अब भाजपा के काले कारनामों का ताजा शिकार आम आदमी पार्टी (आप) बनी है। आप के राज्यसभा के दस सांसदों में से सात सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। राघव चड्ढा जो कल तक भाजपा की पोल खोलता फिरता था अब केजरीवाल और आप पार्टी की पोल खोल रहा है। उसे और उसके साथियों को भाजपा महान राष्ट्रवादी, साफ-सुधरी पार्टी नजर आती है तो मोदी नया भगवान नजर आते हैं। राघव चड्ढा की किस कमजोर नस पर मोदी-शाह ने हाथ रखा इसका खुलासा तो समय करेगा पर उनके एक साथी- अशोक मित्तल के ठिकानों पर चंद दिन पहले ही ई डी आदि ने छापे मारे थे। मित्तल ‘लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ (एल पी यू) का मालिक है। एल पी यू पंजाब की एक ऐसी निजी यूनिवर्सिटी है जिसने कई तरह से नाम कमाया हुआ है। इधर मित्तल के ठिकाने पर छापे पड़े और उधर उन्होंने मोदी के चरण पकड़े।
आप पार्टी और भाजपा में ज्यादा से ज्यादा फर्क इतना है कि एक अर्द्ध फासीवादी पार्टी है तो दूसरी पूरी तरह फासीवादी है। केजरीवाल ‘जी’, मोदी ‘जी’ का लघु संस्करण ही है। और अमेरिका से दोनों का समान लगाव है। दोनों ढंग से जानते हैं कि कैसे जनता की आंख में धूल झोंकी जाती है। धर्म का राजनीति में इस्तेमाल, लोक-लुभावन वाद, अंधराष्ट्रवाद, पोंगापंथ आदि में केजरीवाल मोदी ‘जी’ का जितना अनुसरण करते हैं उतना ही उनसे होड़ भी करते हैं। इस तरह राघव चड्ढा एण्ड कम्पनी का आप पार्टी से पलायन छोटे मोदी से बड़े मोदी की मण्डली में शामिल होना भर है। राघव चड्ढा की सारी बातें उतनी ही खोखली और थोथी हैं जितनी उनके पुराने या नये आका की हैं।
आप पार्टी का उत्थान जितनी तेजी से हुआ था उसका पराभव भी उतनी ही तेजी से हो रहा है। और यह कोई अनोखी बात नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नाम पर बनी पार्टी भ्रष्टाचार का ही प्रतीक बन गयी। यह एक दशक से भी कम समय में हुआ। पूंजीवादी राजनीति में अक्सर ही यह होता है। जो सबसे ज्यादा गरीबों की बात करता है वह सबसे ज्यादा गरीबों का गला रेतता है। जो सबसे ज्यादा महिलाओं की बात करता है वह महिलाओं का जीना मुहाल कर देता है। जो राजनीति में शुचिता की बात करता है वह सांसद-विधायकों के टिकट पैसे लेकर बांटता है।
आप पार्टी राघव चड्ढा एण्ड कम्पनी के जाने के बाद आपदा का शिकार है और मोदी एण्ड कम्पनी आपदा में अवसर ढूंढ रही है। पंजाब मंे अगले साल विधानसभा चुनाव भी हैं।