मजदूरों के पास निरंतर संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं

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हरिद्वार/ किर्बी बिल्डिंग सिस्टम लिमिटेड, सिडकुल हरिद्वार के मजदूरों का संघर्ष जारी है। इस बीच 9-10 महीनों से लगातार संघर्ष में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। प्रबंधन की वादाखिलाफी से मजदूरों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रबंधन द्वारा मजदूर नेताओं को निलम्बित करने के बाद अप्रैल महीने में 10 दिन की हड़ताल 700 मजदूरों ने की थी। मजदूरों ने प्रबंधन और शासन-प्रशासन को चुनौती पेश की। एक समझौते के तहत मजदूर काम पर लौट गये। लेकिन किर्बी प्रबंधन अपने वादों से मुकरता रहा है और एकता तोड़ने के लिए साम-दाम-दंड-भेद अपनाता रहा है। झूठे फर्जी दस्तावेज के नाम पर निष्कासन व फर्जी मुकदमे दर्ज कर मजदूर नेताओं को डराने का काम करता रहा। इस बीच दो कमेटी के नेता व दो अन्य मजदूरों को निष्कासित कर दिया। मजदूरों ने उन निष्कासित मजदूरों के पक्ष में आवाज उठाई लेकिन वो मजदूर नेता मैनेजमेंट से समझौता कर यूनियन से इस्तीफा देकर चले गये। दो निलंबित मजदूर नेताओं की जांच कार्यवाही चल रही है। सभी मजदूर इन बेगुनाह निलंबित मजदूर नेताओं की लड़ाई की आवाज बने हुए हैं। प्रबंधन के गैरकानूनी कृत्य के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए हैं। प्रबन्धन को लगा कि अब वे मजदूरों की एकता तोड़ देंगे और दमन-शोषण बेखौफ करते रहेंगे लेकिन मजदूर प्रबन्धन की धूर्तता का एकता से मुकाबला कर रहे हैं। 5 सदस्यीय कमेटी को जो प्रबन्धन वर्ग पहले कुछ नहीं समझता था अब वार्ता के लिए टेबल पर बैठाने को बाध्य हो रहा है। हालांकि 5 सदस्यीय कमेटी को तोड़ने और अपने पक्ष में करने का प्रयास प्रबंधन लगातार करता रहा है। लेकिन मजदूरों ने लगातार आम सभा करके अपनी कमेटी को दुरुस्त करने और सर्वसहमति से फैसला लेने जैसे कार्य करते हुए प्रबन्धन की चालों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। 
    
अप्रैल माह में लगे मांग पत्र पर वार्ता जारी है। अभी बोनस में जो पहले 16,800 रुपये मिलते थे इस बार 21,000 रुपये बढ़ोत्तरी हुई। प्रबंधन ने मजदूरों की बिना सहमति के वेतन वृद्धि कर दी जिसका विरोध हो रहा है और श्रम विभाग में वार्ता जारी है। मजदूरों का कहना है कि सम्मानजनक वेतन वृद्धि हो वो भी सभी मजदूरों की, बराबर वेतन में बढ़ोत्तरी हो, तब वे मानेंगे। प्रबंधन यहां मजदूरों के बीच वेतन वृद्धि बराबर ना देकर उन्हें तीन-चार श्रेणियों में बांटना चाहता है इस चाल को मजदूर समझ रहे हैं और अपनी मांगों पर अड़े हैं। 
    
किर्बी प्रबंधन के गैरकानूनी कृत्य पर श्रम विभाग मौन है। कम्पनी में ठेका मजदूरों से मशीनों पर काम करवाना और कई सालों ये मजदूर काम कर रहे हैं उन्हें ठेके पर रखना गैरकानूनी है। कानून तो कहता है कि उन्हें अब तक स्थायी हो जाना चाहिए। लेकिन किर्बी प्रबंधन श्रम कानून को ताक पर रखकर खूब मुनाफा पीट रहा है। सुरक्षा की अनदेखी का परिणाम है कि कुछ महीने पहले एक मजदूर के पैर में गंभीर चोट लग गई थी। 10 सालों से काम कर रहे ठेके के मजदूरों को जबरन ब्रेक दिया जा रहा है और प्रबन्धन द्वारा दलीलें दी जा रही हैं जो हड़ताल में शामिल रहा है उन सभी को निकाला जायेगा। इस तरह से प्रबंधन स्थायी और अस्थायी मजदूरों की एकता में दरार डालने जैसे कुकृत्य कर रहा है। 
    
प्रबंधन इतना डरा हुआ है कि वह मजदूरों को आफिस में बुला कर कहता है कि बाहरी संगठनों का साथ छोड़ दो। भगतसिंह बनने की कोशिश मत करो। और अन्य फैक्टरी के मजदूरों के संघर्षों में मत जाओ। नेतागिरी में कुछ नहीं रखा है। अपने काम से मतलब रखो। हमने बहुत देखे हैं। तरह-तरह की फर्जी कहानियां सुना-सुना कर वह मजदूरों को डराना चाहता है। मजदूरों का मान-सम्मान और इज्जत उनके हाथ में है इसको बरकार रखने के लिए हर पल, हर समय और हर दिन प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी। कम्पनी के अंदर ईमानदारी से काम व सामूहिक अनुशासन मजदूरों को बना कर रखना होगा। मजबूत एकता और लौह अनुशासन ही मजदूरों को जीत की तरफ ले जायेगा। 
    
किर्बी के मजदूरों को सोचना होगा जब वे हड़ताल पर थे तो सरकार में बैठे विधायक-मंत्री देखने तक नहीं आये। और हरिद्वार का पूरा प्रशासन उसी रास्ते से गुजरता है उसने सुध तक नहीं ली और उलटा प्रशासन तो दमन करने पर उतारू था। प्रबन्धन ने तो खुलेआम कम्पनी में गुंडा बुला कर गुंडागर्दी की लेकिन मजदूर एकता के सामने किर्बी प्रबंधन की गुंडागर्दी नहीं चल पायी और न ही आगे चलेगी। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार की यूनियनों सहित समाजिक संगठनों ने तन-मन-धन से मजदूरों की लड़ाई में साथ दिया था। याद करें महिलाओं और बच्चों ने कितनी शानदार भूमिका निभाई थी। आगे भी ऐसे ही संघर्ष करने के लिए तैयार रहना होगा। मजदूर वर्ग की राजनीति सीखनी होगी। जाति धर्म से ऊपर उठकर व्यापक एकता बनानी होगी। मेहनतकशों के हर संघर्ष में भागीदारी करनी होगी। मजदूर वर्ग की शानदार क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाना होगा। -हरिद्वार संवाददाता
 

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