अडाणी की सेवा में एल आई सी

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अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एल आई सी) ने अडाणी समूह में 3.9 अरब डालर का निवेश किया है। यह निवेश एक ऐसे वक्त में किया गया जब अडाणी समूह की कम्पनियों पर कर्ज बढ़ता जा रहा था और वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हेराफेरी के आरोपों के चलते नया निवेश जुटाने में दिक्कत महसूस कर रही थीं। 
    
एल आई सी ने इस निवेश को अपना सामान्य निवेश करार दिया है और कहा है कि इस हेतु उस पर कोई सरकारी दबाव नहीं था। पर एल आई सी का यह दावा भारत सरकार व अडाणी के सम्बन्धों को देखते हुए विश्वसनीय नहीं लगता है। मोदी काल में अडाणी साम्राज्य के विस्तार के लिए सरकार ने सारे मापदण्डों को किनारे रखते हुए काम किया है। भूमि आवंटन, बैंक कर्ज, बंदरगाह विक्रय, ठेके आदि सभी मसलों पर सरकार की दिशा इस घराने को किसी तरह शीर्ष पर बनाये रखने की रही है। 
    
मोदी काल में चंद एकाधिकारी घरानों को चैम्पियन घरानों के तौर पर विकसित करने की नीति अपनायी गयी। इस हेतु भारतीय कानूनों से लेकर सार्वजनिक कम्पनियों तक की अनदेखी करने में गुरेज नहीं किया गया। अडाणी-अंबानी इस सरकार के सर्वाधिक चहेते घराने रहे हैं। मोदी का अडाणी के विमान में घूमना व जियो की लांचिंग के वक्त उसके प्रचारक बन जाना सारी कहानी आप ही बयां कर देता है। 
    
मोदी सरकार के इस सहयोग का ही कमाल है कि अडाणी समूह हिंडनबर्ग की हेराफेरी व फर्जी तरीके से अपनी कंपनियों के शेयरों के भाव उठाने के आरोपों से कुछ गिरावट के बाद बच निकला। अमेरिका में झूठ बोलकर कर्जा-निवेश जुटाने के मुकदमों के जारी रहने के बावजूद अडाणी की कंपनियां नये-नये क्षेत्र में पैर फैलाती गयी। सेबी की जांच में सरकारी प्रभाव में ही अडाणी जांच को लटकाने और अंततः कुछ मसलों पर जांच बंद कराने में सफल रहे। 
    
यह भारत सरकार के समर्थन का ही कमाल है कि अडाणी की जिन कम्पनियों को अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां ठठठ. की रेटिंग देती हैं उन्हें भारतीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ।।। की रेटिंग दे देती हैं। इसी रेटिंग का हवाला देकर एल आई सी ने अडाणी की कम्पनियों अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनामिक जोन लिमिटेड व अडाणी ग्रीन एनर्जी में भारी भरकम निवेश को जायज ठहराया और जोखिम वाला निवेश मानने से इंकार कर दिया। 
    
1991 में गुजरात की एक सामान्य सी खाद्य एवं कृषि कंपनी से भारत का शीर्ष घराना बनने का अडाणी का सफर सरकारों की कारगुजारियों के बगैर संभव नहीं था। मोदी काल में ये कारगुजारियां निर्लज्जता के सारे रिकार्ड तोड़ती गयीं। हर सरकारी आवंटन में अडाणी समूह पहले स्थानों पर जगह पाता गया। कौड़ी के भाव जमीन, खदान, जंगल सब अडाणी की सेवा में लुटाये जाने लगे। बैंकों का पैसा अडाणी को कर्ज के रूप में दिलाकर भी जब सरकार को चैन नहीं आया तो करोड़ों भारतीयों की बचत का प्रबंधन करने वाली एल आई सी को भी अडाणी की सेवा में लगा दिया गया। 
    
स्पष्ट है कि करोड़ों आम भारतीयों की बचत इस कदम से अडाणी के जोखिम भरे व्यवसाय में ढकेल दी गयी है। अंबानी-अडाणी की सरकार के आरोप को मोदी सरकार अपने हर नये कदम से और पुष्ट करती जा रही है।

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