मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) ने नई दिल्ली के सुरजीत भवन सभागार में ‘‘मासा की 10 वर्षों की यात्रा और भारत में हाल का मजदूर आंदोलन’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार 30 अगस्त को आयोजित किया।
सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई सौ मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सेमिनार की शुरूआत क्रांतिकारी गीतों से हुई, जिसके बाद मासा की ओर से कामरेड सोमनाथ और कामरेड सौम्येंदु ने सेमिनार के विषय पर प्रस्तुति दी।
अगले सत्र में मानेसर, फरीदाबाद, पानीपत, हरिद्वार, दिल्ली, दार्जिलिंग आदि में हाल के तथा जारी मजदूर संघर्षों के मजदूर प्रतिनिधियों ने सेमिनार को संबोधित किया।
इसके बाद के सत्र में MASA के घटक संगठनों- मजदूर संघर्ष संगठन, जन संघर्ष मंच हरियाणा, ग्रामीण मजदूर यूनियन (बिहार), CSTU, IFTU-सर्वहारा, इंकलाबी मजदूर केंद्र, AIWC, बिहार निर्माण और असंगठित श्रमिक यूनियन, कर्नाटक श्रमिक शक्ति, लाल झंडा मजदूर यूनियन- ने अपने विचार रखे।
MASA के घटक संगठनों के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा (skm), TUCI, IFTU, ।AIFTU-New, ICTU, क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्ता समिति), AIRTU और UP-CHO के प्रतिनिधियों ने भी सेमिनार में भाग लिया और सभा को संबोधित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मासा के संतोष के स्वागत वक्तव्य और विषय प्रवेश से हुई, जिसके बाद मासा की तरफ से कामरेड सोमनाथ ने वक्तव्य रखा। उन्होंने मासा के संघर्षशील सफर के 10 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए बताया कि मजदूर आंदोलन में स्थापित अर्थवादी-कानूनवादी व रस्म अदायगी की प्रवृत्ति एवं बिखराव के खिलाफ मासा को जुझारू मजदूर संगठनों के साझा मंच के रूप में 28 अगस्त 2016 को खड़ा किया गया था। इसे पूंजीवाद के नवउदारवादी हमलों, निजीकरण, मजदूर विरोधी नीतियों और शोषण-दमन के खिलाफ निरंतर समझौताहीन संघर्ष, आर-पार की लड़ाई के नारे के तहत तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि मासा ने मजदूरों की गुलामी के दस्तावेज 4 लेबर कोड और आर्थिक मांगों पर संघर्ष के साथ-साथ जरूरी राजनीतिक मुद्दों पर भी हस्तक्षेप किया है। फासीवादी मुहिम, साम्राज्यवादी युद्धों, फिलिस्तीन में जारी जनसंहार, जी-20 जैसे मंचों के खिलाफ अभियानों के अतिरिक्त किसान आंदोलन व अन्य जनांदोलनों के साथ एकजुटता स्थापित की गई। साथ ही, इस वर्ष पानीपत, बरौनी, सूरत से शुरू हुए उद्योग उपक्रमों के मजदूरों के देशव्यापी उभार एवं दिल्ली एनसीआर में स्वतः स्फूर्त औद्योगिक हड़ताल में भी जमीनी हस्तक्षेप किया गया।
हिल प्लांटेशन इम्प्लाइज यूनियन, लान्गव्यू यूनिट दार्जिलिंग की अध्यक्ष बिंदिया ने लान्गव्यू चाय बागान में चली 102 दिन की हड़ताल के बारे में बताया जिसमें अंततः मजदूरों की जीत हुई और 6 करोड़ की बकाया पीएफ राशि का भुगतान किया गया, साथ ही गैरकानूनी मजदूर विरोधी कार्रवाई के लिए मालिक की गिरफ्तारी भी हुई।
मानेसर में फैक्टरी मजदूर आकाश ने अप्रैल में गुरूग्राम मानेसर में औद्योगिक मजदूरों की दयनीय स्थिति (12-14 घंटे काम करने के बाद भी 12,000 रु. मजदूरी) को लेकर उठे आंदोलन एवं पुलिस दमन के बारे में बताया जिसमें उन्हें भी फर्जी मुकदमे लगा कर गिरफ्तार कर 49 दिन जेल में रखा गया था।
फरीदाबाद की फैक्टरी मजदूर कुसुम ने अप्रैल-मई में फरीदाबाद में उठे औद्योगिक मजदूर आंदोलन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे मजदूरों को मनमाने ढंग से अर्धकुशल-अकुशल श्रेणियों में बांट कर न्यूनतम वेतन में कटौती की जाती है।
भगतसिंह स्टूडेंट - यूथ फ्रंट के अनिरुद्ध ने पानीपत इंडियन आयल रिफाइनरी में न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे काम के लिए उठे मजदूर आंदोलन के बारे में बताया जिसमें हजारों ठेका रिफाइनरी व निर्माण मजदूरों ने भागीदारी की थी। यहां भी पुलिस दमन के तहत दो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई थी।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में मजदूर चेहरा बने मो. इरफान ने मजदूरों की एकता का संदेश देते हुए और मजदूरों को जाति-धर्म में बांटने के लिए शासकों की चालों का भंडाफोड़ करते हुए क्रांतिकारी कविताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने मजदूर वर्ग के महानतम शिक्षक काल माक्र्स के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मजदूर संघर्ष संगठन के प्रवेन्द्र ने उत्पादन प्रणाली के छोटे-छोटे उद्योगों में बंट जाने से मजदूरों की एकता स्थापित करने में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। साथ ही स्थानीय संगठनों को देशव्यापी मंच व समन्वय प्रदान करने में मासा की भूमिका को रेखांकित किया।
ग्रामीण मजदूर यूनियन बिहार के लक्षदीप ने मजदूर संगठनों की कमजोर स्थिति को रेखांकित किया जिसके कारण वे स्वयं स्फूर्त मजदूर संघर्षों को दिशा व योजना देने की स्थिति में नहीं आ पा रहे हैं। राजनीतिक अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से उन्होंने बताया कि विश्व पूंजीवादी व्यवस्था के बढ़ते संकट और कमजोर पड़ चुके मजदूर आंदोलन का ही नतीजा था कि नवउदारवादी नीतियों के जरिए संकट का पूरा बोझ मजदूर वर्ग के कंधों पर डाल दिया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा के सेक्रेटेरिएट के सदस्य पी कृष्णप्रसाद ने इस आयोजन पर मासा को बधाई दी और किसानों के साथ मजदूरों के संघर्षों की एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने 26 नवंबर से शुरू होने वाले किसान आंदोलन, जिसमें लेबर कोड को रद्द करने की मांग भी केंद्र में है, के नए चरण में मजदूरों के समर्थन व भागीदारी का आह्वान किया।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के श्यामवीर ने बताया कि कैसे कोरोना लाॅकडाउन की अमानवीय स्थितियों के बीच ही सरकार ने लेबर कोड को पारित कराया जो मजदूर वर्ग पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। बुनियादी अधिकारों के कुचले जाने के कारण मजदूर और पूंजीपति वर्ग के आमने-सामने की लड़ाई की स्थिति बन गई है जिसके लिए मजदूर वर्ग के एक जुझारू संगठन की जरूरत है।
जन संघर्ष मंच हरियाणा के पाल सिंह ने MASA के सामूहिक अनुभव पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान मजदूर आंदोलन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, ताकि स्वतः स्फूर्त मजदूर विरोध-प्रदर्शनों को आगे की दिशा दी जा सके। उन्होंने पानीपत के संघर्ष का उदाहरण दिया, जहां MASA ने हस्तक्षेप किया था। उन्होंने मजदूर आंदोलन को पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था का मुकाबला करने और उसे परास्त करने के लिए एक राजनीतिक दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और इस प्रक्रिया में MASA की भूमिका को रेखांकित किया।
ब्ैज्न् के अमिताभ ने कहा कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के सीमित मंच से अलग जो तमाम कारखानों और सेक्टरों में अलग-थलग संघर्ष उठ रहे थे उन्हें एक सूत्र में कैसे बांधा जाए इस सवाल को हल करने का एक प्रयास था मासा का गठन। मजदूरों को तमाम श्रेणियों में बांट कर उनकी एकता तोड़ी जा रही है। आजादी के 80 साल बाद भी हम लिविंग वेज के बजाए न्यूनतम वेज के ही सवाल पर फंसे हुए हैं।
MSS, CSTU, PSYA-रिफाक और इमके की सांस्कृतिक टीमों ने जोशीले क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए।
* सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘उद्योग’ की परिभाषा की पुर्नव्याख्या के हालिया फैसले, जिससे कई संस्थान उद्योग की अवधारणा से बाहर और अतः ढेरों मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, के खिलाफ फैसले को वापस लेने का एक प्रस्ताव पारित किया गया।
* दिल्ली एनसीआर में इस वर्ष उठे मजदूर आंदोलन में नोएडा में गिरफ्तार मजदूरों व कार्यकर्ताओं की रिहाई एवं उन पर सभी मुकदमे रद्द करने की मांग के साथ एक दूसरा प्रस्ताव भी पारित हुआ।
* हरियाणा के नगरपालिका सफाई मजदूरों एवं अग्निशमन कर्मचारियों द्वारा अपनी जायज मांगों पर चलाए जा रहे संघर्ष से पूर्ण एकजुटता व समर्थन जाहिर करते हुए एवं उनकी मांगों को पूरा करने की मांग पर तीसरा प्रस्ताव पारित किया गया।
-दिल्ली संवाददाता