की सहमति से बिलकिस बानो गैंगरेप के 11 दोषियों को ठीक 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ बिलकिस की ओर से याचिका लगी। जिस पर स
भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत पर लोकसभा के चुनाव जीतना चाहती है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं को जेल में डालना, नेताओं की खरीद-फरोख्त, विपक्षी पार्टियों के बैंक खातों को
मेवात के नूंह दंगों में आरोपी, कुख्यात और बदनाम व्यक्ति बिट्टू बजरंगी जो संजय एनक्लेव फरीदाबाद का रहने वाला है, आजकल फिर सुर्खियों में है। मेवात के नूंह दंगों में मोनू मा
यहूदी नस्लवादी इजरायली सत्ता द्वारा जारी नरसंहार के साथ-साथ आतंकवादी कार्रवाइयों को भी अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने नये वर्ष की शुरूवात के दूसरे ही दिन लेबनान की राजधान
संघ परिवार की ओर से गाहे-बगाहे यह बात होती रही है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना के सौ साल होने तक भारत एक ‘हिन्दू राष्ट्र’ बन जायेगा। अब यह समय बहुत नजदीक आ गया
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है।
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?