मजदूर आवाज
गुजरात में 12 घंटे कार्य के प्रावधान का विधेयक पारित
गुजरात सरकार ने दिनांक 10 सितम्बर 2025 को गुजरात विधानसभा ने कारखाना अधिनियम 1948 में संशोधन करने वाले एक विधेयक को पारित कर दिया। संशोधन किये गए विधेयक में गुजरात सरकार
गरीब होती जनता और अमीर होते जनप्रतिनिधि
मौजूदा कुछ वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और फिर अभी नेपाल में यह देखने में आया है कि जनता का आक्रोश अपने जनप्रतिनिधियों पर बहुत तीव्र ढंग से अभिव्यक्त हुआ है। नेताओं के
टांय टांय फिस्स हुई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना
भारत की अत्यन्त गंभीर बेरोजगारी की समस्या पर पानी के छींटे मारने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 2024 के बजट में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना लेकर आई थी। इस योजना का घ
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर 2 अदालती निर्णय
बीते दिनों तेलंगाना व गुजरात उच्च न्यायालय ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर दो परस्पर विरोधी निर्णय दिये। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने जहां सरकार को इन्हें नियमित करने का आदेश दि
8 घंटे कार्यदिवस को बढ़ाने में जुटी सरकारें
काम के घंटे दिन में कितने होने चाहिए, पूंजीवादी व्यवस्था की शुरूआत से ही यह ऐसा प्रश्न रहा है जिसका पूंजीपति वर्ग एक तो मजदूर वर्ग दूसरा उत्तर देता रहा है। पूंजीपति वर्ग
नस्लीय इजरायल को एज्योर नहीं
माइक्रोसाफ्ट ने चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिन्होंने कंपनी के इजरायल के साथ संबंधों को लेकर कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, जिनमें से दो ऐ
बुलडोजर कार्यवाही व सत्यापन अभियान रोकने को सत्याग्रह
हल्द्वानी/ बुद्ध पार्क में 10 अगस्त 25 को कई संगठनों द्वारा सभा की गयी। सभा का मुख्य उद्देश्य बुलडोजर कार्रवाई व कथित सत्यापन के नाम पर हो रहे अधिकारों क
अडाणी परिवार ने प्रासाद मिल मजदूरों के घर उजाड़े
एक समय था कि जब फैक्टरी, कल-कारखाने लग रहे थे तब मालिकों को बड़े पैमाने पर मजदूरों की जरूरत थी और मजदूर फैक्टरी के आस-पास बस गये और सरकार तथा फैक्टरी मालिक मजदूरों को आवास
राष्ट्रीय
आलेख
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि