19 अप्रैल 2026 को लघु सचिवालय, गुड़गांव में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के आह्वान पर देश भर में जारी मजदूर आंदोलनों और उन पर हो रहे पुलिसिया दमन के खिलाफ एक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों, छात्र-युवा संगठनों और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने गुड़गांव-मानेसर, नोएडा तथा देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे मजदूरों पर हो रहे बर्बर दमन की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने विशेष रूप से गुड़गांव-मानेसर में माडेलमा और रिचा ग्लोबल के 56 से अधिक मजदूरों- जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं- और साथ ही नोएडा से ३५० मजदूरों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और उन पर हत्या के प्रयास, आगजनी व दंगे जैसी गंभीर धाराएं लगाने को अन्यायपूर्ण बताया।
प्रदर्शन में यह भी उठाया गया कि इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं श्यामवीर, हरीश और राजू, बेलसोनिका के अजीत और पिंटू यादव तथा मुंजाल शोवा के मजदूर आकाश को साजिशकर्ता बताकर गिरफ्तार करना एक सुनियोजित कार्रवाई है। वक्ताओं ने कहा कि इन घटनाओं की जिम्मेदारी मजदूरों पर थोपना गलत है और इसकी निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए।
नोएडा में बिगुल मजदूर के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की भी कड़ी आलोचना की गई। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों में ट्रेड यूनियन नेताओं, लेखकों और पत्रकारों पर की जा रही कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया गया। सीटू के नेताओं जयभगवान व विनोद को फेसबुक पर भड़काऊ भाषण का आरोप लगाकर नोटिस जारी किया गया, सीटू और सीपीएम के सांसदों को मजदूर परिवारों से मिलने से रोका गया, फिरोजाबाद में सीटू के नेता भूरी सिंह यादव को जेल भेज दिया गया, नोएडा में गंगेश्वर दत्त शर्मा और अन्य नेताओं को लंबे समय से नजरबंद रखा गया है, किसान नेता व एडवोकेट रूपेश वर्मा पर पुलिस निगरानी जारी है, और देश भर से ट्रेड यूनियन नेताओं की धर-पकड़ व नजरबंदी की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह पूरी स्थिति लोकतंत्र और कानून के शासन के विरुद्ध है तथा संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है।
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान ने 21 अप्रैल को प्रेस क्लब आफ इंडिया में एक प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित की। इस कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट प्रशांत भूषण और विभिन्न मजदूर संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने बताया कि खासकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने दमन का क्रूर अभियान छेड़ दिया है। कारपोरेट नियंत्रित मीडिया सरकार की आवाज़ बनकर ‘‘पाकिस्तानी लिंक’’ और ‘‘बाहरी उकसावे’’ जैसे बेबुनियाद आरोप लगाकर अपने अधिकार मांग रहे मजदूरों को ‘‘दंगाई’’ करार दे रहा है, नोएडा के एसी स्टूडियो में बैठे गोदी मीडिया के एंकर, मजदूर कार्यकर्ताओं के खिलाफ टूलकिट चला रहे हैं जबकि पुलिस बेरहमी से लाठीचार्ज कर रही है और निर्दोष लोगों को जेलों में ठूंस रही है।
प्रेस कांफ्रेस में मांग की गयी कि
1. सभी गिरफ्तार मजदूरों और श्रमिक नेताओं की तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
2. सभी झूठे और गंभीर आपराधिक मामलों को तुरंत वापस लिया जाए।
3. चारों मजदूर विरोधी श्रम कानूनों को रद्द किया जाए।
4. स्थायी काम के लिए स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाए और ठेका प्रणाली को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
5. 8 घंटे के कार्यदिवस के लिए न्यूनतम वेतन रु.30,000 प्रति माह किया जाए।
6. महिला मजदूरों को रात की शिफ्ट में काम करने के लिए बाध्य करने वाले कानूनों को समाप्त किया जाए।
7. मजदूरों और महिला श्रमिकों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
देश के अलग-अलग क्षेत्रों से मजदूर संगठनों-मानवाधिकार संगठनों-छात्र संगठनों- बुद्धिजीवियों आदि ने भी मजदूर आंदोलन के दमन के विरोध में बयान-प्रदर्शन आयोजित किये।
-विशेष संवाददाता