विविध

अभिनेता और मजदूर

वो अपने जन्म से पहले ही चर्चा में था, जिस वक्त उसके जन्म की घोषणा की चर्चा तमाम मीडिया में सुर्खियां बटोर रही थी, ठीक वही वक्त था जब माटी अपने गर्भ से लोहा उगलने की तैयार

सावित्री बाई फुले-फातिमा शेख की याद में विभिन्न कार्यक्रम

सावित्री बाई फुले एक महान समाज सुधारक और योद्धा थीं जिन्होंने 19वीं सदी में ब्राह्मणवादी वर्जनाओं को साहसपूर्वक तोड़ते हुये सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक अन्धविश्वास के विर

‘‘आप तो आंधी और तूफान थे’’

लेनिन को दुनिया से गुजरे हुए सौ वर्ष हो गये हैं। सौ वर्ष का समय कम नहीं होता है। इन सौ वर्षों में दुनिया में बहुत-बहुत बड़े बदलाव हुए। दुनिया कहीं की कहीं पहुंच गयी। लेकिन

राजा बिस्कुट के मजदूरों का सम्मानजनक समझौता

हरिद्वार/ हरिद्वार सिडकुल स्थित राजा बिस्कुट के मजदूरों का लम्बा संघर्ष सम्मानजनक समझौते के साथ समाप्त हो गया है। प्रबंधन मजदूरों की ग्रेच्युटी, बोनस सहि

मंदिर राम का, वोट भाजपा का

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनावी वर्ष में चुनाव से कुछ समय पूर्व मंदिर उद्घाटन संघ-भाजपा को वोटों की नयी खेप

कुश्ती संघ चुनाव : जिसका अंदेशा था वही हुआ

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के चुनाव लंबे समय से टलते-टलते 21 दिसंबर को सम्पन्न हुए। चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के बेहद करीबी संजय सिंह को जीत मिली। संजय सिंह की जीत के बाद ब

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?