बेलसोनिका यूनियन ने किया लेबर कोड्स पर सेमिनार

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:18
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गुडगांव/ दिनांक 11 जनवरी 2026 को बेलसोनिका यूनियन ने 4 घोर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स पर गुड़गांव में एक सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार की शुरुआत क्रांतिकारी गीत के साथ की गई। विगत 21 नवंबर 2025 को मोदी सरकार ने 4 लेबर कोड्स को लागू कर दिया है। 4 लेबर कोड्स अब पुराने श्रम कानूनों की जगह ले चुके है। 
    
सेमिनार की शुरूआत में बात रखते हुए वक्ता ने बताया कि क्यों पूंजीपति वर्ग को लेबर कोड्स की जरूरत पड़ी। मजदूर आंदोलन की कमजोर होती धार और ट्रेड यूनियन आंदोलन के फैक्टरी स्तर तक सीमित हो जाने के चलते सरकार यह हमला बोलने की हिम्मत कर पाई। 1998 में गठित द्वितीय श्रम आयोग की सिफारिशों को लेबर कोड्स के माध्यम से लागू किया गया। 
    
यूनियन के प्रधान व महासचिव ने 4 लेबर कोड्स के मुख्य-मुख्य प्रावधानों को बताया कि मजदूरों के 8 घंटे कार्य के अधिकार को छीन लिया गया है। हड़ताल के प्रावधानों को कमजोर कर ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है कि मजदूर हड़ताल करें तो उसके ऊपर जुर्माने व जेल तक के प्रावधान कर दिए गये हैं। महिलाओं से रात्रि पाली में कार्य कराने से लेकर ख़तरनाक उद्योगों में कार्य कराने की छूट पूंजीपति वर्ग को दे दी गयी है। 300 स्थाई मजदूरों तक वाले कारखानों में पूंजीपति वर्ग को छंटनी-तालाबंदी की खुली छूट दे दी गयी है। 
    
स्थाई कार्य पर अब फिक्स टर्म एम्प्लायमेंट के तहत मजदूर रखने की छूट दे दी गई है। तमाम सामाजिक सुरक्षा के मापदंडों को बदलकर मालिकों को पी एफ, ई एस आई सी से बाहर निकलने का रास्ता दे दिया गया है। एक तरह से ये लेबर कोड्स ‘‘रखो और निकालो’’ की खुली छूट पूंजीपति वर्ग को देता है। 
    
अंत में सेमिनार का समापन करते हुए इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता ने बताया कि आज लेबर कोर्ट अपने फैसलों में ट्रम्पियन दुनिया का हवाला देकर मजदूरों के विरोध में फैसले दे रहा है। राष्ट्र निर्माण के नाम पर मजदूरों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है। आज समय की जरूरत बनती है कि लेबर कोड्स के खिलाफ वर्गीय एकता बना कर संघर्ष को लड़ा जाए। मजदूर जब अपनी वर्गीय एकता बना कर मजदूर राज समाजवाद के लिये लड़ रहे थे तब पूंजीपति वर्ग ने ये श्रम कानून हमें दिए थे। आज फिर से हम अगर अपने संघर्ष में वर्गीय एकता बनाकर मजदूर राज समाजवाद के लिये लड़ेंगे तो फिर पूंजीपति हमें लाभकारी कानून देने की बात कह सकता है। आज पूंजीपति वर्ग हमें अपनी रोटी की लड़ाई से भटकाकर धर्म-जाति की लड़ाई में शामिल करना चाहता है। मजदूरों को सचेत सतर्क रहने की जरूरत है। 
    
क्रांतिकारी गीत के साथ सेमिनार का समापन किया गया। इस सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, जन संघर्ष मंच हरियाणा, श्रमिक संग्राम कमेटी, AIUTUC, मारुति स्ट्रलिंग कमेटी, CSTU, ए बी कैब ब्लाग/ओला-उबेर के प्रतिनिधि मौजूद थे। -गुड़गांव संवाददाता

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