युद्ध

लेबनान में गाजा जैसा जातीय सफाया -अशोक स्वैन

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जब दुनिया की नजरें डर और अविश्वास के साथ डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के खतरनाक टकराव पर टिकी थीं, लेबनान में हो रही तबाही दुनिया के ध्यान से दूर रही। इजराइल अपने उत्तरी पड़ोसी क

होरमुज की अमेरिकी घेराबंदी व बढ़ता तनाव

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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच पहले चक्र की वार्ता के विफल हो जाने के बाद अमेरिका ने होरमुज पर अपनी घेरेबंदी की घोषणा कर दी। इस घेरेबंदी के लागू होने से अमेरिका ने होर

सभ्यताएं न एक रात में पैदा होती हैं और न एक रात में मरती हैं

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ईरान पर अमेरिकी इजरायली हमलों के खिलाफ दुनिया भर में तीखे हो रहे मजदूर मेहनतकश जनता के आक्रोश के बीच ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हुए हैं। अमेरिकी साम

इजरायल-अमेरिका और धर्मयुद्ध

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पूंजीवादी सोच की यह समस्या है कि वह अपने विश्लेषण में स्वयं पूंजीपति व्यवस्था के मूलभूत चरित्र को कभी संज्ञान में नहीं लेती। वह कभी स्वीकार नहीं करती कि यह अन्याय-अत्याचार और शोषण वाली वर्गीय व्यवस्था है जो पूंजीपति वर्ग के हित में उसके हिसाब से चलती है। कि छिपी या खुली हिंसा इसका अनिवार्य तत्व है।

साम्राज्यवादी विश्व व्यवस्था में बदलता शक्ति संतुलन

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अमरीकी साम्राज्यवादी और यहूदी नस्लवादी इजरायली शासकों ने खाड़ी के देशों के शासकों को ईरान के विरुद्ध युद्ध में प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी कराने की पूरी कोशिश की। वे इस बात के लिए उनको उकसाते रहे कि ईरान ने उनके देश पर हमला किया है, इसलिए उन्हें इस हमले का विरोध करना चाहिए।

ट्रम्प-नेतन्याहू को ईरान ने कैसे सबक सिखाया

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अमेरिकी-इजरायली शासकों द्वारा 28 फरवरी को जब ईरान पर हमले बोलना शुरू किया गया तो हमलावरों के साथ-साथ दुनिया में किसी को भी अंदाजा नहीं था कि यह जंग एक माह से अधिक समय बीत

लम्बा खिंचता युद्ध : बढ़ती दुश्वारियां

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अमेरिकी-इजरायल हमलावरों द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध को एक माह से अधिक हो चुका है। ट्रम्प-नेतन्याहू का चंद दिनों में ईरान में सत्ता परिवर्तन का ख्वाब धूल धूसरित हो चुका

अमेरिकी साम्राज्यवादियों का बढ़ता पागलपन व बहशीपन

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बदमाश ट्रम्प व धूर्त नेतन्याहू का न केवल जनता के बीच बल्कि स्वयं शासक वर्ग की कतारों के बीच भी विरोध तेजी से बढ़ा है। इस कारण इन दोनों के तेवर पहले दिनों के मुकाबले बाद में ढीले पड़ने  शुरू हुए हैं। दोनों ही देशों में ट्रम्प व नेतन्याहू को आगामी महीनों में चुनाव का सामना करना है। युद्ध का लम्बा खिंचना इन दोनों ही धूर्तों के राजनैतिक भविष्य पर संकट खड़ा करने लगेगा। और ठीक यही ईरान चाहता है।

अमरीका-इजरायल का ईरान के विरुद्ध युद्ध

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अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

आलेख

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मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।