मजदूर संघर्ष

दिल्ली : बस्ती बचाने के संघर्ष में शामिल होने पर मजदूर नेता का पुलिसिया उत्पीड़न

बस्ती बचाने के संघर्ष में शामिल होने पर मजदूर नेता का पुलिसिया उत्पीड़न

दिल्ली/ देश की राजधानी दिल्ली में स्थित खैबरपास बस्ती पर 13 जुलाई से बुल्डोजर चल रहा है। दिल्ली विधानसभा के पास स्थित इस बस्ती में मजदूर मेहनतकश आबादी पि

संयुक्त मोर्चा ने सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा

भोजनमाताओं/रसोइयों द्वारा सभा एवं ज्ञापन

बदायूं/ दिनांक 12 अगस्त 2024 को आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन जनपद बदायूं के नेतृत्व में स्थान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बदायूं पर धरना प्

लक्जर मजदूरों के आवाज उठाने पर प्रबंधन मजदूरों को निकालने पर उतारू

हरिद्वार/ सिडकुल (हरिद्वार) में लक्जर राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड पेन निर्माता कम्पनी है। हरिद्वार सिडकुल में इसके दो प्लांट हैं जिसमें हजारो

जमीन खाली कराने से पहले पुनर्वास का खाका तैयार करने का निर्देश

हल्द्वानी/ बनभूलपुरा में रेलवे द्वारा जमीन लिए जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। 24 जुलाई की सुनवाई में सुप्

आई एम टी मानेसर से सटे गांव-बस्तियों के रास्तों के बुरे हाल

मजदूरों को अपने पूरे जीवन भर ढेरों समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मजदूर फैक्टरियों में, फैक्टरी मालिकों/ठेकेदारों के जुल्मों सितम से परेशान रहते हैं। महंगाई की मार झेलने

एक और मजदूर बस्ती पर चला बुलडोजर

रुद्रपुर/ दिनांक 14 जुलाई 2024 को भगवानपुर दानपुर के पास एक बस्ती भगवान पुर मल्ला टोली कालोनी को बुलडोजर चलाकर उजाड़ दिया गया। यहां पर लगभग 46-47 परिवार र

रुद्रपुर : मजदूर महापंचायत का सफल आयोजन

रुद्रपुर (उत्तराखंड)/ पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत दिनांक 7 जुलाई को श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के आह्वान पर भारी बारिश के बीच स्थानीय रामलीला मैद

विविमेड लेब्स कम्पनी के मज़दूरों की हड़ताल ख़त्म

काशीपुर/ अंततः 6 दिन के बाद काशीपुर (उधमसिंह नगर, उत्तराखंड) के कुंडेश्वरी स्थित दवाई निर्माता कम्पनी विविमेड के मजदूरों की हड़ताल 22 जून को खत्म हो गयी।

आलेख

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।