एक बदमाश की वापसी

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चार साल बाद डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर से स.रा. अमेरिका के राष्ट्रपति बन गये। यह अमेरिकी इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई व्यक्ति जो एक बार राष्ट्रपति रहा हो और वह अगला चुनाव हार गया हो और फिर उससे अगले चुनाव में जीतकर राष्ट्रपति बन गया हो। ट्रंप वर्ष 2020 का चुनाव हार गये थे। ट्रंप की सत्ता में वापसी को उनके चापलूसों ने ‘ऐतिहासिक वापसी’ करार दिया। 
    
डोनाल्ड ने 2020 में अपनी हार को आसानी से नहीं स्वीकारा था। उन्होंने जो बाइडेन के लिए ‘‘‘शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तातंरण’’ से इंकार कर दिया था। उनके हिंसक समर्थकों ने ‘केपिटल हिल’ पर कब्जा कर लिया था। स्वयं डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं जिन्हें अपराधी घोषित किया जा चुका है। उन्हें सजा सुनाया जाना बाकी है। अब जब वे राष्ट्रपति बन गये हैं तो हो सकता है कि उनकी सजा माफ कर दी जाए। 
    
डोनाल्ड ट्रंप हर तरह से भ्रष्ट हैं। वे नैतिक से लेकर वित्तीय मामलों में कदाचरण के आरोपों से घिरे रहे हैं। लम्पट ट्रंप पर कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाये हैं। कुछ मामलों में उन्हें तब कानूनी राहत मिली जब उन्होंने करोड़ों डालर मुआवजे के रूप में उन्हें चुकाये। 
    
ट्रंप ने इस बार चुनाव जीतने के लिए हर तरह के हथकण्डे अपनाये। सनसनीखेज ढंग से उन्होंने अपने पर, अपने ही एक समर्थक से हमला करवाया। सहानुभूति हासिल करने का यह सस्ता हथकण्डा भारत में आये दिन चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपनाते रहे हैं। ममता बनर्जी तो अक्सर ही ठीक चुनाव के पहले चोटिल हो जाती हैं। 
    
डोनाल्ड ट्रंप को दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क का खुलेआम, नंगा साथ मिला। अमेरिकी अरबपति अलग-अलग उम्मीदवारों को पीछे से साथ देते रहे हैं लेकिन इस बार एलन मस्क तो सीधे ही चुनाव प्रचार में उतर गये। उन्होंने अपने खजाने के मुंह डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार के लिए खोल दिये। ट्रंप जीत सके इसके लिए उन्होंने हर रोज 100 करोड़ डालर खर्च किये। ट्रंप की जीत के बाद मस्क की कम्पनियों के शेयर के दाम राकेट बन गये हैं। 
    
एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप पर दांव क्यों लगाया। यह सीधे-सीधे उसके धंधे का सवाल है। डोनाल्ड ट्रंप एलन मस्क को खुश करने के लिए वह सब कुछ करेंगे जो वे कर सकते हैं। एलन मस्क निर्लज्ज हैं और ट्रंप उससे भी बड़े बेशरम हैं। 
    
ट्रंप की जीत की दास्तान तभी एक तरह से लिख दी गयी थी जब वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ठीक चुनावी प्रचार के बीच में अपना नाम वापिस लिया था। और फिर उन्होंने अपनी जगह उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस को उम्मीदवार बनवाया था। कमला हैरिस ने अपने आपको ट्रंप के सापेक्ष नैतिकता की मूर्ति के रूप में पेश किया। यद्यपि उसके हाथ बाइडेन की तरह गाजा में निर्दोष औरतों व बच्चों के खून से रंगे हुए हैं। जो बाइडेन, कमला हैरिस ऐसे सफेदपोश हत्यारे हैं जो नैतिकता का लबादा ओढ़े फिरते हैं। इस मामले में ट्रंप में दोहरापन नहीं है। वह एक जन्मजात बदमाश है। उसका जीवन बदमाशी में बीता है और सारी दुनिया पहले दिन से जानती है कि वह क्या है। और वह अपनी बदमाशी की सरेआम नुमाइश करता है और पूरी हेकडी से अपने विरोधियों को हड़काता फिरता है। कमला हैरिस, जो बाइडेन, बराक ओबामा जैसे अमेरिकी एक ओर ऐसी बातें करते हैं मानो वे शांति के रक्षक हैं (बराक ओबामा को शांति का नोबेल पुरूस्कार तक मिला है) परन्तु उनके कामों को देखा जाए तो पाया यही जाएगा कि उनके हाथ खून से रंगे हुए हैं। जो बाइडेन-कमला हैरिस यूक्रेन-रूस युद्ध हो या इजरायल द्वारा गाजा में किया जा रहा नरसंहार, दोनों के मुख्य षड्यंत्रकारी हैं। इजरायल के द्वारा किये जा रहे युद्धों का सत्तर फीसदी खर्चा अमेरिका ही उठा रहा है। 
    
असल में गौर से देखा जाए तो इस बार के चुनाव में अमेरिकी मतदाता ट्रंप को जिताने से ज्यादा बाइडेन-कमला हैरिस को हटाना चाहते थे। कमला हैरिस की हार से ही ट्रंप की जीत निकली है अन्यथा उसका जीतना आसान नहीं था। कमला हैरिस के पीछे वे यहूदी अरबपति थे जो इजरायल के समर्थक हैं। वे चाहते थे कि कमला हैरिस जीते ताकि वह इजरायल को वैसे ही समर्थन देती रहे जैसे वह अब तक दे रही है। और इजरायल पश्चिम एशिया में अपना कहर बरपाता रहे। 
    
हकीकत यही है कि ट्रंप भले ही चुनाव जीतने के बाद यह कह रहे हैं कि वे युद्ध खत्म कर देंगे। शांति ला देंगे परन्तु वे भी उसी साम्राज्यवादी-युद्धोन्मादी नीति को आगे बढ़ायेंगे जो कि बाइडेन ने अपनायी हुयी थी। वे ट्रंप ही थे जिन्होंने अपने पहले कार्यकाल में इजरायल के येरूशलम पर कब्जे को जायज ठहराते हुए वहां अमेरिकी दूतावास खोला था। इजरायल-फिलिस्तीन के मामले में अमेरिका के नेताओं व पार्टियों की नीति एक जैसी ही रही है। अपनी साम्राज्यवादी-युद्धोन्मादी नीतियों से ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में दुनिया भर में भारी बेचैनी पैदा कर दी थी। 
    
डोनाल्ड ने अपने चुनाव में घोर अंधराष्ट्रवादी नारा ‘अमेरिका को फिर से महान बनाओ’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन- ‘मागा’) लगाया। इस नारे का वास्तविक मतलब क्या है। इसका मतलब अमेरिका के साम्राज्यवादी हितों को निर्ममता से आगे बढ़ाओ। अमेरिकी वित्तीय पूंजी, हथियार कम्पनियों, बहुराष्ट्रीय निगमों के मुनाफे को और बड़े स्तर पर ले जाओ। जो भी अमेरिकी साम्राज्यवाद को चुनौती दे, उसे हर तरह से घेरो। अमेरिकी साम्राज्यवाद को आज सबसे बड़ी चुनौती चीनी साम्राज्यवाद से मिल रही है। ‘अमेरिका को फिर से महान बनाओ’ का अर्थ है कि पूरी दुनिया में अमेरिका का वर्चस्व हर तरह से कायम रहे। और दुनिया भी अमेरिका को अपने ढंग से जवाब दे रही है। अफगानिस्तान में कब्जा करने के इरादे मिट्टी में मिल गये। ट्रंप ने वहां बहुत कोशिश की थी, पानी की तरह पैसा बहाया था पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा। फिर ट्रंप के बाद आये जो बाइडेन चुपचाप अफगानिस्तान से भाग खड़े हुए। अब हो सकता है ट्रंप ऐसा यूक्रेन में या इजरायल में शांति के नाम पर करें। रूस से शांति के नाम पर यूक्रेन का बंटवारा कर लें। 
    
चुनाव में ट्रंप ने खुलेआम नस्लवादी बातें अपने प्रचार में कीं। मर्दवाद को बढ़ावा दिया। कमला हैरिस के बहाने महिलाओं का मजाक उड़ाया। ट्रम्प ने जीत हासिल करने के लिए विभाजनकारी तरीके अपनाये। उन्होंने अमेरिका से अप्रवासियों को खदेड़ने की धमकियां दीं। जो अमेरिकी साम्राज्यवादी पूरी दुनिया में हर देश में घुसपैठ करते हैं, हर किसी देश के आंतरिक मामले में दखल देते हैं, वे अपने देश में कानूनी या गैर कानूनी ढंग से आने वाले आम लोगों के खिलाफ घृणित प्रचार कर उनकी जान को जोखिम में डालते हैं। श्वेत फासीवादी-नस्लवादी आये दिन अप्रवासियों पर हमले करते हैं। यहां तक लूटपाट तक करते हैं और उनकी हत्या कर देते हैं। ट्रंप के सत्ता में आने से इन फासीवादी-नस्लवादी लोगों का हौंसला कई गुना बढ़ जाना है। न केवल अमेरिका के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में यह होना है। अकारण नहीं है कि भारत में मोदी, इजरायल में नेतन्याहू, रूस में पुतिन ट्रंप की जीत का स्वागत कर रहे हैं। 
    
पहले कार्यकाल में ट्रंप की नीतियां उस चालाक जंगली जानवर की तरह रही हैं जो घात लगाकर हमला करता है। और अपने पैंतरे इतनी तेजी से बदलता है कि शिकार उसकी पकड़ में आ जाये। इसलिए उसने अपने पहले कार्यकाल में उत्तरी कोरिया के धूर्त-क्रूर शासक किम जांग उन से यकायक मुलाकात की थी और उसे अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी। किम ने मौके का फायदा उठाया और ट्रंप को बता दिया कि वह भी कम नहीं है। ‘फिर से अमेरिका को महान बनाओ’ नारे का मतलब है कि पूरी दुनिया में उसका वही वर्चस्व कायम हो जो एक समय सोवियत संघ के पतन के बाद नब्बे के दशक में हो गया था। एक ध्रुवीय दुनिया हो जिसमें अमेरिकी साम्राज्यवाद का हर ओर दबदबा हो। परन्तु इक्कीसवीं सदी में चीनी साम्राज्यवाद के प्रकट होने, रूस के आक्रामक होने आदि ने बहुध्रुवीय दुनिया की संभावना पैदा कर दी। साम्राज्यवादी देशों के आपसी झगड़े और मतभेद बढ़ गये और अमेरिका का वर्चस्व व प्रभाव कम पड़ने लगा। ट्रंप पुराने दिनों को वापस लाना चाहता है जब हर ओर अमेरिका की तूती बोले। 
    
ट्रंप अमेरिकी साम्राज्यवाद का छंटा हुआ बदमाश है। उसकी वापसी दुनिया के लिए एक बड़ा अभिशाप ही साबित होगी। अमेरिका की जनता ने बुरे और उससे भी बुरे के बीच के चुनाव में, बुरे से बुरे को चुना। इसका खामियाजा जितनी दुनिया उतना ही अमेरिकी जनता भी भुगतेगी। 

 

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