राष्ट्रीय

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गाजा नरसंहार में भारत सरकार की भूमिका /gaza-narasanhar-mein-bharat-sarakar-ki-bhumika
आप में फूट: भाजपा का काला कारनामा /aap-mein-phoot-bhajapa-ka-kala-karanaamaa
मानेसर में मज़दूर आंदोलनों का दमन, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां
मानेसर के मज़दूर संघर्षों में हरियाणा सरकार का दोहरा चरित्र उजागर /manesar-ke-majadoor-sangharson-mein-harayana-sarakar-ka-dohara-charitra-ujagar
एस आई आर पर सेमिनार /s-i-r-par-seminar
मजदूर आक्रोश की नई लहर : अभी तो ली अंगड़ाई है..... /majadur-aakrosha-ki-nai-lahar-abhi-to-li-angadaai-hai
मजदूरों और मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं को साजिशन फर्जी और संगीन मुकदमों (तोड़फोड़, आगजनी, हत्या का प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र इत्यादि) में फंसाने एवं मजदूर आंदोलन के दमन के विरुद्ध व्यापक एकजुटता हेतु इंकलाबी मजदूर केंद्र का आह्वान /workers-aur-workers-sangthan-ke-karyakarataon-ko-sajishana-pharji-aur
वेदांता के पावर प्लांट में विस्फोट, 14 मज़दूरों की मौत /vedanta-ke-power-plant-mein-blast-14-workers-ki-death
शर्म, मगर उनको आती नहीं .... /sharm-magar-unako-aati-nahin
पं.बंगाल : एस आई आर और भाजपा का चुनाव आयोग /bangal-s-i-r-aur-bhajapa-ka-chunav-ayoga

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।