काकोरी के शहीदों की याद में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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काकोरी के शहीद - रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिडी और रोशन सिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी रहे हैं। इनमें बिस्मिल और अशफाक की दोस्ती हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल और हमारे देश की साझी शहादत-साझी विरासत का प्रतीक है। आज हमारे देश की सत्ता पर बैठे हिंदू फासीवादी शासकों द्वारा साजिशन इन महान क्रांतिकारियों की स्मृतियों को मिटाने की कोशिशें की जा रही हैं। 
    
9 अगस्त 1925 को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े क्रांतिकारियों द्वारा अंजाम दिये गये काकोरी ट्रेन एक्शन को इस साल 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं। गौरतलब है कि ब्रिटिश सत्ता को सीधे चुनौती देने वाली इस कार्रवाही के बाद चले गिरफ्तारियों के दौर और मुकदमे के नाटक के उपरांत 1927 की 17 दिसम्बर को राजेंद्रनाथ लाहिडी को और फिर 19 दिसम्बर को रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान एवं राजेन्द्रनाथ लाहिडी को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। 
    
शहीदों के सपनों का भारत बनाने में जुटे क्रांतिकारी-प्रगतिशील संगठन प्रतिवर्ष इन महान क्रांतिकारियों के शहादत दिवस को मनाते हैं। इस वर्ष भी इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, भाकपा (माले), सेंटर फार स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस, ठेका मजदूर कल्याण समिति, क्रांतिकारी किसान मंच, भीम आर्मी एवं विभिन्न फैक्टरी यूनियनों द्वारा काकोरी के शहीदों की याद में प्रभात फेरी, श्रद्धांजलि सभा, जुलूस, पोस्टर प्रदर्शनी, विचार गोष्ठी इत्यादि विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये गये। 

दिल्ली में 19 दिसम्बर को मजदूर बस्ती शाहबाद डेरी में प्रभात फेरी निकालकर शहीदों को याद किया गया।

फरीदाबाद में 17 दिसम्बर को राजीव नगर मजदूर बस्ती में क्रांतिकारी साहित्य का स्टाल लगाया गया एवं नुक्कड़ सभायें की गईं; तथा 19 दिसम्बर को सेक्टर 55 में एक सभा की गई। सभा में वक्ताओं ने कहा कि काकोरी के शहीदों की क्रांतिकारी परंपरा को भगतसिंह और उनके साथियों ने आगे बढ़ाया। भगतसिंह के प्रस्ताव पर ही सोशलिस्ट शब्द जोड़कर क्रांतिकारी संगठन का नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन किया गया था। 

गोहाना में जन चेतना मंच द्वारा तीन दिवसीय (17, 18 व 19 दिसम्बर) सांप्रदायिक सौहार्द प्रदर्शनी आयोजित की गई जिसमें काकोरी कांड से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को भी प्रदर्शित किया गया।

हरिद्वार के बादशाहपुर में 17 दिसम्बर को ‘‘साझी शहादत-साझी विरासत’’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया; तथा 19 दिसम्बर को मजदूर बस्ती महादेव पुरम में सुबह प्रभात फेरी, दोपहर को क्रांतिकारी साहित्य का बुक स्टाल एवं शाम को नुक्कड़ सभायें कर शहीदों के विचारों से मजदूरों-मेहनतकशों को परिचित कराया गया। 

काशीपुर में 19 दिसम्बर को मोहल्ला जसपुर खुर्द में श्रद्धांजलि सभा कर शहीदों को याद किया गया। 
जसपुर में शहीद यादगार कमेटी द्वारा 19 दिसम्बर को तहसील परिसर में श्रद्धांजलि सभा कर शहीदों की याद में श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये।

रामनगर में हल्दुआ क्षेत्र के ग्राम वीरपुर लच्छी में 19 दिसम्बर को  पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से शहीदों के जीवन, विचार एवं बलिदान पर प्रकाश डाला गया। इसके अलावा एक परिचर्चा भी की गई। रामनगर में ही 19 दिसम्बर को लखनपुर चुंगी पर भी श्रद्धांजलि सभा की गई।

कालाढूंगी में 19 दिसम्बर को शहीद उधमसिंह पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर शहीदों के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया गया। 

हल्द्वानी में 19 दिसम्बर को दमूवादूंगा में प्रभात फेरी निकालकर काकोरी के शहीदों को याद किया गया। इसके अलावा 21 दिसंबर को ‘‘काकोरी के शहीदों का संघर्ष व आज का भारत’’ विषय पर विचार गोष्ठी की गई। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज पूरी दुनिया और भारत में भी अमीरों की दौलत और गरीबों की कंगाली में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। 

रुद्रपुर में काकोरी शहीद यादगार कमेटी द्वारा 19 दिसम्बर को अशफाक उल्ला खां पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। तदुपरांत क्रांतिकारी गीतों व नारों के साथ जुलूस निकाला गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी द्वारा  मनमाने तरीके से असहयोग आंदोलन वापस लेने पर जो निराशा देश में थी उसे काकोरी ट्रेन एक्शन ने उत्साह और जुनून में बदल दिया था। 

पंतनगर में 19 दिसम्बर को यूनियन हाल में श्रद्धांजलि सभा कर काकोरी के शहीदों को याद किया गया। पहले यह कार्यक्रम शहीद स्मारक पर आयोजित होना तय था लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने तानाशाही पूर्ण रवैय्या अपनाते हुये शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा नहीं होने दी। 

लालकुआं-बिंदुखत्ता में 19 दिसम्बर को कार रोड पर प्रभात फेरी निकालकर शहीदों को याद किया गया। 

बरेली में शहीद यादगार कमेटी द्वारा 18 दिसम्बर को शहीद संदेश यात्रा का आयोजन किया गया जो कि अम्बेडकर पार्क से शुरू होकर कमिश्नरी स्थित शहीद स्तम्भ पर पहुंची, जहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभा की गई। इसके बाद 19 दिसम्बर को शहीद यादगार कमेटी द्वारा गांधी पार्क में भी श्रद्धांजलि सभा की गई। सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज केंद्र की मोदी सरकार देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हित में एकदम नग्न होकर काम कर रही है। हाल ही में लागू किये गये घोर मजदूर विरोधी 4 नये लेबर कोड तो मजदूरों की गुलामी के नये दस्तावेज ही हैं, जिनके विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है। 

बरेली में ही 21 दिसंबर को शहीद यादगार कमेटी द्वारा ‘‘काकोरी शहीदों की विरासत और आज की चुनौतियां’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज जबकि पूरे देश को फासीवाद की ओर धकेला जा रहा है तब हमें काकोरी के शहीदों की साझी शहादत-साझी विरासत की मशाल को थामकर आगे बढ़ना होगा। 

मऊ में 19 दिसम्बर को काकोरी के शहीदों को याद करते हुये आजमगढ़ मोड़ से सदर चौक तक जुलूस निकाला गया और सभा की गई। 

बलिया में मानेयर कस्बे में जुलूस-प्रदर्शन किया गया एवं सभा की गयी। 

बदायूं में भी काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी।            -विशेष संवाददाता

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