सूरत : मजदूर फिर सड़कों पर

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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सूरत के टैक्सटाइल व कढ़ाई मजदूर अगस्त माह में सड़कों पर उतरे थे। वे प्रमुखता से रविवार अवकाष, 8 घंटे का काम व ओवरटाइम के दोगुने भुगतान की मांग कर रहे थे। तब एक ओर प्रशासन ने मालिकों पर दबाव डाल कुछ मांगें मानने का आश्वासन दिलाया था तो दूसरी ओर बर्बर लाठीचार्ज, फर्जी मुकदमे व कुछ मजदूरों की गिरफ्तारी से संघर्ष का दमन किया था।
    
मालिक तुरंत ही अपने आश्वासनों से मुकर गये और उन्होंने मजदूरों से हफ्ते में सातों दिन 12-12 घण्टे काम लेना जारी रखा। ऐसे में मजदूर अपने साथ हुए धोखे से त्रस्त होकर 12 सितम्बर को फिर सड़कों पर उतर आये। मजदूरों ने जिला अधिकारी के कार्यालय को घेर लिया। अंत में एक बार फिर प्रशासन ने मालिकों को आश्वासन देने को मजबूर किया और मजदूर अगले दिन से काम पर लौट गये। 
    
मजदूरों ने बताया कि सूरत व आस-पास की टेक्स्टाइल क्षेत्र में करीब 18 लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं। उन्हें 7 दिन 12-12 घंटे प्रति हफ्ते काम करना पड़ता है। उन्हें साप्ताहिक अवकाश तक नहीं मिलता। ऐसे में वे थक कर जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं। मजदूरों ने कहा कि 30 सितम्बर तक मांगें न माने जाने पर वे फिर से संघर्ष शुरू करेंगे। 
    
प्रदर्शन के दौरान पुलिस का रुख फिर से दमनकारी रहा। वह प्रदर्शनकारियों की फोटो खींचने के साथ धमकाने का काम करती रही। पुलिस बुरी तरह से मालिकों के पालतू की तरह व्यवहार करती रही। 
    
वेदांत इको पार्क-2 के एक मालिक ने 8 घंटे काम से अपने उत्पादन गिरने का हवाला दिया और रविवार अवकाश को व्यवसाय डुबोने का कदम बताया। इस तरह स्पष्ट है कि मालिक मजदूरों की मांगों को सुनने को तैयार नहीं हैं। पर मजदूर भी अब दमन का भय मन से निकाल निर्णायक संघर्ष के लिए क्रमशः तैयार हो रहे हैं। 

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