आपका नजरिया- मासूम फरिश्तों को मारते-नोंचते घृणित साम्राज्यवादी/अमरीका

Published
Mon, 03/16/2026 - 07:11
/apka-najariya-masum-phariston-ko-marate-nonchate-ghranit

आज जब आप इस लेख को पढ़ रहे हैं, तब तक अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किये गये हमले को 15 दिन से अधिक हो चुके हैं। यह हमला अमेरिका ने अमेरिका व ईरान के बीच चल रही समझौता वार्ताओं के दौरान किया है। यह दिखाता है कि दूसरे देशों से समझौता वार्ता अमेरिका के लिये केवल दिखावा है। यह बात एक बार फिर से साबित हुई। वार्ता के समाप्त या किसी मुकाम तक पहुंचे बिना ही बीच वार्ता के दौरान अमेरिका ने पहला हमला ईरान की बच्चियों के स्कूल पर किया, जिसमें अब तक 168 बच्चियों की मौत की पुष्टि हुई है। इन 168 बच्चियों को मिनाब (इरान के शहर) में छोटी-छोटी कब्रों में सुपर्दे खाक किया गया है। यह एक बहुत ही दिल को तकलीफ देने वाला पल है। इसके अलावा एक अस्पताल एवं जिमनाजियम पर भी अमेरिका द्वारा मिसाइल दागी गई हैं। इसमें भी बड़ी संख्या में बच्चों के मरने व घायल होने की खबरें सामने आयी हैं। 
    
इस हमले से ठीक पहले हम देखते हैं कि जेफरी एपस्टीन जो अमेरिकी नागरिक था और बाल यौन अपराधी था। दुनिया के बड़े-बड़े लोगों से इसके संबंध थे। यह आदमी दुनियाभर के ‘‘हाई-प्रोफाइल’’ अभिजात वर्ग के लोगों के लिये तस्करी कर लड़कियों की सप्लाई करता था। जेफरी एपस्टीन जो कि एक यौन अपराधी था, अमेरिकी न्यायालय ने वर्ष 2008 में उसे सजा दी थी, लेकिन उसने 2019 में जेल में ही आत्महत्या कर ली।   
    
आज इन एपस्टीन फाइल्स का एक हिस्सा सार्वजनिक हुआ है, जिसमें 60 लाख फाइल्स हैं। इन फाइल्स में दुनिया के बड़े-बड़े रसूखदारों- अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रम्प, बिल गेट्स, भारत के हरदीप सिंह पुरी, नरेन्द्र मोदी, अनिल अंबानी, ब्रिटेन के एंड्रयू माउंटबेटन-विंडार के नाम शामिल हैं। इन फाइल्स में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ यौन अपराध व यौन हिंसा की बात उजागर की गयी है। इन्हें वेश्यावृत्ति में धकेला गया। एपस्टीन ने अमेरिका से वर्जिन द्वीप समूह में से एक लिटिल सेंट जेम्स आईलैंड खरीदा था, जहां एपस्टीन ने अपने इन गंदे और घृणित, अमानवीय कामों को अंजाम दिया। छोटी-छोटी बच्चियों के साथ इसके व इसके आकाओं के कारनामों को सुनकर पौराणिक कथाओं में बताये जाने वाले राक्षसों की आत्मा भी रो देगी। उनकी आत्मा भी दुख से चिंघाड़ पड़ेगी। 
    
इससे पहले भी वर्ष 2023 में हम फिलिस्तीन पर हुए इजरायली हमले में देख चुके हैं कि इजरायल ने किस तरह फिलिस्तीन में स्कूलों, अस्पतालों और राहत शिविरों को निशाना बनाया। राशन/खाने के लिये लाइनों में लगे लोगों को अपना निशाना बनाया। वहां पहुंचने वाली राहत सामग्री को रोक दिया, उसके रास्तों को बंद कर दिया। इन हमलों में 70 हजार से अधिक लोगां के मरने के आधिकारिक आंकड़े हैं, इसमें भी महिलायें और बच्चे सबसे ज्यादा थे। 30 हजार से अधिक बच्चों के मारे जाने की खबरें आयी थीं। 
    
अमेरिका यह घोषणा कर रहा है कि खामेनेई के मरने के बाद ईरानी जनता को तख्ता पलट करने का इससे अच्छा मौका फिर नहीं मिलेगा। कि खामेनेई के मरने से वहां की महिलायें आजाद हो जायेंगी। 
    
छोटी-छोटी बच्चियों के शरीर को नोंचने वाले गिद्ध खामेनेई की मौत से औरतों की आजादी की बात करते हैं। बच्चियों के स्कूल पर मिसाइल दागने वाले महिलाओं की आजादी की बात करते हैं। 
    
लेकिन यह वही अमेरिका है, जिसने सबसे पहले जापान में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला किया था। कभी ईराक और अफगानिस्तान पर झूठा आरोप लगाकर उन्हें बर्बाद कर दिया था। कभी वियतनाम पर बम बरसाये, तो कभी कोरिया के दो टुकड़े कर दिये। लेकिन इन हमलों और युद्धों के बाद भी वहां की महिलायें कभी मुक्त नहीं हो सकीं। अमेरिका द्वारा थोपे और उकसाये गये इन युद्धों में अभी तक लाखों महिलायें और लाखों बच्चे मारे जा चुके हैं। और पता नहीं और कितनों को और मारने की योजना उसने बना रखी है। लेकिन पूरी दुनिया के इंसाफ पंसद लोग इस समय ईरान के साथ खड़े हैं। 
    
भारत सरकार के द्वारा ईरान के साथ अपनी एकजुटता नहीं दिखाई देना दिखाता है कि नरेन्द्र मोदी आज भी 2002 के गोधरा वाले मोदी ही हैं। 2014 के चुनावों के लिये की गई लीपा-पोती, जो उनके चेहरे से धीरे-धीरे उतर रही थी, वह एपस्टीन फाइल्स में उनके नाम आने और इस हमले के बाद पूरी तरह से उतर गई है।  
    
अमेरिकी साम्राज्यवादियों की आंख में अांख डालकर चुनौती देने वाले खामेनेई हों या सद्दाम हुसैन सभी अमेरिका को आंख में कंकड, नहीं तीर की तरह चुभते हैं।   -हेमा, दिल्ली 

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।