होर्मुज वार्ता: समझौते के आसार नहीं

Published
Sun, 08/16/2026 - 15:50
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अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य टकराहटों के खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। यद्यपि दोनों देशों के बीच वार्ताओं का क्रम कई बार टूटने के बावजूद फिर नये सिरे से शुरू हो जाता रहा है। पर अब तक का अनुभव दिखाता है कि जहां अमेरिकी साम्राज्यवादी किसी भी कीमत पर ऐसा समझौता चाहते हैं जिससे उनकी विजय दिखायी दे और वे अपनी गिरती वैश्विक दादागिरी को और गिरने से बचा सकें। वहीं ईरानी शासक भारी तबाही के बावजूद अमेरिका के आगे किसी तरह झुका हुआ प्रस्तुत नहीं होना चाहते। इस तरह दोनों देशों के बीच टकराव अब कुछ उतार-चढ़ाव के साथ लम्बे वक्त तक जारी रह सकता है। 
    
इस टकराव का सर्वाधिक असर होर्मुज मार्ग पर पड़ रहा है। जिससे कभी कुछ जहाज गुजरने लगते हैं तो कभी ईरान या कभी अमेरिका द्वारा रोकने के साथ हमले का शिकार बन जाते हैं। दुनिया के 20 प्रतिशत तेल को ले जाने वाले इस मार्ग का यह हश्र तेल की कीमतों में उछाल को बरकरार रखे हुए हैं। 
    
अमेरिका औपचारिक तौर पर होर्मुज रास्ते की नाकेबंदी तो ईरान होर्मुज से गुजरने पर जहाजों से कर वसूली से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच दोनों देशों के बीच जब तब बमबारी जारी है। अमेरिका-इजरायल दोनों इस बात पर सहमत दिख रहे हैं कि युद्ध को जारी रखते हुए ही अमेरिकी चुनाव व इजरायली चुनाव करा लिये जायें व इनका निपटारा चुनाव बाद किया जाये। 
    
हाल ही में जब ईरान ने होर्मुज खोलने केे एवज में मुआवजे, प्रतिबंधों के खात्मे, लेबनान यमन पर हमलों का अंत आदि की मांग की तो प्रत्युत्तर में अमेरिकी सरगना ट्रम्प ने 50 वर्षों में ईरान द्वारा अमेरिका को पहुंचाये नुकसान व ईरानी विरोध प्रदर्शन में दमन के शिकार लोगों के लिए मुआवजे की मांग कर डाली। इस मांग ने ही दिखलाया कि ट्रम्प अब ईरान से समझौते की घोषणा कर ईरान युद्ध में जीत की छवि से चुनाव में फायदा उठाने की सोच छोड़ चुके हैं। दरअसल वे समझ चुके हैं कि वे जीत के चाहे जितने दावे कर लें, दरअसल दुनिया व खुद अमेरिकी जनता ट्रम्प को हारा हुआ मान रही है। ऐसे में अब वे युद्धरत रहते हुए ही अपने देश के सदनों के चुनाव में जाना चाहते हैं जहां वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रवाद को भड़का कर फायदा उठा सकें। 
    
इस बीच अमेरिकी सरगना ट्रम्प ने खुद अपनी फजीहत तब करवाई जब तुर्की में उन्होंने खुद पर ईरानी हमले की आशंका जता चोरी छिपे अपना विमान बदलने का काम किया। उनकी इस हरकत ने व बाद के दावों ने दरअसल ईरानी हुकूमत की ताकत को ही स्थापित करने का काम किया जो तुर्की में ट्रम्प की हत्या का षड्यंत्र रच सकती है। 
    
होर्मुज की संकटपूर्ण स्थिति के बीच ईरान ओमान से वार्ता कर होर्मुज को नियंत्रित करने का समझौता करने की ओर बढ़ रहा है। यह सब अमेरिकी साम्राज्यवादियों पर और दबाव कायम कर रहा है जो किसी भी कीमत पर होर्मुज खुलवाने का दावा कर रहे हैं।
    
दरअसल अमेरिकी सरगना ईरान से जंग तभी हार चुके थे जब अमेरिका-इजरायल 20 दिनों की बमबारी, नेताओं की एक पूरी पीढ़ी के सफाये के बावजूद ईरान को नहीं झुका पाये।
    
पर आदत से मजबूर अमेरिकी साम्राज्यवादी किसी भी हद तक जाकर हार को जीत में बदलने पर आमादा हैं और इस प्रक्रिया में वे दुनिया में अपना प्रभाव और कमजोर कर रहे हैं। ईरान अगर आज इस स्थिति तक पहुंच पाया है तो यह पर्दे के पीछे से रूसी-चीनी साम्राज्यवादियों के सहयोग-समर्थन के बगैर असंभव था। दुनिया में बढ़ती अंतर साम्राज्यवादी कलह इस जंग के किसी निपटारे की ओर बढ़ने से रोक रही है। अमेरिकी वर्चस्व घट रहा है पर अमेरिका अभी भी दुनिया की सर्वप्रमुख ताकत के बतौर बना हुआ है। 

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