मारुति सुजुकी मजदूरों के धरना स्थल पर स्मरण सभा

/maruti-sujuki-majdooron-ke-dharna-sthal-par-smaran-sabha

मारुति सुजुकी स्ट्रगल कमेटी के नेतृत्वकारी मजदूर प्रदीप, जो धरना स्थल पर ही रह रहे थे, की 15 नवंबर को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। 23 नवंबर को मारुति सुजुकी मजदूरों के धरना स्थल, मानेसर तहसील पर उनको याद करते हुए स्मरण सभा आयोजित की गयी। इस सभा में संघर्ष के दौरान साथ छोड़ गए मुकेश सैनी (राजस्थान), जैनेंदर (कैथल), जियालाल (जींद), ओमप्रकाश जाट (राजस्थान), पवन दहिया (सोनीपत), सोमपाल (हापुड़, उ.प्र.), अनिल (अम्बाला), संदीप (सोनीपत) और प्रवीण को भी याद किया गया। सभा की शुरुआत में प्रदीप की फोटो पर माल्यार्पण और फूल चढ़ा उनका स्मरण किया गया। सभा में शामिल सभी मजदूरों ने पुष्प अर्पण कर अपने मजदूर साथियों को याद किया।
    
स्मरण सभा को संबोधित करते हुए मारुति सुजुकी स्ट्रगल कमेटी के मजदूरों ने बताया कि प्रदीप जिसकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी, धरना स्थल पर रहकर ही अपने परिवार को चलाने के लिए कुछ देर तक मोटर साइकिल से रैपीडो आदि के द्वारा साधन जुटा रहा था। 15 नवंबर को भी वह धरना स्थल से काम के लिए निकला, पर वापस नहीं आया। पता चला कि सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई। प्रदीप सोनीपत का रहने वाला था। प्रदीप अपने घर में अकेले कमाने वाला व्यक्ति था। वह अपने पीछे घर में दो छोटे बच्चे, पत्नी और बूढ़े मां-बाप छोड़ गया है। 
    
कमेटी के लोगों ने बताया कि जियालाल को सजा हुई थी। उन्हें जेल में ही कैंसर हुआ। कैंसर का सही इलाज ना मिल पाने के कारण जियालाल की मृत्यु हो गई। पवन को भी सजा हुई थी। जब उसकी मृत्यु हुई, तब वह पेरोल पर जेल से बाहर आया था।

मारुति सुजुकी स्ट्रगल कमेटी के लोगों ने बताया ‘‘संघर्ष के दौरान अब तक 10 मजदूर हमें छोड़ गए हैं। आज प्रदीप को याद करते हुए हम अपने उन सभी साथियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने इस संघर्ष में हिस्सेदारी की। और इसी दौरान हमें छोड़ दुनिया से चले गए। यह सिर्फ 10 लोग नहीं, बल्कि उनके साथ जुड़े कई परिवार भी हैं। यह मौतें मारुति सुजुकी प्रबंधन द्वारा की गई हत्याएं हैं। हम अपने साथियों और उनके संघर्षों को कभी नहीं भूलेंगे।’’ प्रदीप व अन्य को याद करते हुए कई मजदूर भावुक हो गए। 
    
मारुति सुजुकी स्ट्रगल कमेटी के लोगों ने बताया कि मारुति सुजुकी प्रबंधन अपने शोषण-उत्पीड़न को छुपाने के लिए मारुति सुजुकी में काम कर रहे मजदूरों को परिवार के रूप में बताता है और हर साल ‘‘फैमिली डे’’ मनाने का ढोंग रचता है। 23 नवंबर को एक तरफ मजदूर धरना स्थल पर संघर्ष के दौरान चले गए मजदूर साथियों को याद कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मारुति सुजुकी प्रबंधन ‘‘फैमिली डे’’ मना रहा है। यह मारुति सुजुकी प्रबंधन के घिनौने चेहरे को भी दिखाता है। मारुति सुजुकी प्रबंधन के इस खोखले फैमिली डे में कोई विघ्न पैदा ना हो जाए इसलिए सुबह से भारी संख्या में पुलिस बल धरना स्थल पर तैनात था। उन्हें डर था कि अपने मजदूर साथियों को याद करते हुए मजदूर सुजुकी प्रबंधन के फैमिली डे को बेनकाब ना कर दें। 
    
सभी वक्ताओं ने कहा कि वे अपने साथियों को कभी नहीं भूलेंगे। कि वे संकल्प लेते हैं कि उनके साथी जिस संघर्ष के लिए चले गए वे उसे हासिल करके यहां से उठेंगे। कि वे लड़ेंगे और जीतेंगे। जीत हासिल कर एक बार फिर कंपनी के अंदर जाएंगे। 
    
अन्य संगठनों के वक्ताओं ने भी मजदूर साथियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन साथियों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपनी मांगों को, अपने संघर्षों को जीतें और साथ ही इस पूंजीवादी व्यवस्था को जिसने मजदूर साथियों को छीन लिया है, जो आए दिन मजदूरों की हत्यायें कर रही है उस पूंजीवादी व्यवस्था को भी खत्म करने का संकल्प लें। सभा में मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों के अलावा इंकलाबी मशहूर केंद्र, SUCI, CSTU, KNS के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। सभा का समापन मजदूरों को याद करते हुए क्रांतिकारी गीतों के साथ किया गया। 
    
गौरतलब है कि मारुति सुजुकी के बर्खास्त मजदूर मानेसर तहसील में 18 सितंबर से अपनी मांगों के लिए दिन-रात स्थाई धरना लगा कर बैठे हुए हैं। अपनी मांगों के लिए कई सभाएं, आक्रोश रैली आदि का आह्वान व आयोजन कर अपनी मांगों के सम्बन्ध में ज्ञापन दे चुके हैं। मजदूरों की मांगे हैं कि :- 
1. मारुति सुजुकी मानेसर के बर्खास्त सभी निर्दोष मजदूरों की कार्यबहाली की जाए। 
2. सभी अस्थाई मजदूर के लिए उचित वेतन समझौता और पक्की नौकरी लागू हो।
3. सभी झूठे मुकदमे वापस हों। 
        -गुड़गांव संवाददाता

आलेख

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?