विविध

महिला आरक्षण क्या महज एक झुनझुना

नये संसद भवन में आयोजित संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक आनन-फानन में पारित करवा दिया गया। इस विधेयक को संसद भवन के गलियारों में धूल फांकते हुए दशकों गुजर गये थ

देश की पतंग बहुत ऊंची उड़ रही है, कभी भी कट सकती है

हर रोज खबर अखबार जब भी खोलता हूं तो पूरे पेज पर मोदी की फोटो छपी होती है। हर रोज ही मोदी के पोस्टर मोदी की फोटो। हर रोज मोदी कोई न कोई बड़ा इवेंट कर रहे होते हैं। हर योजना

भारत की विदेश नीति : विशेष संदर्भ कनाडा

भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी अभी जी-20 के अपनी अध्यक्षता में हुए सफल आयोजन के लिए अपनी पीठ थपथपा ही रहे थे कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी संसद में बयान

भगत सिंह के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

भगत सिंह का नाम सुनकर आज भी कोई बुजुर्ग हो अथवा महिला या नौजवान; कोई भी क्यों न हो, राह चलता एक बार को ठिठक जाता है और उनके सम्मान में अपना सिर झुका लेता है। इसका कारण अप

मजहब, धर्म और रिलिजियन

आजकल सनातन धर्म की काफी चर्चा है। डी एम के नेता उदयनिधि के सनातन धर्म के उन्मूलन की मांग के बाद हिन्दू फासीवादी इसकी रक्षा में उठ खड़े हुए। उन्होंने सनातन धर्म को हिन्दू ध

बेलसोनिका यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द - मजदूर आक्रोशित

गुड़गांव/ 23 सितम्बर 2023 को ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, हरियाणा ने बेलसोनिका यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इस तरह श्रम विभाग ने हरियाणा में जुझारू संघ

का. नगेन्द्र स्मृति वार्षिक सेमिनार

हर वर्ष की भांति इस वर्ष 8 अक्टूबर 2023 को नागरिक ‘पाक्षिक’ वार्षिक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। इस वर्ष यह सेमिनार बरनाला (पंजाब) में आयोजित किया जा रहा है। सेमिनार का विषय आम चुनाव, बढ़ता फासीवादी

भगतसिंह होने का मतलब

शहीद भगतसिंह शायद उन चंद व्यक्तियों में होंगे जिनकी लोकप्रियता पीढ़ियों के बदले जाने के बाद भी हर नयी पीढ़ी के बीच बनी रहती है। वे अपनी युवावस्था में भारत की आजादी की लड़ाई

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?