पिछले दिनों अमेरिकी सरगना डोनाल्ड ट्रम्प ने माइकल सैवेज की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर साझा की। यह टिप्पणी अमेरिका में पैदायशी नागरिकता के कानून का विरोध करते हुए की गयी थी। इसमें सैवेज ने कहा था ‘‘एक बच्चा पैदा होते ही नागरिक बन जाता है और तब वे भारत या चीन या किसी अन्य धरती के नरक से पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।’’
भारत को नरक सरीखा दर्जा देने पर भारत के विदेश मंत्रालय ने इस टिप्पणी पर कहा कि यह अनुचित, स्पष्टतया अज्ञानतापूर्ण व घटिया थी। साथ ही ये भारत-अमेरिका के संबंधों की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती है, जो लंबे समय से आपसी सम्मान व साझा हितों पर आधारित रहे हैं।
इसके पश्चात भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने बताया कि ट्रम्प ने भारत को महान देश कहा है और मोदी को अपना मित्र बताया है।
भारत के शासकों की यह कमजोर प्रतिक्रिया दिखाती है कि संघी फासीवादी अमेरिकी चाटुकारिता के हर बीते दिन के साथ नये-नये रिकार्ड बनाते जा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले संघ के एक सर कार्यवाहक अमेरिका में खुलेआम स्वीकार कर आये थे कि भारत ने अमेरिका के कहने पर रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया। कि ईरान से रिश्ते खराब कर लिये आदि। इससे पहले ट्रम्प द्वारा पचासों बार भारत-पाक युद्ध बंद करने के दावों, रूस से तेल खरीद रोकने के निर्देशों, रूस से तेल खरीदने की भारत को छूट के मसलों पर भारत सरकर चुप्पी साधती रही।
कई लोग एपस्टीन फाईल मंे मोदी का नाम आने पर ट्रम्प द्वारा मोदी को धमकाने को इसका कारण मानते हैं। उनके अनुसार मोदी अपनी असलियत उजागर होने देने से रोकने की खातिर ट्रम्प के मनमाने बयान सह रहे हैं।
एपस्टीन फाईल की कहानी में सत्यता का अंश हो सकता है पर यह भी वास्तविकता है कि संघ हमेशा से अमेरिकी साम्राज्यवाद समर्थक रहा है। उसका फासीवादी हिन्दू राष्ट्र अमेरिकी शासकों के आशीर्वाद से ही कायम होना है। ऐसे में भारत के संघी शासक व भारत की एकाधिकारी पूंजी किसी भी कीमत पर अमेरिका से रिश्ते बिगाड़़ने को तैयार नहीं हैं। वे ट्रम्प की अनर्गल बातों पर भी जुबान खोलने से डरते हैं। वे अमेरिका से सम्बन्ध बनाये रखने के लिए कुछ भी करने को उतारू हैं।
चीन-भारत को नरक की अमेरिकी संज्ञा अमेरिकी साम्राज्यवादियों की साम्राज्यवादी सोच की द्योतक है। अमेरिकी दक्षिणपंथी रेडियो एंकर माइकल सैवेज इस साम्राज्यवादी श्रेष्ठता बोध में आकण्ठ डूबे हैं। वे अमेरिकी राज्य के एक से बढ़कर एक कुकर्मों पर तो कुछ नहीं कहते, हां भारत-चीन जैसे देशों को नरक का दर्जा दे कर खुद को श्रेष्ठ मानने की व गरीब देशों को कुचलने-धमकाने की सोच को ही प्रदर्शित करते हैं।
मोदी सरकार की अमेरिकापरस्ती लगातार बढ़ती गयी है। ट्रम्प लगातार प्रधानमंत्री मोदी के सामने भारत को गरियाने से लेकर उसे नरक बताने तक पहुंच गये हैं। पर मोदी ट्रम्प के विरुद्ध बोलने के मामले में मौन साधे हुए हैं।
इस मौन के जरिये वे भारत की सम्प्रभुता को क्षरित कर रहे हैं। वे एक देश के आत्मसम्मान को रौंद रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब ट्रम्प मोदी को तमाचा मारें और मोदी बतायें कि उनके अनन्य मित्र तो उनके गाल पर बैठा मच्छर मार रहे थे। कहने की बात नहीं कि मोदी काल में भारत सरकार अमेरिका की चाटुकारिता की हद पार कर चुकी है। अब बस हमारे प्रधानमंत्री के ट्रम्प के पैरों में पड़ने की कसर ही बाकी है।