ए आई : मानव जाति को जोखिम

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है? यह बहस आजकल तकनीकी क्षेत्र के पेशेवरों, वैज्ञानिकों में तेजी से फैलती जा रही है। विज्ञान गल्प कथायें जिनमें रोबोट इंसानों से लड़ रहे होते हैं, आज अधिकाधिक वास्तविकता बनने के करीब है। 
    
इस बहस में पेशेवर आई टी एक्सपर्टों का इस सम्बन्धी रिसर्च से हाथ खींचना, कईयों का इस्तीफा देना, ए आई रिसर्च हेतु नियम-प्रावधान बनाने की मांग बढ़ती जा रही है। 
    
कृत्रिम बुद्धिमत्ता दरअसल एक ऐसी बुद्धिमत्ता है जिसके तहत कोई मशीन या रोबोट खुद की क्षमता को स्वतः विकसित करता जाता है और अपने को अधिक कारगर बनाते जाता है। अब इसमें यह संभावना पैदा होती है कि किसी रोबोट द्वारा या मशीन द्वारा उसके दिये प्रोग्रामों से आगे बढ़कर हैकिंग के जरिये अन्य सिस्टमों, परमाणु हथियारों आदि पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है और ऐसा होने पर पूरी मानव जाति समाप्त होने का खतरा पैदा हो जायेगा। 
    
उक्त मशीन प्रोग्रामों में स्वतः बदलाव कर अपने को न दिये विध्वंसक कार्यभारों को अपना भी सकती है और यह भी हो सकता है कि इसे युद्ध के हथियार के बतौर ऐसे विध्वंस का ही निर्देश दिया गया हो। दोनों स्थितियों में ये बड़ा खतरा बन सकता है। 
    
दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञ ए आई के विकास की होड़ पर ऐसी लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं ताकि वह विध्वंसक दिशा में न बढ़ सके। इस मामले में ए आई के विकास को एक खलनायक के बतौर प्रस्तुत किया जा रहा है। और उसे सभी वर्गों के लिए समान रूप से खतरनाक घोषित किया जा रहा है। और पूंजीवादी निजाम से यह उम्मीद पाली जा रही है कि वे इस पर लगाम लगायेंगे। इस मामले में पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था को कहीं से दोषी नहीं ठहराया जा रहा है। 
    
यह बात सच है कि आज अमेरिकी व चीनी ए आई कम्पनियां बुरी तरह प्रतियोगिता व बेहतर से बेहतर माॅडल विकसित करने की होड़ में लगी हुई हैं। चूंकि ए आई युद्ध से लेकर तमाम क्षेत्रों पर असर डालेगा अतः इस होड़ में सफल देश वैश्विक वर्चस्व की होड़ में दूसरे से आगे बढ़ जायेगा इसकी संभावनायें हैं। 
    
इस विकसित माॅडल को सामने लाने की प्रक्रिया में हैकिंग भी संघर्ष का एक रूप बन चुका है। हथियारों की बढ़ रही होड़ के साथ ए आई उतनी तबाही का खतरा तो अवश्य लिये है जितना परमाणु बम लिये है। 
    
ऐसे में साम्राज्यवादियों की होड़ दरअसल मानवता को युद्धों, साइबर हमले या फिर ए आई जनित विध्वंस की ओर ले जा रही है। जब तक साम्राज्यवादियों के बीच ये होड़ है तब तक इनके कारनामे किसी भी नियम-कानून से बांधे नहीं जा सकते। दूसरे शब्दों में पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था में ए आई के इस विकास व इसके विध्वंस पैदा करने की संभावना को नहीं रोका जा सकता। 
    
इसीलिए मानवता की दुश्मन ए आई तकनीक नहीं मौजूदा साम्राज्यवादी विश्व व्यवस्था है। जो ए आई का इस्तेमाल कर या दुर्घटनावश दुनिया को खतरे की ओर धकेल रही है। 
    
इसीलिए दुनिया को उत्पन्न खतरे से बचाव किसी भावुक अपीलों से नहीं होने वाला। यह बचाव पूंजीवाद विरोधी साम्राज्यवाद विरोधी समाजवादी क्रांति से ही हो सकता है। इसी दिशा में आगे बढ़ा जाना चाहिए।  

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