उत्तराखंड-उन्नाव की बेटियों को न्याय दिलाने के लिये विरोध प्रदर्शन

/uttarakhand-unnaav-ki-betiyon-ko-justice-dilaane-ke-liye-virodh-protest

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में हुये नये खुलासे में वीआईपी के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम उर्फ ‘गट्टू’ का नाम आने के बाद अब लोग पुनः मामले की सीबीआई जांच की मांग के साथ सड़कों पर उतरने लगे हैं। दूसरी ओर, उन्नाव रेप कांड के दोषी पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सेंगर की सजा पर रोक लगाने एवं उसे जमानत दिये जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने भी लोगों को गुस्से से भर दिया है। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
    
ऐसे में उत्तराखंड और उन्नाव की इन दोनों बेटियों को न्याय दिलाने के लिये दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन किये गये। इन विरोध प्रदर्शनों में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, महिला एकता मंच, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी एवं विभिन्न फैक्टरी यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। 
    
दिल्ली में शाहबाद डेरी में जुलूस निकालकर और जगह-जगह नुक्कड़ सभायें कर सत्ताधारी भाजपा के पाखंड को उजागर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की धामी और योगी की सरकारें कुलदीप सेंगर जैसे दुर्दांत अपराधी और अंकिता भंडारी हत्याकांड में लिप्त भाजपा नेताओं को बचाने में लगी हैं।
    
फरीदाबाद में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम उर्फ ‘गट्टू’ को गिरफ्तार करने एवं कुलदीप सेंगर की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखने व उसकी जमानत रद्द करने की मांगों के साथ केंद्र सरकार एवं उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि उन्नाव की बेटी के पूरे परिवार को तबाह कर देने वाले कुलदीप सेंगर जैसे अपराधी की सजा पर रोक लगाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने खुद न्यायालय को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
    
हरिद्वार में भी केंद्र सरकार एवं उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा के ज्यादातर मामलों में ‘‘महिला सशक्तिकरण’’ का जुमला उछालने वाली भाजपा के नेता सबसे अधिक शामिल हैं। 
    
रामनगर में कुलदीप सेंगर का पुतला दहन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि उन्नाव की रेप पीड़िता हो या उत्तराखंड की अंकिता भंडारी दोनों के अपराधी सत्ता से जुड़े लोग हैं। आज बेटियों को सबसे ज्यादा खतरा सत्ता में बैठे लोगों से ही है। 
    
रुद्रपुर में जुलूस निकालकर मोदी सरकार का पुतला दहन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि ये दोनों घटनायें बता रही हैं कि आर एस एम-भाजपा के हिंदू राष्ट्र में बेटियों कितनी सुरक्षित हैं।
    
लालकुआं-बिंदुखत्ता में मोदी-योगी-धामी सरकार का पुतला दहन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि सत्ताधारी भाजपा खुद को सबसे अधिक संस्कारी पार्टी के रूप में पेश करती है जबकि असल में इस पार्टी के नेता सबसे अधिक भ्रष्ट-पतित और महिला विरोधी हैं। आज पूरे देश में इनके कारनामे उजागर हो रहे हैं।
        -विशेष संवाददाता
 

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?