साम्राज्यवाद
फिलिस्तीनी मुक्ति आंदोलन से जुड़े साहित्यकार की हत्या
राफेत अलारेर नामक फिलिस्तीन के शिक्षाविद और कवि की हत्या इजरायली हवाई हमले के जरिये 7 दिसम्बर को कर दी गयी। राफेत अलारेर गाजा के इस्लामिक विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे। इसके अति
गाजा नरसंहार और संयुक्त राष्ट्र
7 दिनों के युद्ध विराम के बाद फिलिस्तीन पर इजरायल द्वारा हमला फिर से शुरू हो गया है। जब दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम हुआ तो कुछ लोगों को उम्मीदें जगीं थी कि हो सकता है
कॉप-28 : जलवायु परिवर्तन रोकने का पाखण्ड
30 नवम्बर से 12 दिसम्बर 2023 तक दुबई में लगभग 200 देश जलवायु परिवर्तन पर घड़ियाली आंसू बहाने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में 1995 से हर वर्ष जलवा
इस्लाम विरोध : एक साम्राज्यवादी कुचक्र
इजरायल फिलिस्तीन के बीच वर्तमान संघर्ष के दौरान एक बार फिर इस्लाम विरोध चरम पर है। भारत के हिन्दू फासीवादियों से लेकर पश्चिमी साम्राज्यवादी शासक सभी इस्लाम पर निशाना साध रहे हैं। तरह-तरह से बताया ज
नदी से समुद्र तक, आजाद होगा फिलिस्तीन !
गाजा पट्टी पर इजरायली फौजों द्वारा खूंखार हमले को एक महीने से ज्यादा समय हो गया है। अभी तक लगभग 11,000 फिलिस्तीनी लोगों का नरसंहार हो चुका है। इनमें से आधे से ज्यादा बच्च
इजरायल और पश्चिमी साम्राज्यवादी
अक्सर यह सवाल उठता रहता है कि पश्चिमी साम्राज्यवादी इतनी दृढ़तापूर्वक इजरायल के समर्थन में क्यों खड़े रहते हैं?
कनाडा की संसद में एक नाजी का स्वागत
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया के किसी देश की संसद या राजनेताओं ने किसी नाजी हत्यारे के स्वागत का काम नहीं किया था। यहां तक कि नव फासीवादी ताकतें भी नाजी हत
नाइजर से फ्रांसीसी साम्राज्यवादियों की रुखसती
अफ्रीकी देशों से लुटेरे फ्रांसीसी साम्राज्यवादियों को एक-एक कर खदेड़ा जा रहा है। अब हालिया सैन्य तख्तापलट के शिकार हुए नाइजर से 1500 की संख्या में फ्रांसीसी सेना की वापसी
राष्ट्रीय
आलेख
भारत की पूंजीवादी राजनीति में योगेन्द्र यादव एक जानी-मानी शख्सियत हैं। वे खुद को समाजवादी कहते हैं तथा किशन पटनायक को अपना गुरू बताते हैं। केजरीवाल के साथ ‘अन्ना आंदोलन’
अमरीकी साम्राज्यवाद पराभव की ओर है। अभी वह दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है लेकिन उसको चुनौती देने वाली और भी ताकतें उभर कर आयी हैं। यूक्रेन में रूस की विजय आसन्न है। यूक्रेन अ
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।