मंदिर में दान बनाम कन्यादान

Published
Wed, 07/01/2026 - 15:50
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राम मंदिर में चंदा चोरी होने के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि जो मंदिर में चंदा दिया गया है उसे दान बोलना चाहिए और दान देने के बाद उस दान के संबंध में कोई सवाल नहीं उठा सकता। 
    
इसकी अगर हम इस बात से तुलना करते हैं कि भारतीय समाज में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार बेटियों का विवाह करने के समय माता-पिता द्वारा अपनी बेटी का कन्यादान वर पक्ष को किया जाता है। 
    
योगी जी के कथन के अनुसार माता-पिता को बेटी के कन्यादान के बाद अपनी बेटी के बारे में, उसके हाल-चाल लेने, घर में उसकी स्थिति के बारे में, उसके सुखी या दुखी होने के संबंध में कोई सवाल-जवाब या कोई जानकारी हासिल करने का अधिकार नहीं है। अब अगर ससुराल वाले बेटी के साथ गलत व्यवहार करते हैं उसको मारते पीटते हैं उसका उत्पीड़न करते हैं यहां तक की उसकी हत्या तक कर देते हैं तब भी माता-पिता को अपनी बेटी के बारे में जानने की आवश्यकता नहीं है। यहां तक कि यदि ससुराल पक्ष उनकी बेटी की हत्या भी कर देता है तो भी माता-पिता को अपनी बेटी के अपराधियों पर केस करने या उन्हें सजा देने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। क्योंकि माता-पिता ने शादी के समय ही अपनी बेटी का दान कर दिया था। 
    
पुराने समय से ही ढेरों प्रगतिशील लोग कन्यादान पर सवाल खड़ा करते रहे हैं। जैसे-जैसे महिलाओं ने शिक्षा हासिल की, अपनी तर्कशक्ति को बढ़ाया उन्होंने भी कन्यादान के इस रिवाज पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे लेकिन समाज-परिवार के दबाव में महिलाएं इस कन्यादान की परंपरा का खुलकर विरोध नहीं कर पा रही थीं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने कन्यादान की इस रवायत का विरोध किया है, जो आज भी जारी है। 
    
विवाह के समय दहेज न देने के कारण, पुत्र पैदा न कर पाने के कारण या अन्य-अन्य कारणों से बेटियों को उनके ससुराल में प्रताड़ित किया जाता है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में महिलाओं को जला दिया जाता है। उनकी हत्या कर दी जाती है या उनको आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया जाता है। 
    
प्रति वर्ष प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि आज भी प्रति वर्ष हजारों की संख्या में दहेज प्रताड़ना कर महिलाओं को जला दिया जाता है या उनको तलाक दे दिया जाता है।
    
एक समय तो विवाहित महिलाओं को  पति प्रेम के नाम पर जिंदा ही पति की चिता पर जलने के लिए बैठा दिया जाता था। रूप कुंवर आधुनिक भारत की सती प्रथा की बहुत चर्चित घटना है। 
    
समाज के प्रगतिशील लोग बहुत पहले से कन्यादान के इस रिवाज के खिलाफ खड़े होते रहे हैं। वह मुखरता से अपनी बात कहते रहे हैं। लेकिन अक्सर ही उन्हें हिंदू परंपराओं के विरोधी के रूप में दिखाया जाता रहा है। हिंदू रीति-रिवाज पर हमला करने के तौर पर उनके प्रयासों को देखा जाता रहा है।
    
अपने आप को योगी कहलाने वाले योगी आदित्यनाथ के राम मंदिर से चढ़ावे तथा अन्य कीमती चीजों की चोरी की घटना सामने आने के बाद योगी आदित्यनाथ द्वारा दान को लेकर दिए जाने वाले बयान के बाद से बेटियों के पिताओं को अपनी बेटियों के लिए कन्यादान की रस्म का पालन करना बंद कर देना चाहिए। अपनी बेटियों को प्यार करने वाले हिन्दू माता-पिताओं को बेटियों के कन्यादान की इस परंपरा से मुंह मोड़ लेना चाहिए। 
    
अन्यथा भविष्य में भी रीति-रिवाज के नाम पर बेटियों के दान करने के परंपरा चलती रहेगी और इसके साथ ही उनका उत्पीड़न भी। हमें याद रखना चाहिए कि बेटियां हाड़-मांस की जिंदा इंसान हैं। उनकी इंसानी गरिमा को बरकरार रखने की, उनके सम्मानपूर्वक जीवन जीने की इच्छा के अनुरूप वस्तुओं की तरह बेटियों का दान करना एकदम बंद कर दिया जाना चाहिए।    -हेमा
 

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