उन्मादी यात्रा बनती कांवड यात्रा

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वर्ष 2025 के जुलाई माह में 11 जुलाई से 23 जुलाई तक चली कांवड़ यात्रा में चार करोड़ 50 लाख कांवड़ियों की भागीदारी का हरिद्वार प्रशासन ने अनुमान लगाया है। 400 करोड़ की भगवा टी-शर्ट, 200 से 300 करोड रुपए तक के जल पात्र, टोकरियां व झंडे, लगभग 1000 करोड रुपए के लंगर, भोजन एवं राशन, सुरक्षा व ट्रैवल सेवायें, 200 से 300 करोड रुपए डाक कांवड़ियों के वाहन किराया, डीजे सेवाएं, पार्किंग शुल्क, ढाबा व स्वास्थ्य शिविर पर, इसके अलावा कई करोड़ रुपए स्टील के कलश, बांस के डंडे आदि का खर्च का अनुमान है। बसों व ट्रेनों का भाड़ा व अन्य कई तरह के खर्च को जोड़ेंगे तो यह अरबों रुपए में खर्चा है। हिंदू धर्म के नाम पर हिंदुओं के ही अरबों रुपए इस यात्रा में खर्च हुए। बड़े कारोबारियों, नेताओं, अफसरों की कई करोड़ रुपए में संपत्तियां बढ़ गईं। आम गरीब हिंदू और कंगाल हो गया। यही है असली खेल। कमाता कौन है? लुटता-पिटता कौन है? काल्पनिक दुश्मन (भारत के संदर्भ में मुसलमान) खड़ा कर दो और धर्म के नाम पर लूट जारी कर दो, ये है कांवड़ यात्रा का राजनीतिक अर्थशास्त्र।
    
कांवड़ यात्रा के दौरान अधिकांश कांवड़िए चरस-गांजे के नशे में धुत रहते, गलती से भी कोई इन्हें छू देता तो पूरी गुंडागर्दी पर उतर कर उत्पात मचाते, गाड़ियां तोड़ने से लेकर लोगों को पीटते व पुलिस के सिपाही भी पीटते दिखे। संघ-भाजपा की सरकारों द्वारा कांवड़ यात्रा के दौरान फड़-खोखे वालों से अपनी दुकानों पर नेम प्लेट लगाने के  तुगलकी फरमान से मुसलमानों में दहशत और आतंक का माहौल बना। गाड़ी तोड़ने, मारने-पीटने, पुलिस के साथ मारपीट-लूटपाट आदि की खबरों से अखबार भरे रहते थे। हरिद्वार से लेकर दिल्ली, हरियाणा तक स्कूल-कालेज बंद रहे। सिडकुल क्षेत्र में मजदूरों को बिना वेतन की छुट्टी दी गई। ये मजदूर हिंदू ही थे, स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अधिकांश हिंदू ही थे। इस यात्रा को संघ-भाजपा द्वारा बड़ी संख्या में प्रायोजित व प्रोत्साहित किया जा रहा है, कांवड़ियों पर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा, मुख्यमंत्रियों द्वारा कांवड़ियों के पैर धोये जा रहे थे, दिल्ली भाजपा सरकार ने पांच लाख कांवड़ियों को जूट के थैले व गंगाजल के डोलचे मुफ्त में दिये। भाजपा और संघ की शह पर ये कांवड़िए सारे नियम कानून को तोड़ते हुए बाइक में तीन-तीन सवार बिना हेलमेट के, बस-ट्रकों के ऊपर बैठकर ऊंची आवाजों में डीजे बजाने के साथ तरह-तरह से उत्पात मचा रहे थे। पुलिस वाले बचाने में खुद ही पिट रहे थे लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। बल्कि उल्टा संघी सरकारें यह कह रही थीं कि अधर्मियों द्वारा सज्जन कांवड़ियों को बदनाम करने की साजिश है। इसी दौरान झारखण्ड में बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से कई कांवडिए मारे गये। हरिद्वार में मनसा देवी व बाराबंकी में जल चढ़ाने के दौरान भगदड़ मचने से कई लोग मरे व दर्जनों घायल हो गये। जगह-जगह दुर्घटनाओं में भी कई लोग घायल हुए। 
    
सरकारें कांवड़ यात्रा में भारी भीड़ जुटा इंतजाम के प्रति लापरवाह होती रही है। कुंभ से लेकर मौजूदा यात्रा में यह देखने को मिला। कांवड़ यात्रा से लेकर हर हिन्दू धार्मिक त्यौहार जनता को उन्मादी बनाने का जरिया संघ-भाजपा ने बना लिया है। इस उन्मादी यात्रा से अल्पसंख्यकों से लेकर सड़क पर चलते आम जन सबको भारी तकलीफें होती रही हैं। मुसलमानों को सड़कों पर नमाज पढ़ने से रोकने वाली सरकारें सड़कें ही कांवड़ियों के हवाले कर दे रही हैं। 

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